शहरों में वन क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए वर्चुअल तरीके से आयोजित होगा विश्व पर्यावरण दिवस समारोह

शहरों में वन क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए वर्चुअल तरीके से आयोजित होगा विश्व पर्यावरण दिवस समारोह
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विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यूएनईपी द्वारा घोषित विषय पर विश्व पर्यावरण दिवस के कार्यक्रम आयोजित करता है. इस वर्ष का विषय ‘जैव विविधता’ है. कोविड-19 महामारी के मौजूदा हालात को देखते हुए मंत्रालय इस बार विश्व पर्यावरण दिवस समारोह वर्चुअल तरीके से आयोजित कर रहा है, जिसमें शहरों में वन क्षेत्र पर विशेष जोर देगा. केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर समारोह में मुख्य अतिथि होंगे. समारोह का सीधा प्रसारण 5 जून को सुबह 9 बजे से onhttps: //www.youtube.com/watch? v= IzMQuhmheoo पर उपलब्ध होगा.

भारत में भू​मि क्षेत्र की तुलता में मानव और मेवेशियों की आबादी ज्यादा होने के बावजूद आठ प्रतिशत जैव विविधता है. देश समृद्ध जैव विविधता से संपन्न है, जिसमें जीव जंतुओं और पौधों की कई प्रजातियां हैं. दुनिया के 35 जैव-विविधता वाले हॉटस्पॉटों में से 4 भारत में हैं, जिसमें कई स्थानिक प्रजातियां हैं. जैव विविधता संरक्षण को पारंपरिक रूप से दूरस्थ वन क्षेत्रों तक ही सीमित माना जाता है, लेकिन बढ़ते शहरीकरण के साथ शहरी क्षेत्रों में भी जैव विविधता को सुरक्षित रखने और बचाने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 200 निगमों और शहरों में शहरी वन क्षेत्र बनाने के लिए एक योजना फिर से शुरू की हैं क्योंकि इन सभी शहरों में बगीचे हैं, लेकिन जंगल नहीं हैं. शहरी वन क्षेत्र इन शहरों में रहने वालों के लिए सांस लेने के लिए ताजी हवा देने में मददगार बनेंगे.

पुणे शहर में 40 एकड़ की वन भूमि पर एक जंगल विकसित किया गया है. इस जंगल में 65000 से अधिक पेड़, 5 तालाब और 2 वॉच टॉवर बनाए गए हैं, जिसमें कई पेड़ 25-30 फीट तक बढ़ रहे हैं. इस साल और अधिक पेड़ लगाने की योजना है. आज के समय में यह जंगल 23 पौधों की प्रजातियों, 29 पक्षी प्रजातियों, 15 तितली प्रजातियों, 10 सरीसृप और 3 स्तनपायी प्रजातियों के साथ जैव विविधता से समृद्ध है. यह शहरी वन परियोजना न केवल पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में मदद कर रही है, बल्कि पुनइकरों को एक अच्छा चलने का रास्ता भी उपलब्ध करा रही है. सुबह और शाम सैर करने वालों के लिए भी यह काफी अच्छी जगह बन चुकी है. यह वाजरे शहरी वन क्षेत्र देश के बाकी हिस्सों के लिए एक आदर्श बन चुका है.

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री बाबुल सुप्रियो, महाराष्ट्र सरकार के वन मंत्री श्री संजय राठे, पर्यावरण मंत्रालय के नए सचिव श्री आर पी गुप्ता, महानिदेशक वन और पर्यावरण मंत्रालय के विशेष सचिव श्री संजय कुमार, संयुक्त राष्ट्र कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन कन्वेंशन के कार्यकारी निदेशक श्री इब्राहिम थियावंड, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की कार्यकारी निदेशक सुश्री इनगर एंडरसन समेत कई गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे.

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bhartiyabasti.com
04 Jun 2020 By Bhartiya Basti

शहरों में वन क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए वर्चुअल तरीके से आयोजित होगा विश्व पर्यावरण दिवस समारोह

विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यूएनईपी द्वारा घोषित विषय पर विश्व पर्यावरण दिवस के कार्यक्रम आयोजित करता है. इस वर्ष का विषय ‘जैव विविधता’ है. कोविड-19 महामारी के मौजूदा हालात को देखते हुए मंत्रालय इस बार विश्व पर्यावरण दिवस समारोह वर्चुअल तरीके से आयोजित कर रहा है, जिसमें शहरों में वन क्षेत्र पर विशेष जोर देगा. केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर समारोह में मुख्य अतिथि होंगे. समारोह का सीधा प्रसारण 5 जून को सुबह 9 बजे से onhttps: //www.youtube.com/watch? v= IzMQuhmheoo पर उपलब्ध होगा.

भारत में भू​मि क्षेत्र की तुलता में मानव और मेवेशियों की आबादी ज्यादा होने के बावजूद आठ प्रतिशत जैव विविधता है. देश समृद्ध जैव विविधता से संपन्न है, जिसमें जीव जंतुओं और पौधों की कई प्रजातियां हैं. दुनिया के 35 जैव-विविधता वाले हॉटस्पॉटों में से 4 भारत में हैं, जिसमें कई स्थानिक प्रजातियां हैं. जैव विविधता संरक्षण को पारंपरिक रूप से दूरस्थ वन क्षेत्रों तक ही सीमित माना जाता है, लेकिन बढ़ते शहरीकरण के साथ शहरी क्षेत्रों में भी जैव विविधता को सुरक्षित रखने और बचाने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 200 निगमों और शहरों में शहरी वन क्षेत्र बनाने के लिए एक योजना फिर से शुरू की हैं क्योंकि इन सभी शहरों में बगीचे हैं, लेकिन जंगल नहीं हैं. शहरी वन क्षेत्र इन शहरों में रहने वालों के लिए सांस लेने के लिए ताजी हवा देने में मददगार बनेंगे.

पुणे शहर में 40 एकड़ की वन भूमि पर एक जंगल विकसित किया गया है. इस जंगल में 65000 से अधिक पेड़, 5 तालाब और 2 वॉच टॉवर बनाए गए हैं, जिसमें कई पेड़ 25-30 फीट तक बढ़ रहे हैं. इस साल और अधिक पेड़ लगाने की योजना है. आज के समय में यह जंगल 23 पौधों की प्रजातियों, 29 पक्षी प्रजातियों, 15 तितली प्रजातियों, 10 सरीसृप और 3 स्तनपायी प्रजातियों के साथ जैव विविधता से समृद्ध है. यह शहरी वन परियोजना न केवल पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में मदद कर रही है, बल्कि पुनइकरों को एक अच्छा चलने का रास्ता भी उपलब्ध करा रही है. सुबह और शाम सैर करने वालों के लिए भी यह काफी अच्छी जगह बन चुकी है. यह वाजरे शहरी वन क्षेत्र देश के बाकी हिस्सों के लिए एक आदर्श बन चुका है.

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री बाबुल सुप्रियो, महाराष्ट्र सरकार के वन मंत्री श्री संजय राठे, पर्यावरण मंत्रालय के नए सचिव श्री आर पी गुप्ता, महानिदेशक वन और पर्यावरण मंत्रालय के विशेष सचिव श्री संजय कुमार, संयुक्त राष्ट्र कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन कन्वेंशन के कार्यकारी निदेशक श्री इब्राहिम थियावंड, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की कार्यकारी निदेशक सुश्री इनगर एंडरसन समेत कई गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे.

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