यूपी के इस जिले में बनेगी 300 एकड़ की नई इंडस्ट्रियल टाउनशिप, उद्यमियों को मिलेगी फ्री होल्ड जमीन
बरेली बना नया विकल्प
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ जैसे औद्योगिक इलाकों में जमीन महंगी होने के साथ-साथ लीज से जुड़ी शर्तें भी उद्योगों के विस्तार में रुकावट बन रही हैं. ऐसे में उद्यमी ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं, जहां कम लागत में स्थायी निवेश किया जा सके. बरेली इस जरूरत पर खरा उतरता दिख रहा है और यही कारण है कि यहां औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं.
फ्री होल्ड जमीन बनेगी सबसे बड़ा आकर्षण
बरेली विकास प्राधिकरण की ओर से विकसित की जा रही नई औद्योगिक टाउनशिप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां उद्यमियों को फ्री होल्ड भूमि देने का प्रस्ताव रखा गया है. प्रदेश के अधिकतर औद्योगिक क्षेत्रों में अभी जमीन लीज पर ही मिलती है, जबकि बरेली में पहली बार पूर्ण मालिकाना हक देने की तैयारी है. इससे उद्योगपतियों को बैंक लोन, विस्तार और लंबे समय की योजना बनाने में आसानी होगी.
एक्सपो में सामने आया विकास का रोडमैप
लखनऊ में आयोजित इंडिया फूड एक्सपो-2026 के दौरान बीडीए के उपाध्यक्ष डॉ. मनिकंडन ए. ने औद्योगिक टाउनशिप की विस्तृत योजना साझा की. उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ में औद्योगिक भूमि की भारी कमी है. यही वजह है कि उद्योगों को आगे बढ़ने में दिक्कत हो रही है. ऐसे हालात में बरेली एक किफायती और व्यावहारिक विकल्प बनकर उभर रहा है.
लोकेशन बनी बरेली की सबसे बड़ी ताकत
रहपुरा जागीर के पास करीब 300 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही यह औद्योगिक टाउनशिप भौगोलिक रूप से बेहद मजबूत स्थिति में है. यह दिल्ली-लखनऊ कॉरिडोर पर स्थित है और उत्तराखंड के औद्योगिक इलाकों के भी काफी पास है. गंगा एक्सप्रेसवे से सीधा जुड़ाव होने से माल ढुलाई में समय और खर्च दोनों कम होंगे. बेहतर रेल नेटवर्क और नजदीकी एयर कनेक्टिविटी लॉजिस्टिक्स को और मजबूत बनाएगी.
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बीड़ीए की योजना के अनुसार इस औद्योगिक टाउनशिप को दो चरणों में विकसित किया जाएगा. यहां आधुनिक और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा. इसमें भूमिगत बिजली व्यवस्था, गैस पाइपलाइन, ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन, चौड़ी सड़कें, उन्नत सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम, फायर स्टेशन और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. यह टाउनशिप खासतौर पर फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, लाइट इंजीनियरिंग और एमएसएमई सेक्टर के लिए उपयुक्त मानी जा रही है.
पुराने उद्यमियों को भी राहत की उम्मीद
जिले के परसाखेड़ा, सीबीगंज, फरीदपुर, रजऊ और भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्रों में पहले से 400 से ज्यादा इकाइयां संचालित हो रही हैं. इनमें से अधिकांश इकाइयों को 99 साल की लीज पर जमीन दी गई है. लीज खत्म होने के बाद नवीनीकरण की प्रक्रिया उद्यमियों के लिए परेशानी का कारण बनती है. कई बार उद्योग बंद होने की स्थिति तक आ जाती है. बीडीए की इस पहल से पुराने उद्यमियों को भी लीज होल्ड जमीन के फ्री होल्ड होने की उम्मीद जगी है.
निवेशकों की राय जानने के लिए सर्वे
उद्यमियों की जरूरत और रुचि को समझने के लिए बीडीए ने 3 दिन का डिमांड सर्वे शुरू किया है. इच्छुक निवेशक बीडीए की आधिकारिक वेबसाइट bdainfo.org पर आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा लखनऊ में आयोजित फूड एक्सपो में बीडीए के स्टॉल पर जाकर भी पूरी जानकारी ली जा सकती है.
रोजगार और विकास को मिलेगी रफ्तार
बीडीए के उपाध्यक्ष डॉ. मनिकंडन ए. के अनुसार इस औद्योगिक टाउनशिप से न सिर्फ निवेश बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. इससे बरेली के समग्र विकास को गति मिलेगी और शहर की पहचान एक मजबूत औद्योगिक हब के रूप में बनेगी.
उद्योग संगठनों ने जताया भरोसा
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चेयरमैन मयूर धीरवानी का कहना है कि फ्री होल्ड जमीन की यह पहल उद्योगों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी. इससे जिले में नए उद्योग आएंगे और बरेली का औद्योगिक नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा. वहीं संगठन के सचिव रजत मेहरोत्रा ने बताया कि नई टाउनशिप में उद्यमियों को सभी जरूरी सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी और एनओसी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा.
जिले में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के आंकड़े यह साफ दिखाते हैं कि बरेली पहले ही एक मजबूत औद्योगिक आधार रखता है. विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में सैकड़ों इकाइयां कार्यरत हैं, जिनमें हजारों लोगों को रोजगार मिला हुआ है.
जिले में उद्योगों की स्थिति
- परसाखेड़ा - 200 इकाइयां
- फरीदपुर / रजऊ - 150 इकाइयां
- भोजीपुरा - 20 इकाइयां
- सीबीगंज - 30 इकाइयां
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि यदि भूमि फ्री होल्ड की सुविधा मिलती है, तो मौजूदा उद्योगों के विस्तार के साथ-साथ नए निवेशकों का आना भी तय है.
पहले से मजबूत है औद्योगिक आधार
बरेली जिले में खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी 200 से अधिक छोटी-बड़ी इकाइयां पहले से काम कर रही हैं. यहां बने उत्पाद देश के कई राज्यों में भेजे जाते हैं और सालाना कारोबार करीब 150 करोड़ रुपये का है. परसाखेड़ा क्षेत्र में लगभग 1 दर्जन प्लाईवुड फैक्टरियां हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा है. यही कारण है कि बीडीए ने औद्योगिक टाउनशिप में फ्री होल्ड भूमि देने का फैसला लिया है, जिससे उद्योगों को और मजबूती मिल सके.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।