यूपी में जमीन खरीदते समय ये गलती न करें: रजिस्ट्री के बाद भी छिन सकता है हक
यूपी में जमीन को खरीदने दौरान लोग सबसे पहले रजिस्ट्री कराते हैं फिर उसके बाद एक बेहद जरूरी काम करवाया जाता है जिसमें बहुत कम लोग यह कार्य करवाते हैं और इसकी जानकारी होती है ऐसे में जमीन का हक आपसे छीन भी जा सकता है लेकिन रजिस्ट्री करने के बाद दाखिल खारिज आवश्यक रूप से करवाये.,
जमीन रजिस्ट्री में आया नया नियम, जाने अवश्य
उत्तर प्रदेश में अब अपना घर खरीदना हर किसी का सपना माना जाता है लेकिन घर निर्माण के लिए लोग प्लाट और जमीन भी खरीदते हैं जिसमें जमीन खरीदते के समय रजिस्ट्री तो करवा ही लेते हैं लेकिन इसमें एक बेहद जरूरी कार्य करवाना अक्सर लोग दिमाग से भूल जाते हैं इसमें जमीन का हक आप हो भी सकते हैं लेकिन रजिस्ट्री के बाद ऐसे डॉक्यूमेंट होते हैं जिनका होना बेहद रूप से आवश्यक है इन डॉक्यूमेंट के बिना आप जमीन के मालिक किसी भी कीमत पर नहीं बन पाएंगे.
जिसमें प्रॉपर्टी पर मलिकाना हक को पाने के लिए अब यह काम करना बेहद आवश्यक हो चुका है. अब इस दौरान भारतीय रजिस्ट्रेशन एक्ट में यह प्रावधान है कि ₹100 मूल्य से भी अधिक कि किसी भी तरह की संपत्ति का अगर किसी भी तरह से ट्रांसफर किया जा रहा है तो यह लिखित में होगा इसका रजिस्ट्रेशन सब रजिस्ट्रार कार्यालय में होता है यह नियम पूरे प्रदेश में लागू किया गया है और इसी प्रक्रिया को रजिस्ट्री कहा जाता है लेकिन केवल रजिस्ट्री से ही आप जमीन, दुकान और मकान के मालिक नहीं हो जाते हैं इसके लिए आपको दाखिल खारिज यानी म्यूटेशन आफ प्रॉपर्टी होना अति आवश्यक है.
हरियाणा में इस नाम से प्रसिद्ध है दाखिल खारिज
अब इस कड़ी में अगर आपने रजिस्ट्री करवाई है तो दाखिल खारिज नहीं कराया है तो इसे आप जल्द से जल्द जमीन का मालिक आना हैक हो भी सकते हैं कोर्ट में भी मालिकाना हक साबित करने के लिए दाखिल खारिज का होना अति आवश्यक है अब यह कार्य रजिस्ट्री के दो से तीन महीना के भीतर हो जाना चाहिए सारा फर्जीवाड़ा इसी दौरान होता है अगर दाखिल खारिज नहीं कराया गया है तो खतौनी में पुराने मालिक का नाम चढ़ जाता है ऐसे में यह खतौनी दिखाकर दूसरे को भी बेच दिया जा सकता है.
दाखिल खारिज में दाखिल का मतलब यह है कि रजिस्ट्री के आधार पर उसे संपत्ति के स्वामित्व के सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम शामिल किया जाता है जिसमें खारीज का मतलब होता है कि पुराने मालिक का नाम स्वामित्व के रिकॉर्ड से अनिवार्य रूप से हटा दिया गया है अब रजिस्ट्री के बाद दाखिल खारिज का समय अब हर राज्य में अलग-अलग है जिसमें आमतौर पर रजिस्ट्री के 45 दिन के अंदर दाखिल खारिज करा लेना चाहिए लेकिन कुछ राज्यों में दाखिल खारिज का नाम अलग-अलग है इस दौरान हरियाणा में इसे इंतकाल के नाम से जाना जाता है.
