8 करोड़ की सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, पूर्व लेखपाल और रिश्तेदारों पर उठे सवाल
शहर से सटे मड़वानगर की करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी एवं ग्राम समाज की भूमि में कथित भ्रष्टाचार, अवैध आवंटन और कब्जे का मामला सामने आया है. गांव के कुछ निवासियों ने गुरूवार को समाजसेवी महेन्द्र कुमार एडवोकेट के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन देकर पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच कराने तथा भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रोकने की मांग की है.
ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम मड़वानगर स्थित गाटा संख्या 1276 एवं 1277 की सरकारी भूमि, जिसकी बाजारू कीमत लगभग 8 करोड़ रुपये बताई गई है. तत्कालीन लेखपाल उमापति मिश्रा द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कथित रूप से अपने रिश्तेदारों एवं परिचितों के नाम दर्ज कराया गया. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पहले भूमि का पट्टा बाहरी व्यक्तियों के नाम कराया गया और बाद में विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से इसे लेखपाल के परिजनों के नाम स्थानांतरित कर दिया गया. शिकायत में कहा गया है कि गाटा संख्या 1277 की भूमि पहले काली प्रसाद नामक व्यक्ति के नाम पट्टे पर दी गई, उसके बाद पंचराम के नाम हस्तांतरित हुई और बाद में श्रीमती सीता मिश्रा तथा श्रीमती बिन्दुमती मिश्रा के नाम पंजीकृत करा ली गई. आरोप है कि बिना वास्तविक निर्माण के भूमि को धारा-80 के तहत आबादी घोषित कराकर निजी स्वामित्व में परिवर्तित किया गया.
इसी प्रकार गाटा संख्या 1276 की नवीन परती सरकारी भूमि को अमेठी जनपद निवासी एक व्यक्ति के नाम आवंटित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं. शिकायत कर्ताओं का कहना है कि उक्त भूमि ग्राम सचिवालय और डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क के समीप स्थित है तथा वर्तमान में उस पर भी कब्जा कर निर्माण कराया जा रहा है.
प्रार्थना-पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित भूमि पर वर्तमान में पक्का निर्माण कार्य कराया जा रहा है. शिकायतकर्ताओं ने आशंका व्यक्त की है कि यदि तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया गया तो सरकारी भूमि पर स्थायी कब्जा हो जाएगा, जिससे ग्राम समाज और शासन को भारी नुकसान होगा. ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, सम्बंधित अधिकारियों और राज्यपाल से पूरे मामले की उच्च स्तरीय प्रशासनिक एवं मजिस्ट्रेटी जांच कराने, संबंधित अभिलेखों की पड़ताल करने, अवैध निर्माण कार्य रोकने, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तथा सरकारी भूमि के सभी विवादित आवंटनों को निरस्त करने की मांग की है. साथ ही शिकायतकर्ताओं और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की भी मांग की गई है. शिकायत में तत्कालीन लेखपाल उमापति मिश्रा की भूमिका, उनके परिजनों की सरकारी नियुक्तियों की वैधानिकता तथा सेवाकाल के दौरान अर्जित चल-अचल संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है.
ज्ञापन देने के बाद महेन्द्र कुमार एडवोकेट, कमलेश सचान, बुद्धि प्रकाश एडवोकेट, आर.के. आरतियन, धर्मेन्द्र कुमार रतन, विनय चौधरी उर्फ दुर्गा, अजय आजाद, सरिता भारती आदि ने चेतावनी दिया कि यदि समूचे मामले की जांच कर भू- माफियाओं के विरूद्ध शीघ्र कार्रवाई न हुई निर्णायक आन्दोलन छेड़ा जायेगा. ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से विश्वनाथ, वृजेश गौतम, मंगरू, डा. सुभाष, मातादीन, रामतेज, प्रिन्स, विनय चौधरी, संदीप, महेश कुमार, गोविन्द, लालचन्द, रामशंकर निराला, रंजीत आजाद, डा. जे.के. भार्गव, हृदय गौतम, विमलावती, अमृता, ऊषा देवी, आरती देवी, सरोज गौतम, किरन गौतम, दुर्गावती, मालती, उर्मिला देवी, विक्कीलाल, महेन्द्र चौधरी, तिलकराम गौतम, ठाकुर प्रसाद, रामदया आजाद, पट्टू, वीरेन्द्र प्रताप, चन्द्र प्रकाश गौतम, के साथ ही बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे.
फिलहाल मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. यदि शिकायत के आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी भूमि के कथित दुरुपयोग और राजस्व अभिलेखों में अनियमितताओं से जुड़े बड़े प्रकरण के रूप में सामने आ सकता है.
