यूपी में भूमि अधिग्रहण पर नहीं बनी सहमति, किसानों ने ठुकराया प्रस्ताव
रविवार को इस मुद्दे पर प्रशासन और किसानों के बीच आमने-सामने बातचीत हुई. बैठक का मकसद सहमति बनाना था, लेकिन चर्चा के दौरान किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई. बातचीत लंबी चली, पर किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी.
कई गांव, एक परियोजना
औद्योगिक गलियारा परियोजना के अंतर्गत सोरांव तहसील के कई गांवों की जमीन को शामिल किया जाना प्रस्तावित है. इनमें सराय लाल खातून, जुड़ापुर दांदू, हरमदिला, बस्ती की बाग और बारी गांव शामिल हैं. इन गांवों के सैकड़ों किसान इस योजना से सीधे प्रभावित होंगे. अनुमान के मुताबिक करीब 480 बीघा कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाना है.
बैठक में उठी असमानता की बात
प्रशासन की ओर से कहा गया कि परियोजना क्षेत्र के विकास और रोजगार को ध्यान में रखते हुए लाई गई है. लेकिन किसानों का कहना है कि विकास की कीमत सिर्फ कुछ गांव ही क्यों चुकाएं और वो भी कम मुआवजे के रूप में.
यहीं से शुरू हुआ असली विवाद
किसानों ने आरोप लगाया कि पड़ोसी गांव सराय लाल खातून में अधिग्रहित जमीन के बदले प्रति बीघा 72 लाख से लेकर 92 लाख रुपये तक मुआवजा तय किया गया है. वहीं, बारी, जुड़ापुर दांदू, बस्ती की बाग और हरमदिला गांवों में यही दर घटकर करीब 30 से 35.5 लाख रुपये प्रति बीघा रखी गई है. किसानों का कहना है कि यह अंतर पूरी तरह अन्यायपूर्ण है.
अधिकारियों और किसानों की सीधी बातचीत
रविवार को बारी गांव स्थित एक स्कूल में हुई बैठक में एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह, एसडीएम ज्ञानेंद्र नाथ और तहसीलदार राजेश कुमार पाल मौजूद रहे. किसानों की ओर से भारत लाल, राधेश्याम, राजू शुक्ला, राजेंद्र कुमार, लालचंद शुक्ल और धीरज कुमार पटेल सहित कई लोग शामिल हुए.
किसानों की साफ मांग
किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब जमीन का क्षेत्र, स्थिति और उपयोग एक जैसा है, तो मुआवजे में फर्क क्यों किया जा रहा है. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि उन्हें भी सराय लाल खातून उर्फ शिवगढ़ गांव के बराबर ही मुआवजा दिया जाए. किसानों का कहना है कि समान मुआवजा मिलने पर ही वे जमीन देने पर विचार करेंगे.
सहमति न बनने से अटका मामला
बैठक के बावजूद दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी. किसानों ने संकेत दिए कि जब तक मुआवजे में समानता नहीं लाई जाती, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं. वहीं प्रशासन ने किसानों की बात ऊपर तक पहुंचाने और समाधान निकालने का भरोसा दिया है.
वर्तमान में औद्योगिक गलियारा परियोजना का यह चरण मुआवजे के विवाद में फंसा नजर आ रहा है. साफ है कि जब तक किसानों को सही मुआवजा नहीं मिलता, तब तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जमीन पर उतारना चुनौती बना रहेगा.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।