यूपी में जमीन खरीदते समय ये गलती न करें: रजिस्ट्री के बाद भी छिन सकता है हक
यूपी में जमीन को खरीदने दौरान लोग सबसे पहले रजिस्ट्री कराते हैं फिर उसके बाद एक बेहद जरूरी काम करवाया जाता है जिसमें बहुत कम लोग यह कार्य करवाते हैं और इसकी जानकारी होती है ऐसे में जमीन का हक आपसे छीन भी जा सकता है लेकिन रजिस्ट्री करने के बाद दाखिल खारिज आवश्यक रूप से करवाये.,
जमीन रजिस्ट्री में आया नया नियम, जाने अवश्य
उत्तर प्रदेश में अब अपना घर खरीदना हर किसी का सपना माना जाता है लेकिन घर निर्माण के लिए लोग प्लाट और जमीन भी खरीदते हैं जिसमें जमीन खरीदते के समय रजिस्ट्री तो करवा ही लेते हैं लेकिन इसमें एक बेहद जरूरी कार्य करवाना अक्सर लोग दिमाग से भूल जाते हैं इसमें जमीन का हक आप हो भी सकते हैं लेकिन रजिस्ट्री के बाद ऐसे डॉक्यूमेंट होते हैं जिनका होना बेहद रूप से आवश्यक है इन डॉक्यूमेंट के बिना आप जमीन के मालिक किसी भी कीमत पर नहीं बन पाएंगे.
जिसमें प्रॉपर्टी पर मलिकाना हक को पाने के लिए अब यह काम करना बेहद आवश्यक हो चुका है. अब इस दौरान भारतीय रजिस्ट्रेशन एक्ट में यह प्रावधान है कि ₹100 मूल्य से भी अधिक कि किसी भी तरह की संपत्ति का अगर किसी भी तरह से ट्रांसफर किया जा रहा है तो यह लिखित में होगा इसका रजिस्ट्रेशन सब रजिस्ट्रार कार्यालय में होता है यह नियम पूरे प्रदेश में लागू किया गया है और इसी प्रक्रिया को रजिस्ट्री कहा जाता है लेकिन केवल रजिस्ट्री से ही आप जमीन, दुकान और मकान के मालिक नहीं हो जाते हैं इसके लिए आपको दाखिल खारिज यानी म्यूटेशन आफ प्रॉपर्टी होना अति आवश्यक है.
हरियाणा में इस नाम से प्रसिद्ध है दाखिल खारिज
अब इस कड़ी में अगर आपने रजिस्ट्री करवाई है तो दाखिल खारिज नहीं कराया है तो इसे आप जल्द से जल्द जमीन का मालिक आना हैक हो भी सकते हैं कोर्ट में भी मालिकाना हक साबित करने के लिए दाखिल खारिज का होना अति आवश्यक है अब यह कार्य रजिस्ट्री के दो से तीन महीना के भीतर हो जाना चाहिए सारा फर्जीवाड़ा इसी दौरान होता है अगर दाखिल खारिज नहीं कराया गया है तो खतौनी में पुराने मालिक का नाम चढ़ जाता है ऐसे में यह खतौनी दिखाकर दूसरे को भी बेच दिया जा सकता है.
दाखिल खारिज में दाखिल का मतलब यह है कि रजिस्ट्री के आधार पर उसे संपत्ति के स्वामित्व के सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम शामिल किया जाता है जिसमें खारीज का मतलब होता है कि पुराने मालिक का नाम स्वामित्व के रिकॉर्ड से अनिवार्य रूप से हटा दिया गया है अब रजिस्ट्री के बाद दाखिल खारिज का समय अब हर राज्य में अलग-अलग है जिसमें आमतौर पर रजिस्ट्री के 45 दिन के अंदर दाखिल खारिज करा लेना चाहिए लेकिन कुछ राज्यों में दाखिल खारिज का नाम अलग-अलग है इस दौरान हरियाणा में इसे इंतकाल के नाम से जाना जाता है.
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About The Author
शम्भूनाथ गुप्ता पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। 'मीडिया दस्तक' और 'बस्ती चेतना' जैसे प्लेटफॉर्म पर न्यूज़ और वीडियो एडिटिंग टीम में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। न्यूज़ प्रोडक्शन और डिजिटल कंटेंट निर्माण में गहरा अनुभव रखते हैं। वर्तमान में वे 'भारतीय बस्ती' की उत्तर प्रदेश टीम में कार्यरत हैं, जहां वे राज्य से जुड़ी खबरों की गंभीर और सटीक कवरेज में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।