8 करोड़ की सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, पूर्व लेखपाल और रिश्तेदारों पर उठे सवाल
शहर से सटे मड़वानगर की करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी एवं ग्राम समाज की भूमि में कथित भ्रष्टाचार, अवैध आवंटन और कब्जे का मामला सामने आया है. गांव के कुछ निवासियों ने गुरूवार को समाजसेवी महेन्द्र कुमार एडवोकेट के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन देकर पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच कराने तथा भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रोकने की मांग की है.
ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम मड़वानगर स्थित गाटा संख्या 1276 एवं 1277 की सरकारी भूमि, जिसकी बाजारू कीमत लगभग 8 करोड़ रुपये बताई गई है. तत्कालीन लेखपाल उमापति मिश्रा द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कथित रूप से अपने रिश्तेदारों एवं परिचितों के नाम दर्ज कराया गया. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पहले भूमि का पट्टा बाहरी व्यक्तियों के नाम कराया गया और बाद में विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से इसे लेखपाल के परिजनों के नाम स्थानांतरित कर दिया गया. शिकायत में कहा गया है कि गाटा संख्या 1277 की भूमि पहले काली प्रसाद नामक व्यक्ति के नाम पट्टे पर दी गई, उसके बाद पंचराम के नाम हस्तांतरित हुई और बाद में श्रीमती सीता मिश्रा तथा श्रीमती बिन्दुमती मिश्रा के नाम पंजीकृत करा ली गई. आरोप है कि बिना वास्तविक निर्माण के भूमि को धारा-80 के तहत आबादी घोषित कराकर निजी स्वामित्व में परिवर्तित किया गया.
इसी प्रकार गाटा संख्या 1276 की नवीन परती सरकारी भूमि को अमेठी जनपद निवासी एक व्यक्ति के नाम आवंटित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं. शिकायत कर्ताओं का कहना है कि उक्त भूमि ग्राम सचिवालय और डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क के समीप स्थित है तथा वर्तमान में उस पर भी कब्जा कर निर्माण कराया जा रहा है.
प्रार्थना-पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित भूमि पर वर्तमान में पक्का निर्माण कार्य कराया जा रहा है. शिकायतकर्ताओं ने आशंका व्यक्त की है कि यदि तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया गया तो सरकारी भूमि पर स्थायी कब्जा हो जाएगा, जिससे ग्राम समाज और शासन को भारी नुकसान होगा. ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, सम्बंधित अधिकारियों और राज्यपाल से पूरे मामले की उच्च स्तरीय प्रशासनिक एवं मजिस्ट्रेटी जांच कराने, संबंधित अभिलेखों की पड़ताल करने, अवैध निर्माण कार्य रोकने, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तथा सरकारी भूमि के सभी विवादित आवंटनों को निरस्त करने की मांग की है. साथ ही शिकायतकर्ताओं और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की भी मांग की गई है. शिकायत में तत्कालीन लेखपाल उमापति मिश्रा की भूमिका, उनके परिजनों की सरकारी नियुक्तियों की वैधानिकता तथा सेवाकाल के दौरान अर्जित चल-अचल संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है.
ज्ञापन देने के बाद महेन्द्र कुमार एडवोकेट, कमलेश सचान, बुद्धि प्रकाश एडवोकेट, आर.के. आरतियन, धर्मेन्द्र कुमार रतन, विनय चौधरी उर्फ दुर्गा, अजय आजाद, सरिता भारती आदि ने चेतावनी दिया कि यदि समूचे मामले की जांच कर भू- माफियाओं के विरूद्ध शीघ्र कार्रवाई न हुई निर्णायक आन्दोलन छेड़ा जायेगा. ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से विश्वनाथ, वृजेश गौतम, मंगरू, डा. सुभाष, मातादीन, रामतेज, प्रिन्स, विनय चौधरी, संदीप, महेश कुमार, गोविन्द, लालचन्द, रामशंकर निराला, रंजीत आजाद, डा. जे.के. भार्गव, हृदय गौतम, विमलावती, अमृता, ऊषा देवी, आरती देवी, सरोज गौतम, किरन गौतम, दुर्गावती, मालती, उर्मिला देवी, विक्कीलाल, महेन्द्र चौधरी, तिलकराम गौतम, ठाकुर प्रसाद, रामदया आजाद, पट्टू, वीरेन्द्र प्रताप, चन्द्र प्रकाश गौतम, के साथ ही बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे.
फिलहाल मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. यदि शिकायत के आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी भूमि के कथित दुरुपयोग और राजस्व अभिलेखों में अनियमितताओं से जुड़े बड़े प्रकरण के रूप में सामने आ सकता है.
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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है