बस्ती के 91 वर्षीय राम दत्त जोशी ने किया ‘मन की बात’ काव्य संग्रह का लोकार्पण, जीवन के अनुभवों को दिया स्वर

बस्ती के 91 वर्षीय राम दत्त जोशी ने किया ‘मन की बात’ काव्य संग्रह का लोकार्पण, जीवन के अनुभवों को दिया स्वर

वरिष्ठ नागरिक 91 वर्षीय राम दत्त जोशी कृत ‘मन की बात’ काव्य संग्रह का लोकार्पण कलेक्टेªट परिसर में  स्थित वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के शिविर कार्यालय में किया गया. समिति के महामंत्री वरिष्ठ अधिक्ता श्याम प्रकाश शर्मा, मजिस्टेªट महेश चन्द्र शर्मा ने कहा कि ‘मन की बात’ काव्य संग्रह में 91 वर्षीय राम दत्त जोशी ने अपने अनुभवों, एकेलापन, त्रासदी, बदलते सामाजिक मूल्य, दरकते सम्बन्धों को स्वर दिया है जो पाठक को झकझोर देती हैं.

‘जीवन की शाम भी बड़ी अजीब होती है, इंसा तन्हा होते हैं, जब मौत करीब होती है’’ जैसी रचनायें सोचने को बाध्य करती है. पं. चन्द्रबली मिश्र, विनय शुक्ल ने कहा कि ‘मन की बात’ काव्य संग्रह में जीवन का रस छिपा है. 91 वर्षीय राम दत्त जोशी ने कहा कि संसार को जिस तरह से जिया उसे शव्दों में उतार दिया.

इसमें भविष्य के प्रति आशा और जीवन की मृगतृष्णा के भाव हैं. इस अवसर पर कृष्ण चन्द्र पाण्डेय, दीनानाथ यादव, हरिशंकर उपाध्याय, पेशकार मिश्र, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, अरविन्द कुमार चौरसिया, गिरीश चन्द्र मिश्र, रंगीलाल यादव, गणेशदत्त शर्मा आदि उपस्थित रहे.

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भारतीय बस्ती
bhartiyabasti.com
12 Nov 2025 By Bhartiya Basti

बस्ती के 91 वर्षीय राम दत्त जोशी ने किया ‘मन की बात’ काव्य संग्रह का लोकार्पण, जीवन के अनुभवों को दिया स्वर

वरिष्ठ नागरिक 91 वर्षीय राम दत्त जोशी कृत ‘मन की बात’ काव्य संग्रह का लोकार्पण कलेक्टेªट परिसर में  स्थित वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के शिविर कार्यालय में किया गया. समिति के महामंत्री वरिष्ठ अधिक्ता श्याम प्रकाश शर्मा, मजिस्टेªट महेश चन्द्र शर्मा ने कहा कि ‘मन की बात’ काव्य संग्रह में 91 वर्षीय राम दत्त जोशी ने अपने अनुभवों, एकेलापन, त्रासदी, बदलते सामाजिक मूल्य, दरकते सम्बन्धों को स्वर दिया है जो पाठक को झकझोर देती हैं.

‘जीवन की शाम भी बड़ी अजीब होती है, इंसा तन्हा होते हैं, जब मौत करीब होती है’’ जैसी रचनायें सोचने को बाध्य करती है. पं. चन्द्रबली मिश्र, विनय शुक्ल ने कहा कि ‘मन की बात’ काव्य संग्रह में जीवन का रस छिपा है. 91 वर्षीय राम दत्त जोशी ने कहा कि संसार को जिस तरह से जिया उसे शव्दों में उतार दिया.

इसमें भविष्य के प्रति आशा और जीवन की मृगतृष्णा के भाव हैं. इस अवसर पर कृष्ण चन्द्र पाण्डेय, दीनानाथ यादव, हरिशंकर उपाध्याय, पेशकार मिश्र, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, अरविन्द कुमार चौरसिया, गिरीश चन्द्र मिश्र, रंगीलाल यादव, गणेशदत्त शर्मा आदि उपस्थित रहे.

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