सिद्धार्थनगर में 12 जून से लगेगी लोक अदालत, इन मामलों की होगी सुनवाई
सिद्धार्थनगर. उत्तर प्रदेश स्थित सिद्धार्थनगर में जनपद न्यायाधीश/ अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सिद्धार्थनगर ने अपने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया है कि दिनांक 12 सितंबर 2020 (द्वितीय शनिवार) को प्रातः 10:00 बजे से सिविल कोर्ट सिद्धार्थनगर व बाह्य स्थित न्यायालय बांसी, डुमरियागंज एवं जिला कारागार सिद्धार्थनगर तथा समस्त राजस्व, चकबंदी एवं अन्य न्यायालयों में आपराधिक शमनीय वाद धारा 138 पराक्रम्य में लिखत अधिनियम के मामले सुने जाएंगे. ये मामले लोक अदालत के तहत सुने जाएंगे.
साथ ही बैंक वसूली के वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाएं, पारिवारिक वाद, श्रम वाद, भूमि अधिग्रहण वाद, विद्युत एवं जल बिल विवाद (चोरी से संबंधित विवाद सहित) सर्विस में वेतन संबंधित विवाद, सेवानिवृत्त लाभों से संबंधित विवाद, राजस्व वाद (जनपद न्यायालय में लंबित) अन्य सिविल वाद (किराया, सुखाधिकार, व्ययादेश, विशिष्ट अनुतोष वाद) के प्रकरण से संबंधित मामलों को प्रमुखता प्रदान करते हुये, से संबंधित लंबित मामलों को अधिक से अधिक संख्या में निस्तारण हेतु राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाना सुनिश्चित किया गया है.
साथ ही साथ उक्त राष्ट्रीय लोक अदालत में प्री- लिटिगेशन स्तर के प्रकरण धारा 138 पराक्रम्य में लिखत अधिनियम, बैंक वसूली के वाद, श्रम वाद, विद्युत एवं जल बिल विवाद (चोरी से सम्बंधित विवाद सहित) एवं अन्य वादों (आपराधिक शमनीय, पारिवारिक एवं अन्य सिविल) के प्रकरण आदि का निस्तारण भी पारस्परिक सुलह समझौते के आधार पर आपसी सद्भावना के अधीन कराया जा सकता है.
यह भी पढ़ें: सिद्धार्थनगर में बड़ी लापरवाही: तड़पता रहा कोरोना संदिग्ध, डॉक्टर ने कोरम पूरा किया; रास्ते में युवक की मौत
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सिद्धार्थनगर. उत्तर प्रदेश स्थित सिद्धार्थनगर में जनपद न्यायाधीश/ अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सिद्धार्थनगर ने अपने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया है कि दिनांक 12 सितंबर 2020 (द्वितीय शनिवार) को प्रातः 10:00 बजे से सिविल कोर्ट सिद्धार्थनगर व बाह्य स्थित न्यायालय बांसी, डुमरियागंज एवं जिला कारागार सिद्धार्थनगर तथा समस्त राजस्व, चकबंदी एवं अन्य न्यायालयों में आपराधिक शमनीय वाद धारा 138 पराक्रम्य में लिखत अधिनियम के मामले सुने जाएंगे. ये मामले लोक अदालत के तहत सुने जाएंगे.
साथ ही बैंक वसूली के वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाएं, पारिवारिक वाद, श्रम वाद, भूमि अधिग्रहण वाद, विद्युत एवं जल बिल विवाद (चोरी से संबंधित विवाद सहित) सर्विस में वेतन संबंधित विवाद, सेवानिवृत्त लाभों से संबंधित विवाद, राजस्व वाद (जनपद न्यायालय में लंबित) अन्य सिविल वाद (किराया, सुखाधिकार, व्ययादेश, विशिष्ट अनुतोष वाद) के प्रकरण से संबंधित मामलों को प्रमुखता प्रदान करते हुये, से संबंधित लंबित मामलों को अधिक से अधिक संख्या में निस्तारण हेतु राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाना सुनिश्चित किया गया है.
साथ ही साथ उक्त राष्ट्रीय लोक अदालत में प्री- लिटिगेशन स्तर के प्रकरण धारा 138 पराक्रम्य में लिखत अधिनियम, बैंक वसूली के वाद, श्रम वाद, विद्युत एवं जल बिल विवाद (चोरी से सम्बंधित विवाद सहित) एवं अन्य वादों (आपराधिक शमनीय, पारिवारिक एवं अन्य सिविल) के प्रकरण आदि का निस्तारण भी पारस्परिक सुलह समझौते के आधार पर आपसी सद्भावना के अधीन कराया जा सकता है.
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