गोरखपुर–शामली ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे पर बड़ा अपडेट, बरेली से जुड़ेगा उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश: अब तक दो नेशनल हाईवे होने के बावजूद बरेली को एक्सप्रेस-वे नेटवर्क से जोड़ने की मांग अधूरी थी. लेकिन अब इस दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया गया है. गोरखपुर से शामली तक बनने वाला ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे बरेली के लिए नई पहचान साबित हो सकता है. यह परियोजना पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सीधा और तेज रास्ता तैयार करेगी.
ग्रामीण इलाकों से होकर गुजरेगा आधुनिक मार्ग
लगभग 700 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का असर बरेली मंडल पर विशेष रूप से पड़ेगा. बरेली जिले में यह मार्ग फरीदपुर, नवाबगंज और बहेड़ी तहसील क्षेत्र के कई गांवों से होकर गुजरेगा. इससे न सिर्फ शहर बल्कि गांवों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी. स्थानीय लोगों को रोजगार, व्यापार और आवागमन में सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है.
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार
एक्सप्रेस-वे के निर्माण से पहले भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है. इसके लिए काला (कंपिटेंट अथॉरिटी फॉर लैंड एक्विजिशन) एजेंसी का चयन कर लिया गया है. बरेली, शाहजहांपुर और पीलीभीत जिलों में इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी अपर जिलाधिकारियों को दी गई है, जबकि लखीमपुर खीरी में यह कार्य उपजिलाधिकारी के जिम्मे सौंपा गया है.
सर्वे के बाद तय हुई प्रशासनिक जिम्मेदारी
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने चारों जिलों में प्रारंभिक सर्वे कराने के बाद काला चयन से जुड़ी सूची जिला प्रशासन को भेजी थी. इसके बाद संबंधित अधिकारियों को औपचारिक रूप से जिम्मेदारी दी गई, जिससे आगे की प्रक्रिया बिना देरी पूरी की जा सके. लखनऊ और दिल्ली के बीच स्थित होने के कारण बरेली पहले से ही व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, वहीं उत्तराखंड से इसका सीधा संपर्क भी इस परियोजना को खास बनाता है.
पूर्व से पश्चिम तक बनेगा तेज रफ्तार कॉरिडोर
यह ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे गोरखपुर से शुरू होकर बस्ती, अयोध्या, लखनऊ, सीतापुर और लखीमपुर खीरी होते हुए पीलीभीत के बीसलपुर और शाहजहांपुर के पुवायां से गुजरते हुए बरेली पहुंचेगा. इसके बाद यह रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर और मेरठ होते हुए शामली तक जाएगा.
इस एक्सप्रेस-वे के बन जाने से बरेली समेत आसपास के जिलों की तस्वीर बदल सकती है. लंबी दूरी की यात्रा कम समय में पूरी होगी. व्यापार और उद्योग को नई गति मिलेगी. बरेली अब एक्सप्रेस-वे के जरिए प्रदेश के प्रमुख शहरों से सीधे जुड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सकेगा.
जमीन पर लगेगी कानूनी रोक
चयनित भूमि को पहले थ्री-ए अधिसूचना के अंतर्गत घोषित किया जाएगा. इसके बाद एक वर्ष तक उस जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. यदि इस अवधि में थ्री-डी अधिसूचना जारी नहीं होती है, तो यह पूरी प्रक्रिया स्वतः समाप्त मानी जाएगी. थ्री-डी घोषित होते ही भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी तरह प्रभावी हो जाएगी.
निर्माण की समयसीमा भी तय
एनएचएआई से जुड़े अधिकारियों के अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में एक्सप्रेस-वे निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है. अनुमान है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा होने में लगभग 3 वर्ष का समय लग सकता है.
गोरखपुर–शामली ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे पर बड़ा अपडेट, बरेली से जुड़ेगा उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश: अब तक दो नेशनल हाईवे होने के बावजूद बरेली को एक्सप्रेस-वे नेटवर्क से जोड़ने की मांग अधूरी थी. लेकिन अब इस दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया गया है. गोरखपुर से शामली तक बनने वाला ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे बरेली के लिए नई पहचान साबित हो सकता है. यह परियोजना पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सीधा और तेज रास्ता तैयार करेगी.
ग्रामीण इलाकों से होकर गुजरेगा आधुनिक मार्ग
लगभग 700 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का असर बरेली मंडल पर विशेष रूप से पड़ेगा. बरेली जिले में यह मार्ग फरीदपुर, नवाबगंज और बहेड़ी तहसील क्षेत्र के कई गांवों से होकर गुजरेगा. इससे न सिर्फ शहर बल्कि गांवों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी. स्थानीय लोगों को रोजगार, व्यापार और आवागमन में सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है.
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार
एक्सप्रेस-वे के निर्माण से पहले भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है. इसके लिए काला (कंपिटेंट अथॉरिटी फॉर लैंड एक्विजिशन) एजेंसी का चयन कर लिया गया है. बरेली, शाहजहांपुर और पीलीभीत जिलों में इस प्रक्रिया की जिम्मेदारी अपर जिलाधिकारियों को दी गई है, जबकि लखीमपुर खीरी में यह कार्य उपजिलाधिकारी के जिम्मे सौंपा गया है.
सर्वे के बाद तय हुई प्रशासनिक जिम्मेदारी
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने चारों जिलों में प्रारंभिक सर्वे कराने के बाद काला चयन से जुड़ी सूची जिला प्रशासन को भेजी थी. इसके बाद संबंधित अधिकारियों को औपचारिक रूप से जिम्मेदारी दी गई, जिससे आगे की प्रक्रिया बिना देरी पूरी की जा सके. लखनऊ और दिल्ली के बीच स्थित होने के कारण बरेली पहले से ही व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, वहीं उत्तराखंड से इसका सीधा संपर्क भी इस परियोजना को खास बनाता है.
पूर्व से पश्चिम तक बनेगा तेज रफ्तार कॉरिडोर
यह ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे गोरखपुर से शुरू होकर बस्ती, अयोध्या, लखनऊ, सीतापुर और लखीमपुर खीरी होते हुए पीलीभीत के बीसलपुर और शाहजहांपुर के पुवायां से गुजरते हुए बरेली पहुंचेगा. इसके बाद यह रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर और मेरठ होते हुए शामली तक जाएगा.
इस एक्सप्रेस-वे के बन जाने से बरेली समेत आसपास के जिलों की तस्वीर बदल सकती है. लंबी दूरी की यात्रा कम समय में पूरी होगी. व्यापार और उद्योग को नई गति मिलेगी. बरेली अब एक्सप्रेस-वे के जरिए प्रदेश के प्रमुख शहरों से सीधे जुड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सकेगा.
जमीन पर लगेगी कानूनी रोक
चयनित भूमि को पहले थ्री-ए अधिसूचना के अंतर्गत घोषित किया जाएगा. इसके बाद एक वर्ष तक उस जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. यदि इस अवधि में थ्री-डी अधिसूचना जारी नहीं होती है, तो यह पूरी प्रक्रिया स्वतः समाप्त मानी जाएगी. थ्री-डी घोषित होते ही भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी तरह प्रभावी हो जाएगी.
निर्माण की समयसीमा भी तय
एनएचएआई से जुड़े अधिकारियों के अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में एक्सप्रेस-वे निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है. अनुमान है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा होने में लगभग 3 वर्ष का समय लग सकता है.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।