UP में होली के दौरान ट्रेनों में बढ़ी भीड़, यात्रियों को करना पड़ा परेशानी भरा सफर

त्योहार से पहले जंक्शन पर दिखी अव्यवस्था और अफरा-तफरी

UP में होली के दौरान ट्रेनों में बढ़ी भीड़, यात्रियों को करना पड़ा परेशानी भरा सफर
UP में होली के दौरान ट्रेनों में बढ़ी भीड़, यात्रियों को करना पड़ा परेशानी भरा सफर

उत्तर प्रदेश: आगामी होली के त्योहार को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन भले ही कई स्पेशल ट्रेनों के संचालन का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत पर‌ मामला कुछ और ही है. सोमवार, 2 मार्च को बरेली जंक्शन पर जो स्थिति दिखाई दी, उसने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी. भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कई यात्री ट्रेन के शौचालय के अंदर बैठकर सफर करने को मजबूर थे.

सोमवार को दोपहर 40 मिनट की देरी से पहुंची अवध असम एक्सप्रेस में हालात सबसे ज्यादा खराब दिखे. डिब्बों में कदम रखने तक की जगह नहीं थी. मौजूद यात्रियों से बातचीत के दौरान, एक यात्री ने बताया कि जिस ट्रेन से उन्हें पश्चिम बंगाल जाना था, वह रद्द हो गई. मजबूरी में उन्होंने अवध-असम एक्सप्रेस पकड़ने का फैसला किया, लेकिन ट्रेन में इतनी भीड़ थी कि चढ़ने तक में डर लग रहा था.

ट्रेन के भीतर यात्रियों का कहना था कि वे इस तरह की असुविधा में सफर नहीं करना चाहते, लेकिन त्योहार पर घर पहुंचना भी जरूरी है. “परिवार इंतजार कर रहा है, इसलिए जो भी स्थिति है, उसी में जाना पड़ेगा,” मौजूद यात्री अंकुर ने कहा. उनका मानना है कि अगर अतिरिक्त कोच लगाए जाते तो यह परेशानी काफी हद तक कम हो सकती थी. 

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यात्रियों की मुश्किलें सिर्फ भीड़ तक सीमित नहीं रहीं. कई ट्रेनों के निरस्त होने से भी हालात और बिगड़ गए. जिन यात्रियों की पहले से आरक्षण वाली ट्रेनें कैंसिल हुईं, वे अचानक दूसरी ट्रेनों की ओर दौड़े, जिससे सामान्य डिब्बों पर दबाव पड़ गया. आरक्षित कोचों में भी बिना टिकट यात्रियों के चढ़ने की शिकायतें सामने आईं.

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धक्का-मुक्की करते नजर आए यात्री

सोमवार को स्टेशन पर लगभग हर ट्रेन में भीड़ उमड़ी हुई थी. हिमगिरी एक्सप्रेस और सियालदह एक्सप्रेस में भी चढ़ने और उतरने के दौरान यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की देखने को मिली. भारी भीड़ के कारण कई यात्रियों को चोट लगने व काफी असुविधा का सामना करना पड़ा. सीट पाने की होड़ में लोग एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करते नजर आए.

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सुरक्षा और सुविधा दोनों पर सवाल

स्टेशन पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षाकर्मी नजर नहीं आए. प्लेटफॉर्म पर परिवार के साथ सफर कर रहे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान दिखे. मौजूद यात्री संतोष सिंह ने बताया कि न तो साफ पानी की व्यवस्था थी और न ही भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए कोई स्पष्ट घोषणा की गई.

त्योहार पर बढ़ता दबाव, व्यवस्था पर सवाल

त्योहारों के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ना कोई नई बात नहीं है. हर साल होली और दीपावली पर लाखों लोग अपने घर जाते हैं. ऐसे में केवल स्पेशल ट्रेनों की घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि भीड़ के हिसाब से कोचों की संख्या बढ़ाना और प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है.

यात्रियों का कहना है कि जब पहले से अनुमान होता है कि होली पर भीड़ बढ़ेगी, तो रेलवे को पहले से ठोस योजना बनानी चाहिए. वरना हर साल यही स्थिति बनी रहती है, भीड़, अफरातफरी और असुविधा से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. 

यह ध्यान देने योग्य है कि रेलवे ने 90 से अधिक विशेष ट्रेनें चलाईं, इसके बावजूद लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. निजी बसों ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए बस सेवा शुरू कर दी है.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।