यूपी के इस गाँव में चकबंदी को लेकर प्रक्रिया जारी, सभी को मिलेगी भूमि

यूपी के इस गाँव में चकबंदी को लेकर प्रक्रिया जारी, सभी को मिलेगी भूमि
यूपी के इस गाँव में चकबंदी को लेकर प्रक्रिया जारी, सभी को मिलेगी भूमि

उत्तर प्रदेश: यूपी में स्थित बदायूं ज़िले की गुन्नौर तहसील का एक साधारण-सा गांव उदरनपुर अजमतनगर अब प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है. यह गांव पिछले 22 सालों से उस प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे ग्रामीण भाषा में चकबंदी कहा जाता है यानी जमीनों का पुनःविन्यास और समुचित बंटवारा. लेकिन इस प्रक्रिया की धीमी गति और व्यवस्थागत लापरवाहियों ने इसे ग्रामीणों के लिए एक अभिशाप बना दिया था. लंबे समय से यहां के किसान भूमि के स्वामित्व, खेतों तक पहुंच, और बदलते हुए सीमांकन को लेकर असमंजस की स्थिति में जी रहे थे. चकबंदी की अधूरी फाइलें, अधूरे नक्शे और विवादों की भरमार ने गांव के विकास को लगभग रोक दिया था.

अब जब उपजिलाधिकारी दीपक चौधरी ने इस मुद्दे को प्राथमिकता पर लेते हुए निर्णायक कदम उठाए हैं. प्रशासन ने गांव में एक पांच सदस्यीय चकबंदी सुधार टीम का गठन किया है, जिसे अगले 14 दिनों तक प्रतिदिन गांव में जाकर खेतों की पैमाइश, सीमांकन और कब्जा सत्यापन जैसे कामों को अंजाम देना है. टीम को यह भी जिम्मेदारी दी गई है कि जिन किसानों को वर्षों से खेतों में रास्ता नहीं मिल रहा था, या जिनकी भूमि दूसरे स्थान पर स्थानांतरित की गई थी, उनकी शिकायतों का जल्द से जल्द समाधान किया जाए. अब तक की कार्रवाई में तीन दिनों के भीतर ही लगभग 13 किसानों की गंभीर समस्याएं सुलझाई जा चुकी हैं, जिनमें अवैध कब्जा हटाना, नई भूमि का चिन्हांकन और उचित दस्तावेजीकरण शामिल हैं. 

एसडीएम चौधरी ने सख्ती से यह कहा है कि “गांव में अब एक भी ऐसा किसान नहीं रहना चाहिए जिसे भूमि परिवर्तन या रास्ते की परेशानी हो. अगर किसी के खेत पर अवैध कब्जा है, तो उसे तत्काल प्रभाव से हटाया जाए, और जिसे वैकल्पिक जमीन दी जानी है, उसे जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खेत अभी खाली पड़े हैं और बुवाई शुरू होने से पहले यह समस्त कार्यवाही पूरी की जा सकती है, साथ ही किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. प्रशासन ने हल्का लेखपाल को गांव में ही तैनात करने के आदेश दिए हैं और निर्देशित किया गया है कि उसे किसी अन्य कार्य में न लगाया जाए. इसके अतिरिक्त, यदि ज़रूरत पड़ी तो पुलिस बल भी मुहैया कराया जाएगा ताकि कार्यवाही शांतिपूर्वक हो और कोई विरोध या विवाद न खड़ा हो. अधिकारियों को यह भी निर्देश मिला है कि 2 हफ्ते की अवधि पूर्ण होने पर एक लिखित प्रमाणपत्र दिया जाए, जिसमें स्पष्ट रूप से यह दर्शाया जाए कि गांव में अब कोई कब्जा विवाद शेष नहीं है और चकबंदी की विधि पूर्ण रूप से निष्पादित हो चुकी है. यह ध्यान देने योग्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में चकबंदी की प्रक्रिया विकास का आधार स्तंभ होती है. यदि यह सही तरीके से पुरी हो जाए तो किसानों को न केवल स्पष्ट सीमाओं वाली भूमि मिलती है, बल्कि विवादों की संभावना भी खत्म हो जाती है.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।