वाराणसी की हवा बदलेगी: डोमरी में बन रहा 4.5 लाख पौधों का मिनी जंगल

वाराणसी की हवा बदलेगी: डोमरी में बन रहा 4.5 लाख पौधों का मिनी जंगल
वाराणसी की हवा बदलेगी: डोमरी में बन रहा 4.5 लाख पौधों का मिनी जंगल

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित वाराणसी की बिगड़ती आबोहवा को बेहतर बनाने और लोगों को प्रकृति के करीब लाने के लिए नगर निगम ने एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है. इसके अंतर्गत डोमरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिनी जंगल विकसित किया जाएगा. यह परियोजना न केवल शहर की हवा को स्वच्छ बनाने में मदद करेगी, बल्कि नागरिकों को भीड़भाड़ भरी जिंदगी के बीच सुकून भरा प्राकृतिक माहौल भी देगी.

अधिकारियों के मुताबिक, यह पहल शहरी पर्यावरण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. योजना का लक्ष्य कम समय में ज्यादा हरियाली तैयार करना है, जिससे शहर के तापमान और प्रदूषण दोनों पर सकारात्मक असर पड़े.

मियावाकी तकनीक से तैयार होगा घना वन

नगर निगम डोमरी में लगभग 39 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 4.5 लाख पौधे लगाने जा रहा है. इसमें से लगभग 3 लाख पौधे मियावाकी तकनीक से रोपे जाएंगे. इस पद्धति की खासियत यह है कि पौधे तेजी से बढ़ते हैं और कम समय में घना जंगल तैयार हो जाता है.

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इसके अलावा 50 हजार इमारती लकड़ी के पौधे और करीब 1 लाख फलदार पौधे भी लगाए जाएंगे. इससे भविष्य में हरित संसाधनों की उपलब्धता बढ़ेगी और जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी.

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लोगों के लिए बनेगा प्राकृतिक सुकून का केंद्र

परियोजना को केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रखा गया है. नगर निगम यहां नागरिकों के उपयोग के लिए जॉगिंग ट्रैक भी विकसित करेगा, जिससे सुबह-शाम टहलने और व्यायाम करने वालों को स्वच्छ और हराभरा वातावरण मिल सके.

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आगे चलकर इस पूरे क्षेत्र को एक आकर्षक इको-स्पॉट के रूप में विकसित करने की भी योजना है. इसके लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से तैयार की जाएंगी, जिससे यह स्थान शहरवासियों के लिए पसंदीदा स्थल बन सके.

शहर को मिलेगा बड़ा पर्यावरणीय लाभ

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि परियोजना पूरी होने के बाद डोमरी का यह मिनी जंगल वाराणसी के लिए ‘ग्रीन लंग्स’ की तरह काम करेगा. इससे वायु गुणवत्ता में सुधार, तापमान में संतुलन और लोगों को बेहतर पर्यावरण मिलने की उम्मीद है.

यह ध्यान देने योग्य है कि 39 हेक्टेयर में प्रस्तावित यह हरित क्षेत्र आने वाले वर्षों में शहर की पारिस्थितिकी को मजबूत कर सकता है. अगर योजना समय पर पूरी होती है, तो शहरी जीवन की भागदौड़ के बीच लोगों को प्रकृति से जुड़ने का बेहतर अवसर भी मिलेगा.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।