उत्तर प्रदेश में इस योजना के नियमों में बड़ा बदलाव!
इस बदलाव से फर्जी विवाह और गलत दस्तावेजों के आधार पर होने वाले पंजीकरणों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके. राज्य सरकार का उद्देश्य विवाह पंजीकरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जिम्मेदार और प्रमाणिक बनाना है.
नए आदेश के अनुसार, अब विवाह पंजीकरण के समय वर-वधू के परिवार के किसी एक सदस्य की मौजूदगी अनिवार्य होगी. यह सदस्य माता, पिता, भाई, बहन, दादा-दादी, नाना-नानी या संतान में से कोई भी हो सकता है. यदि परिवार से कोई सदस्य उपस्थित नहीं हो पाता है, तो उस स्थिति में विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहित, मौलवी या पादरी को स्वयं उपस्थित होकर गवाही देनी होगी.
गवाही के अलावा धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले व्यक्ति को एक शपथ पत्र भी जमा करना अनिवार्य होगा, जिसमें विवाह की वैधता और सत्यता की पुष्टि करनी होगी. साथ ही विवाह समारोह की वीडियो रिकॉर्डिंग को एक पेन ड्राइव में संलग्न करके पंजीकरण कार्यालय में जमा कराना अनिवार्य कर दिया गया है.
एआईजी स्टांप पुष्पेंद्र कुमार ने इस मामले में बताया कि सरकार से मिलें आदेश को सभी जिलों के उप-पंजीयकों को भेज दिया गया है और सभी को नए दिशा-निर्देशों के अनुपालन के लिए निर्देशित किया गया है. उन्होंने कहा कि यह निर्णय राज्य में बढ़ते फर्जी विवाह मामलों को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. पुराने नियमों के तहत विवाह स्थल के आधार पर पंजीकरण किया जाता था, जिससे कई बार ऐसे मामले सामने आए जहाँ फर्जी तरीके से विवाह करवा कर दस्तावेज तैयार करा लिए जाते थे. विवाह जैसे सामाजिक और कानूनी रूप से महत्वपूर्ण संस्थान में पारदर्शिता लाने और फर्जी संभावनाओं को समाप्त करने के लिए सरकार द्वारा यह नियम परिवर्तन जरूरी है.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।