श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मौजूदा मॉडल को लेकर संतों में आक्रोश
बैठक श्रीराम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ रामविलास वेदांती ने कहां की जब न्यास का गठन हुआ उस समय सभी संत महंत उपस्थित थे. तब अशोक सिंघल ने कहा था कि इस समय न्यास के पास 20 करोड़ रुपए हैं. इसी में मंदिर निर्माण करना है. उस समय सहमति बनी थी. लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने श्रीराम जी के पक्ष में फैसला दे दिया और पूरी जमीन राम जी को मिल गई और अब पैसे की भी कमी नहीं है. मेरे पास ऐसे लोग हैं जो अकेले भव्य मकराना के संगमरमर के पत्थर से मंदिर निर्माण करा सकते है.
500 वर्षों की तपस्या के बाद संतो को यह फल मिला है और भगवान श्री राम पूरे विश्व में पूजे जाते है. उनका मंदिर विश्वव्यापी होना चाहिए. जिसके शिखर की ऊंचाई 1111 फुट से कम ना हो और यह कराची इस्लामाबाद से दिखाई दे. उन्होंने कहा कि विश्व में ही नहीं भारत में ही दर्जनों ऐसे मंदिर हैं जिन की भव्यता देखते ही बनती है उससे भी भव्य भगवान श्री राम का मंदिर बनना चाहिए. हमने इस मामले में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री राज्यपाल गृहमंत्री संघ प्रमुख मोहन भागवत और ट्रस्ट के महासचिव को भी पत्र लिखा है. संतो को समय की कोई बाध्यता नहीं है मंदिर 10 साल में 15 साल में बने लेकिन भव्य बने. महंत धर्मदास ने कहा कि हमारे गुरु जी रामदास जी महाराज ने भगवान को प्रकट किया था और उनके स्थापना में हमें भी नहीं बुलाया गया. भगवान श्री राम का मंदिर भव्य बनना चाहिए हमारे रामजी के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए.
संगत ऋषि उदासीन आश्रम के महंत डॉ भरत दास ने कहा भगवान श्री राम का मंदिर अलौकिक एवं भव्य होना चाहिए इसमें संत कोई समझौता नहीं करेंगे. सैकड़ों बरसो बद हमको यह खुशी मिली है इसमें कोई समझौता नहीं होगा अलौकिक एवं भव्य विश्वव्यापी मंदिर बनना चाहिए. दंत धावन कुंड के महंत नारायणा अचारी जी महाराज ने कहा भगवान श्री राम का मंदिर ऐसा हो जो विश्व में अकेला मंदिर हो और इसमें शहीदों का स्मारक भी बने.
यह भी पढ़ें: बस्ती फोरलेन अटका: अमहट से प्लास्टिक कॉम्प्लेक्स तक सड़क प्रस्ताव लंबित, भदेश्वर नाथ मंदिर को भी मिलेगा लाभजानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण जी महाराज ने कहा जब राम जन्म भूमि का विवाद चल रहा था तो हमारे पास लगभग ढाई एकड़ जमीन की इस समय हमारे पास 70 एकड़ जमीन पूरे जमीन पर भव्य मंदिर बनना चाहिए. हमारा ट्रस्ट से विरोध नहीं है लेकिन अयोध्या के संत मंदिर आंदोलन के प्रेरणा स्रोत थे. उनकी सहमति अनिवार्य है और भगवान श्री राम का मंदिर उनके अनुरूप विश्वव्यापी होना चाहिए अद्भुत एवं अलौकिक होना चाहिए.
यह भी पढ़ें: कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार: मेट्रो टनल तैयार, यात्रियों को जल्द मिलेगी सुविधाबड़ा भक्तमाल मंदिर के महंत अवधेश दास जी महाराज ने कहा अयोध्या के संतों से ट्रस्ट के लोगों को परामर्श लेना चाहिए क्योंकि संघर्ष के समय में संत ही आगे आते थे और संत के नाम पर ही पूरा संघर्ष चला इसलिए अयोध्या के संतों का विचार लेकर के भगवान राम का भव्य मंदिर निर्माण हो इसमें समय की कोई बाध्यता नहीं है. बैठक में महंत पवन शास्त्री , डॉ राघुवेशदास वेदांती सहित सैकड़ों संत महंत उपस्थित रहे.
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