यूपी के इस जिले से मुंबई तक चलने जा रही स्लीपर वंदे भारत, महाराष्ट्र और यूपी के इन जिलों को जोड़ेगी वंदे भारत स्लीपर

Sleeper Vande Bharat

यूपी के इस जिले से मुंबई तक चलने जा रही स्लीपर वंदे भारत, महाराष्ट्र और यूपी के इन जिलों को जोड़ेगी वंदे भारत स्लीपर
Sleeper Vande Bharat

रेलवे द्वारा बरेली-मुंबई स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस को चलवाने की तैयारी जोरों-सोरों से शुरू हो गई है। फिलहाल, एक महीने तक ट्रायल और स्पीड ट्रायल करवाया जाएगा। यह स्लीपर वंदे भारत बरेली से मुंबई के मध्य में चलवाई जाएगी, एक तरफ से यह स्लीपर वंदे भारत 1600 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। खबरों के मुताबिक, कुछ ही महीनों मे शहर को देश की पहली स्लीपर वंदे भारत मिलने वाली है। दूसरी तरफ, सहारनपुर-प्रयागराज वंदे भारत एक्सप्रेस को चलवाने की तैयारी जल्द ही प्रारंभ हो जाएगी।

आपको बता दे की मुरादाबाद में वाशिंग लाइन न होने की वज़ह से इस नई स्लीपर वंदे भारत को बरेली से चलवाने का फैसला लिया गया है, मुरादाबाद की भी यह प्रथम स्लीपर वंदे भारत है। अगर इस ट्रेन के रूट की बात करें तो, यह ट्रेन बरेली के रास्ते चंदौसी, अलीगढ़, आगरा, ग्वालियर, झांसी, बीना, भोपाल, इटारसी, खंडवा, जलगांव, मनमाड़ से होते हुए मुंबई पहुंचेगी। 

बीते रविवार 1 सितंबर को स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस का प्रथम वर्जन कोच फैकेल्टी से ट्रायल के लिए सामने आया है। अधिकारियों द्वारा बताया गया है कि "ट्रायल के पश्चात पहली स्लीपर वंदे भारत उत्तर रेलवे को मिल जाएगी।" मुख्य वाणिज्य निरीक्षण राकेश सिंह ने इस विषय पर कहा है कि "सहारनपुर-प्रयागराज वंदे भारत एक्सप्रेस के लिए रूटों को तय कर दिया गया है। इस ट्रेन का संचालन जल्द ही प्रारंभ हो जाएगा।"

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आपको बता दे की बरेली-मुंबई और सहारनपुर-प्रयागराज वंदे भारत एक्सप्रेस का रूट चार्ट तय हो चुका है, परंतु अभी इन ट्रेनों के लिए रेलवे वैकल्पिक रूटों पर कार्य होना बाकी है। खबरों के मुताबिक, दोनों ट्रेन बरेली-मुंबई स्लीपर वंदे भारत और सहारनपुर-प्रयागराज वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन जल्द ही प्रारंभ हो जाएगा, फिलहाल रेलवे बोर्ड की तरफ से नोटिफिकेशन का इंतजार किया जा रहा है।

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वागार्थ सांकृत्यायन
संपादक, भारतीय बस्ती

वागार्थ सांकृत्यायन एक प्रतिबद्ध और जमीनी सरोकारों से जुड़े पत्रकार हैं, जो पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। भारतीय बस्ती के संपादक के रूप में वे खबरों को सिर्फ़ घटनाओं की सूचना तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उनके सामाजिक और मानवीय पक्ष को भी उजागर करते हैं।

उन्होंने भारतीय बस्ती को एक मिशन के रूप में विकसित किया है—जिसका उद्देश्य है गांव, कस्बे और छोटे शहरों की अनसुनी आवाज़ों को मुख्यधारा की मीडिया तक पहुंचाना। उत्तर प्रदेश की राजनीति, समाज और संस्कृति पर उनकी विशेष पकड़ है, जो खबरों को गहराई और विश्वसनीयता प्रदान करती है