सपा ने किया ऐसा ट्वीट कि शर्मसार हो गए खुद अखिलेश और डिंपल यादव!

सपा ने किया ऐसा ट्वीट कि शर्मसार हो गए खुद अखिलेश और डिंपल यादव!
SP tweeted in such a way that Akhilesh and Dimple Yadav themselves were embarrassed!

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ‘डीएनए’ शब्द ने आग लगा दी है। समाजवादी पार्टी की एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस पोस्ट में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पर अभद्र टिप्पणी करते हुए उनके डीएनए को कोलकाता के सोनागाची और दिल्ली के जीबी रोड से जोड़ दिया गया, जो एशिया के कुख्यात रेड लाइट एरिया माने जाते हैं। यही नहीं, पोस्ट में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए गए।

इस विवादास्पद पोस्ट के सामने आते ही बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सपा पर जोरदार हमला बोला। खुद ब्रजेश पाठक ने इस पर नाराजगी जताते हुए पोस्ट को शर्मनाक बताया और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को सीधे कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यह पोस्ट न सिर्फ व्यक्तिगत हमला है बल्कि उनके दिवंगत माता-पिता का भी अपमान है।

ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि क्या यही समाजवादी पार्टी की संस्कृति है? क्या डिंपल यादव इस तरह की स्त्री विरोधी और अपमानजनक सोच को स्वीकार करेंगी? उनके इस बयान के बाद सियासत और भी गरम हो गई।

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वहीं बीजेपी के अन्य नेता, जैसे देवरिया से विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने भी सपा पर करारा हमला करते हुए कहा कि लोकतंत्र में आलोचना और बहस स्वीकार्य है, लेकिन किसी उपमुख्यमंत्री के लिए इस स्तर की भाषा अस्वीकार्य है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और बेहद अफसोसनाक करार दिया।

सवाल उठने लगे कि क्या अब राजनीति में व्यक्तिगत स्तर पर इतने नीचे गिर कर हमले किए जाएंगे?

बवाल बढ़ता देख सपा ने विवादित पोस्ट को डिलीट कर दिया। लेकिन इसके बाद पार्टी ने एक सफाई भी दी। समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ब्रजेश पाठक बार-बार समाजवादी पार्टी को डीएनए से जोड़कर अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं। इसीलिए उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब दिया गया। हालांकि पार्टी ने यह भी स्वीकार किया कि इस प्रकार की भाषा का उपयोग नहीं होना चाहिए और पोस्ट को डिलीट करना उचित समझा।

सपा की ओर से यह भी कहा गया कि जब आप किसी कांच पर पत्थर फेंकते हैं तो उसके टुकड़े खुद आपकी तरफ भी आते हैं। पार्टी ने यह भी तर्क दिया कि ब्रजेश पाठक सपा को लॉ एंड ऑर्डर, महिला सुरक्षा और गुंडागर्दी के मुद्दों पर डीएनए से जोड़ते आए हैं, ऐसे में जवाब भी उन्हीं की शैली में दिया गया।

सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या सोशल मीडिया की इस लड़ाई में सियासी दल अपनी सीमाएं भूलते जा रहे हैं? जहां एक तरफ डीएनए जैसे शब्दों का इस्तेमाल राजनीतिक विचारधारा पर कटाक्ष करने के लिए होता था, अब वही शब्द अपमान और व्यक्तिगत हमलों का जरिया बनते जा रहे हैं।

इस पूरे मामले से एक बात तो साफ है कि 2027 के चुनावों की तैयारी में अब भाषाई मर्यादाएं टूटने लगी हैं। राजनीतिक दल अपने विरोधियों पर हमला करते हुए भाषा की मर्यादा को ताक पर रख रहे हैं।

सवाल यही है कि क्या चुनावी रणनीति में अब इस तरह की “बिलो द बेल्ट” टिप्पणियों को ही हथियार बनाया जाएगा? क्या इससे आम जनता का भरोसा राजनीति से उठेगा या फिर यह सिर्फ एक सोशल मीडिया की लड़ाई बनकर रह जाएगी?

फिलहाल डीएनए की इस सियासत ने प्रदेश में गर्मी बढ़ा दी है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक असर किस पार्टी पर पड़ता है — सपा को नुकसान होगा या सहानुभूति मिलेगी? और क्या बीजेपी इसे बड़ा मुद्दा बनाकर चुनावी रणनीति में भुना पाएगी?

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