मुख्यमंत्री योगी ने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए किया बड़ा ऐलान, अपने जिले में कर सकेंगे काम

मुख्यमंत्री योगी ने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए किया बड़ा ऐलान, अपने जिले में कर सकेंगे काम
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सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है. अब तक जिस व्यवस्था में इन कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया जाता था. उसमें अब बदलाव किया गया है. सरकार ने निर्णय लिया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों का भी ट्रांसफर संभव होगा. जिससे न केवल उनकी कार्यस्थल स्थिरता बढ़ेगी. बल्कि पारिवारिक व व्यक्तिगत जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

अब आउटसोर्स कर्मचारियों का भी हो सकेगा ट्रांसफर

सरकार द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी की पारिवारिक स्थिति, स्वास्थ्य कारण, या विशेष परिस्थितियाँ ट्रांसफर की मांग करती हैं. तो विभाग उस अनुरोध पर विचार कर सकेंगे. यह व्यवस्था खासतौर से उन आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए लाभदायक होगी जो वर्षों से एक ही स्थान पर कार्य कर रहे थे लेकिन निजी कारणों से स्थानांतरण चाहते थे. वर्तमान व्यवस्था में परिवहन विभाग में परिचालकों को जहां नियुक्त किया जाता है, वहीं पर सेवा देनी होती है. लेकिन अब ऐसे परिचालक, जिन्होंने कम से कम छह माह की सेवा और 30,000 किलोमीटर की दूरी पूरी कर ली है, वे आपसी सहमति से स्थानांतरण करा सकेंगे.

इस फैसले से दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात परिचालकों को अपने गृह जनपद या उसके पास सेवा देने का मौका मिलेगा. परिवहन मंत्री ने बताया कि परिचालकों की नियमित उपलब्धता से कार्यदिवस बढ़ेंगे, बसों की संख्या में इज़ाफा होगा और इसके परिणामस्वरूप परिवहन निगम की आय में भी वृद्धि होगी. यात्रियों को समय पर और नियमित बसें मिलेंगी, जिससे उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में आसानी होगी. योगी सरकार का यह फैसला न केवल परिचालकों के हित में है, बल्कि इससे आम जनता को भी सीधा लाभ मिलेगा. सरकार का उद्देश्य हर क्षेत्र में पारदर्शिता, सुविधा और विकास को बढ़ावा देना है और यह कदम उसी दिशा में एक और मजबूत प्रयास है. मानना है कि यह कदम आउटसोर्स कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाएगा और उनकी कार्यकुशलता में भी सुधार करेगा. साथ ही इससे कर्मचारियों के बीच एक सकारात्मक संदेश जाएगा कि सरकार उनकी परिस्थितियों को समझ रही है.

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क्या है नई व्यवस्था, विशेषज्ञों की राय

परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने घोषणा ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में परिचालकों को जहां नियुक्त किया जाता है, वहीं पर सेवा देनी होती है. लेकिन अब ऐसे परिचालक, जिन्होंने कम से कम छह माह की सेवा और 30,000 किलोमीटर की दूरी पूरी कर ली है, वे आपसी सहमति से ट्रांसफर करा सकेंगे. इस फैसले से दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात परिचालकों को अपने गृह जनपद या उसके समीपस्थ स्थानों पर सेवा देने का अवसर मिलेगा. इससे उनकी अनुपस्थिति और अवकाश लेने की प्रवृत्ति में कमी आएगी, जिससे बसों का संचालन सुगमता से हो सकेगा. योगी सरकार ने परिवहन निगम में काम करने वाले आउटसोर्स परिचालकों को बड़ी राहत दी है.

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इसके तहत अब आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त परिचालकों का पारस्परिक ट्रांसफर संभव होगा. यह कदम परिचालकों की सुविधा, निगम की कार्यक्षमता और राजस्व में वृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. आउटसोर्स कर्मचारियों के ट्रांसफर की यह नई व्यवस्था एक स्वागत योग्य पहल है. इससे न केवल कर्मचारियों को राहत मिलेगी. बल्कि उनकी कार्यप्रणाली पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा. उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी सुधार किए जाएंगे. जिससे आउटसोर्सिंग क्षेत्र में कार्यरत लाखों कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सके.

