कलवारी-टांडा मार्ग पर नए पुल की मांग तेज, सदन में उठी आवाज
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित बस्ती जिले को अंबेडकर नगर से जोड़ने वाले कलवारी-टांडा मार्ग पर नया और चौड़ा पुल बनाने की मांग अब जोर पकड़ती दिख रही है. गुरुवार को विधान परिषद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया. भाजपा के प्रदेश महामंत्री और विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश ने इसे जनहित से जुड़ा अहम विषय बताते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि इस मार्ग की स्थिति लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है.
संपर्क और व्यापार के लिए अहम रास्ता
सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पुल केवल दो जिलों को जोड़ने वाला साधारण मार्ग नहीं है. यह रास्ता पूर्वांचल के सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अंबेडकर नगर और बस्ती जैसे कई जिलों को नेपाल सीमा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. व्यापार, खेती-किसानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के आवागमन के लिहाज से भी इसकी उपयोगिता काफी बड़ी है. ऐसे में मजबूत और चौड़े पुल की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है.
पुराना और संकरा पुल बना मुसीबत
उन्होंने बताया कि वर्तमान में यहां एक पुराना और बेहद संकरा पुल मौजूद है, जो बढ़ते यातायात का दबाव झेलने में सक्षम नहीं है. भारी वाहनों, बसों और एम्बुलेंस के गुजरने के दौरान अक्सर लंबा जाम लग जाता है. इससे यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है. आपातकालीन सेवाएं भी कई बार प्रभावित होती हैं, जिससे लोगों की चिंता बढ़ जाती है.
केवल असुविधा नहीं, बड़ा आर्थिक मुद्दा
सुभाष यदुवंश ने कहा कि यह समस्या अब सिर्फ आवागमन की दिक्कत तक सीमित नहीं रही. लगातार जाम से समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है, जिससे आर्थिक नुकसान भी बढ़ रहा है. क्षेत्र के संतुलित विकास और नेपाल से व्यापारिक संपर्क मजबूत करने के लिए यहां आधुनिक पुल का निर्माण बेहद जरूरी हो गया है.
सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग
उन्होंने सदन के माध्यम से सरकार से आग्रह किया कि कलवारी-टांडा मार्ग पर नए, मजबूत और चौड़े पुल के निर्माण को जल्द मंजूरी दी जाए और इसके लिए आवश्यक बजट उपलब्ध कराया जाए. उनका कहना था कि इससे न केवल जाम और दुर्घटनाओं से राहत मिलेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी.
अधिकारियों और सरकार का रुख
जनप्रतिनिधियों के मुताबिक, प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विस्तार पर तेजी से काम किया जा रहा है. उनका विश्वास है कि यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है तो पूर्वांचल के इस महत्वपूर्ण मार्ग की तस्वीर बदल सकती है और हजारों लोगों की रोजमर्रा की परेशानी कम हो जाएगी.
यदि परियोजना को हरी झंडी मिलती है, तो यह पुल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों के लिए बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
कलवारी-टांडा मार्ग पर नए पुल की मांग तेज, सदन में उठी आवाज
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में स्थित बस्ती जिले को अंबेडकर नगर से जोड़ने वाले कलवारी-टांडा मार्ग पर नया और चौड़ा पुल बनाने की मांग अब जोर पकड़ती दिख रही है. गुरुवार को विधान परिषद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया. भाजपा के प्रदेश महामंत्री और विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश ने इसे जनहित से जुड़ा अहम विषय बताते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि इस मार्ग की स्थिति लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है.
संपर्क और व्यापार के लिए अहम रास्ता
सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पुल केवल दो जिलों को जोड़ने वाला साधारण मार्ग नहीं है. यह रास्ता पूर्वांचल के सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अंबेडकर नगर और बस्ती जैसे कई जिलों को नेपाल सीमा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. व्यापार, खेती-किसानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के आवागमन के लिहाज से भी इसकी उपयोगिता काफी बड़ी है. ऐसे में मजबूत और चौड़े पुल की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है.
पुराना और संकरा पुल बना मुसीबत
उन्होंने बताया कि वर्तमान में यहां एक पुराना और बेहद संकरा पुल मौजूद है, जो बढ़ते यातायात का दबाव झेलने में सक्षम नहीं है. भारी वाहनों, बसों और एम्बुलेंस के गुजरने के दौरान अक्सर लंबा जाम लग जाता है. इससे यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है. आपातकालीन सेवाएं भी कई बार प्रभावित होती हैं, जिससे लोगों की चिंता बढ़ जाती है.
केवल असुविधा नहीं, बड़ा आर्थिक मुद्दा
सुभाष यदुवंश ने कहा कि यह समस्या अब सिर्फ आवागमन की दिक्कत तक सीमित नहीं रही. लगातार जाम से समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है, जिससे आर्थिक नुकसान भी बढ़ रहा है. क्षेत्र के संतुलित विकास और नेपाल से व्यापारिक संपर्क मजबूत करने के लिए यहां आधुनिक पुल का निर्माण बेहद जरूरी हो गया है.
सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग
उन्होंने सदन के माध्यम से सरकार से आग्रह किया कि कलवारी-टांडा मार्ग पर नए, मजबूत और चौड़े पुल के निर्माण को जल्द मंजूरी दी जाए और इसके लिए आवश्यक बजट उपलब्ध कराया जाए. उनका कहना था कि इससे न केवल जाम और दुर्घटनाओं से राहत मिलेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी.
अधिकारियों और सरकार का रुख
जनप्रतिनिधियों के मुताबिक, प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विस्तार पर तेजी से काम किया जा रहा है. उनका विश्वास है कि यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है तो पूर्वांचल के इस महत्वपूर्ण मार्ग की तस्वीर बदल सकती है और हजारों लोगों की रोजमर्रा की परेशानी कम हो जाएगी.
यदि परियोजना को हरी झंडी मिलती है, तो यह पुल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों के लिए बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।