राष्ट्रीय बांस मिशन की सफलता का सबूत है यह तस्वीर
जितेंद्र कौशल सिंह
बाँस, विश्वास, उपहास एवं प्रवासी आभास के बीच वर्चुअल रैली का उपवास खूब चर्चा में हैं. गाँव मे कुछ लोगो ने विज्ञापन, तो कुछ लोगो में पहली बार बसवारी में पधारी एलईडी टीवी पिछवाड़े से ही धन्यवाद ज्ञापित किया (चित्रानुसार).
जैसे उनके पृष्ठ भाग पर यह बोझ लाद दिया गया हो. एलईडी से ज्यादा बांस चर्चा में हैं. देखा जाय तो बांस का हमारे समाज मे विशेष महत्व हैं.
पैदा होने से लेकर मृत्यु तक पार्टी के झण्डे से लेकर विरोधी के लिये तैयार डंडे तक में बांस का प्रयोग सर्वमान्य हैं. यदि बांस हरा हो तो उसका प्रयोग अनुष्ठान से लेकर अंतिम रथ विमान तैयार करने में किया जाता हैं.
बहरहाल यह तो लोकल इंट्रेस्टिव टेक्नीशियन (एलईडी) वाले जी बता पाएंगे कि उनके बांस के लिये यह …ठान था यह …मान था.
मौके पर टीवी का आनन्द ले रही इस नई पीढ़ी के लिये यह वर्चुअल आयोजन बांस में विश्वास की तलाश बन कर सामने आएगी या उनके विश्वास में बांस हो रहा हैं . यह तो आने वाला समय जो बांस की तरह तेजी से बढ़ता जा रहा हैं यह उसके गर्भ में हैं.
किंतु कुछ लोगो के लिये यह उपहास का विषय भी हैं शायद यह कुसमय बांस का होना ही हैं.
कुछ भी हो इस लॉक डाऊन में जब लोगो को सामाजिक दूरी,शारीरिक दूरी(शोसल डिस्टेंसिग)
बनाने की बात कही जा रही हैं . तो जनता में यह बांस ही हैं जो उत्साह की कमी को दूर कर रहा हैं.
वैसे मैं कभी गुजरात तो नही गया लेकिन गुजराती बॉस की अपनी उपयोगिता हैं. बांस को एक जगह रहना कहा भाता हैं जल्दी बढ़वार के कारण उसे कई स्थानों की यात्रा करनी पड़ती हैं.
इससे बॉस के लॉक डाऊन में बसवारी में रहने का दर्द भी बढ़ गया होगा . प्लेन से प्रवास न सही बसवारी वर्चुअल प्रवास तो हो गया. खैर बांस पर बसवारी की कृपा बनी रहे और जनता बांस की उपयोगिता को पाँच वर्षों में एक बार जरूर समझे जिससे पक्ष विपक्ष को बांस की सार्थकता समझने में पीछे से बल मिल सके. (आपने जो पढ़ा वह व्यंग्य मात्र है. )
राष्ट्रीय बांस मिशन की सफलता का सबूत है यह तस्वीर
जितेंद्र कौशल सिंह
बाँस, विश्वास, उपहास एवं प्रवासी आभास के बीच वर्चुअल रैली का उपवास खूब चर्चा में हैं. गाँव मे कुछ लोगो ने विज्ञापन, तो कुछ लोगो में पहली बार बसवारी में पधारी एलईडी टीवी पिछवाड़े से ही धन्यवाद ज्ञापित किया (चित्रानुसार).
जैसे उनके पृष्ठ भाग पर यह बोझ लाद दिया गया हो. एलईडी से ज्यादा बांस चर्चा में हैं. देखा जाय तो बांस का हमारे समाज मे विशेष महत्व हैं.
पैदा होने से लेकर मृत्यु तक पार्टी के झण्डे से लेकर विरोधी के लिये तैयार डंडे तक में बांस का प्रयोग सर्वमान्य हैं. यदि बांस हरा हो तो उसका प्रयोग अनुष्ठान से लेकर अंतिम रथ विमान तैयार करने में किया जाता हैं.
बहरहाल यह तो लोकल इंट्रेस्टिव टेक्नीशियन (एलईडी) वाले जी बता पाएंगे कि उनके बांस के लिये यह …ठान था यह …मान था.
मौके पर टीवी का आनन्द ले रही इस नई पीढ़ी के लिये यह वर्चुअल आयोजन बांस में विश्वास की तलाश बन कर सामने आएगी या उनके विश्वास में बांस हो रहा हैं . यह तो आने वाला समय जो बांस की तरह तेजी से बढ़ता जा रहा हैं यह उसके गर्भ में हैं.
किंतु कुछ लोगो के लिये यह उपहास का विषय भी हैं शायद यह कुसमय बांस का होना ही हैं.
कुछ भी हो इस लॉक डाऊन में जब लोगो को सामाजिक दूरी,शारीरिक दूरी(शोसल डिस्टेंसिग)
बनाने की बात कही जा रही हैं . तो जनता में यह बांस ही हैं जो उत्साह की कमी को दूर कर रहा हैं.
वैसे मैं कभी गुजरात तो नही गया लेकिन गुजराती बॉस की अपनी उपयोगिता हैं. बांस को एक जगह रहना कहा भाता हैं जल्दी बढ़वार के कारण उसे कई स्थानों की यात्रा करनी पड़ती हैं.
इससे बॉस के लॉक डाऊन में बसवारी में रहने का दर्द भी बढ़ गया होगा . प्लेन से प्रवास न सही बसवारी वर्चुअल प्रवास तो हो गया. खैर बांस पर बसवारी की कृपा बनी रहे और जनता बांस की उपयोगिता को पाँच वर्षों में एक बार जरूर समझे जिससे पक्ष विपक्ष को बांस की सार्थकता समझने में पीछे से बल मिल सके. (आपने जो पढ़ा वह व्यंग्य मात्र है. )
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