बस्ती के 91 वर्षीय राम दत्त जोशी ने किया ‘मन की बात’ काव्य संग्रह का लोकार्पण, जीवन के अनुभवों को दिया स्वर
‘जीवन की शाम भी बड़ी अजीब होती है, इंसा तन्हा होते हैं, जब मौत करीब होती है’’ जैसी रचनायें सोचने को बाध्य करती है. पं. चन्द्रबली मिश्र, विनय शुक्ल ने कहा कि ‘मन की बात’ काव्य संग्रह में जीवन का रस छिपा है. 91 वर्षीय राम दत्त जोशी ने कहा कि संसार को जिस तरह से जिया उसे शव्दों में उतार दिया.
इसमें भविष्य के प्रति आशा और जीवन की मृगतृष्णा के भाव हैं. इस अवसर पर कृष्ण चन्द्र पाण्डेय, दीनानाथ यादव, हरिशंकर उपाध्याय, पेशकार मिश्र, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, अरविन्द कुमार चौरसिया, गिरीश चन्द्र मिश्र, रंगीलाल यादव, गणेशदत्त शर्मा आदि उपस्थित रहे.
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