उत्तर प्रदेश में 1700+ कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव, जानिए पूरी डिटेल

उत्तर प्रदेश में 1700+ कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव, जानिए पूरी डिटेल
उत्तर प्रदेश में 1700+ कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव, जानिए पूरी डिटेल

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग से लेकर ग्रामीण रोजगार योजनाओं तक, कर्मचारियों और आम लोगों को राहत देने वाले कई प्रस्तावों पर सरकार सक्रिय नजर आ रही है. लंबे समय से लंबित मांगों और सुधारों को लेकर विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. इससे न केवल कर्मचारियों को आर्थिक सहारा मिलेगा, बल्कि सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और प्रभाव भी बढ़ेगा.

प्रदेश के सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत लिपिक विद्यालयों की प्रशासनिक रीढ़ माने जाते हैं. नामांकन, परीक्षा संबंधी कार्य, छात्रवृत्ति, वेतन बिल और सरकारी पत्राचार जैसी जिम्मेदारियां इन्हीं पर होती हैं. इसके बावजूद उनका वेतन ढांचा वर्षों से लगभग जस का तस बना हुआ था. इसी वजह से कर्मचारी संगठन लगातार ग्रेड वेतन बढ़ाने की मांग उठा रहे थे.

सरकार से मांगा गया पूरा ब्यौरा

शिक्षा निदेशालय ने लिपिकों की मांग को आगे बढ़ाते हुए सरकार को प्रस्ताव भेजा है. इसके बाद शासन स्तर पर इस प्रस्ताव के वित्तीय प्रभाव का आकलन शुरू कर दिया गया है. संयुक्त सचिव स्तर से कर्मचारियों की संख्या, जिलावार स्थिति और खर्च का पूरा विवरण मांगा गया है.

जिलों में स्कूलों की संख्या में बड़ा अंतर

प्रदेश में कुल 3049 अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल संचालित हैं. इनमें सबसे अधिक 118 विद्यालय आजमगढ़ जिले में हैं. इसके बाद जौनपुर में 109 और प्रयागराज में 106 विद्यालय दर्ज हैं. वहीं, कुछ जिलों में इन स्कूलों की संख्या बेहद कम है. ललितपुर में केवल 2, सोनभद्र में 4, श्रावस्ती में 8 और भदोही में 9 विद्यालय संचालित हैं. इससे यह भी स्पष्ट होता है कि इस प्रस्ताव का असर अलग-अलग जिलों में अलग स्तर पर पड़ेगा.

ग्रामीण रोजगार योजनाओं में बदलाव की तैयारी

इसी बीच प्रदेश सरकार की ओर से ग्रामीण रोजगार योजनाओं को लेकर भी बड़े सुधारों के संकेत दिए गए हैं. सरकार का कहना है कि अब रोजगार योजनाओं में तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल कर पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी. इससे फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी.

पंचायतों को मिलेगी ज्यादा जिम्मेदारी

नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों को अपनी जरूरत के अनुसार कार्ययोजना बनाने की छूट दी जाएगी. केंद्र और राज्य मिलकर योजना का खर्च वहन करेंगे. इसमें 60% हिस्सेदारी केंद्र सरकार की होगी, जबकि 40% खर्च राज्य सरकार उठाएगी. रोजगार उपलब्ध कराने में दोनों सरकारें मिलकर जवाबदेह रहेंगी.

शिक्षा निदेशालय की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में प्रदेश के 3049 अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत 1700 से ज्यादा लिपिकों का ग्रेड वेतन 1900 से बढ़ाकर 2000 करने की सिफारिश की गई है. यह प्रस्ताव अपर शिक्षा निदेशक कामताराम पाल द्वारा 28 नवंबर 2025 को सरकार को भेजा गया था. इसके बाद 29 दिसंबर को संयुक्त सचिव वेद प्रकाश राय ने कर्मचारियों की संख्या और संभावित वित्तीय बोझ की जानकारी मांगी है.

