यूपी में बिजली होगी और सस्ती: मिर्जापुर थर्मल पावर प्लांट से 2031 तक सप्लाई

यूपी में बिजली होगी और सस्ती: मिर्जापुर थर्मल पावर प्लांट से 2031 तक सप्लाई
यूपी में बिजली होगी और सस्ती: मिर्जापुर थर्मल पावर प्लांट से 2031 तक सप्लाई

उत्तर प्रदेश: पूर्वांचल के लिए एक बड़ी ऊर्जा परियोजना को लेकर अच्छी खबर सामने आई है. उत्तर प्रदेश में स्थित मिर्जापुर में प्रस्तावित थर्मल पावर प्लांट से मिलने वाली बिजली आम उपभोक्ताओं के लिए पहले से सस्ती हो सकती है. परियोजना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आने के बाद बिजली की कीमतों में और गिरावट की संभावना जताई जा रही है.

परियोजना से घट सकती है कुल लागत

बताया जा रहा है कि 1500 मेगावाट क्षमता वाले इस थर्मल एनर्जी पावर प्लांट में एक जरूरी माने जाने वाले संयंत्र को नहीं लगाने का निर्णय लिया गया है. इसके चलते परियोजना की कुल लागत में बड़ी कमी आने की बात कही जा रही है. लागत घटने का सीधा असर बिजली की दरों पर पड़ेगा, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है.

एफजीडी संयंत्र न लगाने से होगी बचत

प्लांट में फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन यानी एफजीडी सिस्टम नहीं लगाया जाएगा. डेवलपर की ओर से माना गया है कि इससे करीब 270 करोड़ रुपये की बचत होगी. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परियोजना की लागत घटती है, तो बिजली की फिक्स्ड कॉस्ट और वैरिएबल कॉस्ट दोनों में कमी आएगी.

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आयोग ने तय की बिजली की दर

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने मिर्जापुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के पावर सप्लाई एग्रीमेंट को मंजूरी दे दी है. आयोग ने बिडिंग प्रक्रिया के तहत तय हुई 5.38 रुपये प्रति यूनिट की दर को स्वीकार कर लिया है. यह पावर प्लांट अदाणी ग्रुप द्वारा विकसित किया जा रहा है और हाल ही में राज्य कैबिनेट से भी इसे हरी झंडी मिल चुकी है.

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यूपी को 2031 से मिलने लगेगी बिजली

इस परियोजना के पूरा होने के बाद वर्ष 2031 से उत्तर प्रदेश को बिजली की आपूर्ति शुरू हो जाएगी. इससे राज्य की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और बाहरी निर्भरता भी कम होगी.

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लागत की नियमित निगरानी के निर्देश

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को निर्देश दिए हैं कि परियोजना की वास्तविक लागत का हर 3 महीने में आकलन किया जाए. 

उपभोक्ता परिषद ने जताया बड़ा दावा

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के फैसले के बाद चेयरमैन से मुलाकात की. उन्होंने दावा किया कि एफजीडी सिस्टम न लगाने से केवल 270 करोड़ नहीं, बल्कि इससे कहीं ज्यादा राशि की बचत हो सकती है.

एफजीडी की लागत को लेकर दी गई दलील

अवधेश कुमार वर्मा ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि राज्यसभा में ऊर्जा राज्यमंत्री ने स्वीकार किया है कि एफजीडी संयंत्र की लागत प्रति मेगावाट 85 लाख से 1.2 करोड़ रुपये तक होती है. इसी आधार पर परिषद का अनुमान है कि इस सिस्टम को न लगाने से डेवलपर को करीब 2000 करोड़ रुपये तक का फायदा हो सकता है.

जीएसटी बदलाव से भी कम होगी लागत

परिषद ने यह भी कहा है कि जीएसटी दरों में हुए बदलाव के कारण भी परियोजना की कुल लागत घटेगी. ऐसे में बिजली की कीमत और कम होने की पूरी संभावना है.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।