भारतीय बस्ती
bhartiyabasti.com
17 Apr 2025 By Shambhunath Gupta

मुख्यमंत्री योगी ने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए किया बड़ा ऐलान, अपने जिले में कर सकेंगे काम

सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है. अब तक जिस व्यवस्था में इन कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया जाता था. उसमें अब बदलाव किया गया है. सरकार ने निर्णय लिया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों का भी ट्रांसफर संभव होगा. जिससे न केवल उनकी कार्यस्थल स्थिरता बढ़ेगी. बल्कि पारिवारिक व व्यक्तिगत जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

अब आउटसोर्स कर्मचारियों का भी हो सकेगा ट्रांसफर

सरकार द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी की पारिवारिक स्थिति, स्वास्थ्य कारण, या विशेष परिस्थितियाँ ट्रांसफर की मांग करती हैं. तो विभाग उस अनुरोध पर विचार कर सकेंगे. यह व्यवस्था खासतौर से उन आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए लाभदायक होगी जो वर्षों से एक ही स्थान पर कार्य कर रहे थे लेकिन निजी कारणों से स्थानांतरण चाहते थे. वर्तमान व्यवस्था में परिवहन विभाग में परिचालकों को जहां नियुक्त किया जाता है, वहीं पर सेवा देनी होती है. लेकिन अब ऐसे परिचालक, जिन्होंने कम से कम छह माह की सेवा और 30,000 किलोमीटर की दूरी पूरी कर ली है, वे आपसी सहमति से स्थानांतरण करा सकेंगे.

इस फैसले से दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात परिचालकों को अपने गृह जनपद या उसके पास सेवा देने का मौका मिलेगा. परिवहन मंत्री ने बताया कि परिचालकों की नियमित उपलब्धता से कार्यदिवस बढ़ेंगे, बसों की संख्या में इज़ाफा होगा और इसके परिणामस्वरूप परिवहन निगम की आय में भी वृद्धि होगी. यात्रियों को समय पर और नियमित बसें मिलेंगी, जिससे उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में आसानी होगी. योगी सरकार का यह फैसला न केवल परिचालकों के हित में है, बल्कि इससे आम जनता को भी सीधा लाभ मिलेगा. सरकार का उद्देश्य हर क्षेत्र में पारदर्शिता, सुविधा और विकास को बढ़ावा देना है और यह कदम उसी दिशा में एक और मजबूत प्रयास है. मानना है कि यह कदम आउटसोर्स कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाएगा और उनकी कार्यकुशलता में भी सुधार करेगा. साथ ही इससे कर्मचारियों के बीच एक सकारात्मक संदेश जाएगा कि सरकार उनकी परिस्थितियों को समझ रही है.

क्या है नई व्यवस्था, विशेषज्ञों की राय

परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने घोषणा ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में परिचालकों को जहां नियुक्त किया जाता है, वहीं पर सेवा देनी होती है. लेकिन अब ऐसे परिचालक, जिन्होंने कम से कम छह माह की सेवा और 30,000 किलोमीटर की दूरी पूरी कर ली है, वे आपसी सहमति से ट्रांसफर करा सकेंगे. इस फैसले से दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात परिचालकों को अपने गृह जनपद या उसके समीपस्थ स्थानों पर सेवा देने का अवसर मिलेगा. इससे उनकी अनुपस्थिति और अवकाश लेने की प्रवृत्ति में कमी आएगी, जिससे बसों का संचालन सुगमता से हो सकेगा. योगी सरकार ने परिवहन निगम में काम करने वाले आउटसोर्स परिचालकों को बड़ी राहत दी है.

इसके तहत अब आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त परिचालकों का पारस्परिक ट्रांसफर संभव होगा. यह कदम परिचालकों की सुविधा, निगम की कार्यक्षमता और राजस्व में वृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. आउटसोर्स कर्मचारियों के ट्रांसफर की यह नई व्यवस्था एक स्वागत योग्य पहल है. इससे न केवल कर्मचारियों को राहत मिलेगी. बल्कि उनकी कार्यप्रणाली पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा. उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी सुधार किए जाएंगे. जिससे आउटसोर्सिंग क्षेत्र में कार्यरत लाखों कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सके.

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शम्भूनाथ गुप्ता पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। 'मीडिया दस्तक' और 'बस्ती चेतना' जैसे प्लेटफॉर्म पर न्यूज़ और वीडियो एडिटिंग टीम में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। न्यूज़ प्रोडक्शन और डिजिटल कंटेंट निर्माण में गहरा अनुभव रखते हैं। वर्तमान में वे 'भारतीय बस्ती' की उत्तर प्रदेश टीम में कार्यरत हैं, जहां वे राज्य से जुड़ी खबरों की गंभीर और सटीक कवरेज में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।