यदि सरकार से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो हर लिपिक को प्रतिमाह औसतन करीब 3 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा. यह फैसला वर्षों से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

भारतीय बस्ती
bhartiyabasti.com
10 Jan 2026 By Shobhit Pandey

उत्तर प्रदेश में 1700+ कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव, जानिए पूरी डिटेल

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग से लेकर ग्रामीण रोजगार योजनाओं तक, कर्मचारियों और आम लोगों को राहत देने वाले कई प्रस्तावों पर सरकार सक्रिय नजर आ रही है. लंबे समय से लंबित मांगों और सुधारों को लेकर विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. इससे न केवल कर्मचारियों को आर्थिक सहारा मिलेगा, बल्कि सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और प्रभाव भी बढ़ेगा.

प्रदेश के सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत लिपिक विद्यालयों की प्रशासनिक रीढ़ माने जाते हैं. नामांकन, परीक्षा संबंधी कार्य, छात्रवृत्ति, वेतन बिल और सरकारी पत्राचार जैसी जिम्मेदारियां इन्हीं पर होती हैं. इसके बावजूद उनका वेतन ढांचा वर्षों से लगभग जस का तस बना हुआ था. इसी वजह से कर्मचारी संगठन लगातार ग्रेड वेतन बढ़ाने की मांग उठा रहे थे.

सरकार से मांगा गया पूरा ब्यौरा

शिक्षा निदेशालय ने लिपिकों की मांग को आगे बढ़ाते हुए सरकार को प्रस्ताव भेजा है. इसके बाद शासन स्तर पर इस प्रस्ताव के वित्तीय प्रभाव का आकलन शुरू कर दिया गया है. संयुक्त सचिव स्तर से कर्मचारियों की संख्या, जिलावार स्थिति और खर्च का पूरा विवरण मांगा गया है.

जिलों में स्कूलों की संख्या में बड़ा अंतर

प्रदेश में कुल 3049 अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल संचालित हैं. इनमें सबसे अधिक 118 विद्यालय आजमगढ़ जिले में हैं. इसके बाद जौनपुर में 109 और प्रयागराज में 106 विद्यालय दर्ज हैं. वहीं, कुछ जिलों में इन स्कूलों की संख्या बेहद कम है. ललितपुर में केवल 2, सोनभद्र में 4, श्रावस्ती में 8 और भदोही में 9 विद्यालय संचालित हैं. इससे यह भी स्पष्ट होता है कि इस प्रस्ताव का असर अलग-अलग जिलों में अलग स्तर पर पड़ेगा.

ग्रामीण रोजगार योजनाओं में बदलाव की तैयारी

इसी बीच प्रदेश सरकार की ओर से ग्रामीण रोजगार योजनाओं को लेकर भी बड़े सुधारों के संकेत दिए गए हैं. सरकार का कहना है कि अब रोजगार योजनाओं में तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल कर पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी. इससे फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी.

पंचायतों को मिलेगी ज्यादा जिम्मेदारी

नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों को अपनी जरूरत के अनुसार कार्ययोजना बनाने की छूट दी जाएगी. केंद्र और राज्य मिलकर योजना का खर्च वहन करेंगे. इसमें 60% हिस्सेदारी केंद्र सरकार की होगी, जबकि 40% खर्च राज्य सरकार उठाएगी. रोजगार उपलब्ध कराने में दोनों सरकारें मिलकर जवाबदेह रहेंगी.

शिक्षा निदेशालय की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में प्रदेश के 3049 अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत 1700 से ज्यादा लिपिकों का ग्रेड वेतन 1900 से बढ़ाकर 2000 करने की सिफारिश की गई है. यह प्रस्ताव अपर शिक्षा निदेशक कामताराम पाल द्वारा 28 नवंबर 2025 को सरकार को भेजा गया था. इसके बाद 29 दिसंबर को संयुक्त सचिव वेद प्रकाश राय ने कर्मचारियों की संख्या और संभावित वित्तीय बोझ की जानकारी मांगी है.

यदि सरकार से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो हर लिपिक को प्रतिमाह औसतन करीब 3 हजार रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा. यह फैसला वर्षों से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/know-the-complete-details-of-the-proposal-to-increase-the/article-24168
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।