यूपी में इस नदी पर पुल का निर्माण पूरा, लोगों के आवागमन के लिए जल्द शुरू होगा पुल
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देश का विकास, एक समृद्ध भविष्य की ओर
आर्थिक विकास देश के समृद्धि का एक मुख्य आधार है, जब देश में उद्योग, कृषि, और सेवाओं का सही संतुलन हो, तो यह विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और उत्पादन क्षमता में वृद्धि इसके मुख्य घटक हैं. इसके अलावा, विदेशी निवेश और व्यापारिक समझौतों से भी आर्थिक विकास को गति मिलती है. घोरावल तहसील क्षेत्र के शिल्पी-कुराड़ी गांव में सोन नदी पर पक्का पुल का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया है. इसका औपचारिक लोकार्पण नवरात्र में ही मुख्यमंत्री की तरफ से किए जाने की उम्मीद है. करीब 10 साल के लंबे इंतजार के बाद पुल की सौगात मिलने से क्षेत्र में खुशी का माहौल है.
जल्द होगा लोकार्पण
क्षेत्र के प्रसून कुमार, सफेदलाल बैसवार, अशोक मिश्रा, घोरावल व्यापार मंडल अध्यक्ष दयाशंकर गुप्ता ने बताया कि सोन नदी पर इस पुल के बन जाने से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सैकड़ों गांवों को फायदा होगा. घोरावल नगर का व्यापारिक महत्व बढ़ेगा. घोरावल से दक्षिणांचल और मध्यप्रदेश आवागमन की दूरी 50 किमी कम होने से लोगों को राहत मिलेगी. सोन नदी के पार कुराड़ी गांव स्थित कुंडवासिनी माता मंदिर में नवरात्र में नौ दिनों का विशाल मेला लगता है. वहां जाने में अब आसानी होगी. पुल निर्माण कार्य पूरा होने की खबर से घोरावल, चोपन, ओबरा क्षेत्र और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में खुशी की लहर है. अंतरराज्यीय महत्व के इस पुल पर आवागमन शुरू होने से यूपी और एमपी के सैकड़ों गांवों की लाखों आबादी की यात्रा सुगम हो जाएगी. घोरावल तहसील के कोलियाघाटी में कुराड़ी गांव में सोन नदी पर 76 करोड़ रुपये की लागत से इस पुल का निर्माण कार्य करीब पूरा हो गया है.
तत्कालीन विधायक रमेश चंद्र दुबे ने पुल का शिलान्यास वर्ष 2015 में किया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की तरफ से पुल निर्माण कार्य शुरू कराया गया था. सत्ता परिवर्तन के बाद बजट के अभाव में काफी दिनों तक पुल का काम रुका रहा. क्षेत्रीय विधायक अनिल कुमार मौर्या और पूर्व राज्यसभा सांसद रामसकल के प्रयास से वर्ष 2019 में पुल निर्माण के लिए बजट जारी किया और काम को गति मिली. आखिरी किस्त 2.76 करोड़ रुपये के बजट में जीएसटी डिफरेंस अप्रूवल न होने से कुछ दिन काम रूका रहा. अप्रूवल प्राप्त होने के बाद आखिरी चरण का काम लगभग संपन्न हो चुका है. नई तकनीकों का अनुसंधान विकास और उनका समुचित उपयोग न केवल रोजगार पैदा करता है. बल्कि यह देश को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने में मदद करता है। उदाहरण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी. अंतरिक्ष अन्वेषण. और जैव प्रौद्योगिकी ने देशों की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.