कृषि क्षेत्र पर कारपोरेट की बुरी नजर
जनसंख्या के बढ़ते दबाव के चलते महानगरों के आस पास की कृषि योग्य जमीनों (Farming) पर आलीशान मकान खड़े हो गये.
बेरोजगारों (Unemployment) की बड़ी फौज इन दिनों प्रापर्टी डीलर बनकर अपना जीविको पार्जन कर रही है.
अब ग्रामीण क्षेत्रों (Rural इंडिया) के कृषि योग्य जमीनों पर भी कार्पोरेट का खतरा मंडराता जा रहा है.
यदि किसान (farmer ) अभी न चेते तो वह दिन बहुत दूर नही है जब कृषि योग्य जमीनो के बड़े हिस्से पर कार्पोरेट का कब्जा हो जायेगा.
यह बड़े खतरे की घंटी है. अभी से चेत जाने की जरूरत है वरना किसानों को भूमि हीन होते देर न लगेगी.
यह भी पढ़ें: बकाया गन्ना मूल्य के सवाल पर आयुक्त का घेराव करेगी BKU
कृषि क्षेत्र पर कारपोरेट की बुरी नजर
जनसंख्या के बढ़ते दबाव के चलते महानगरों के आस पास की कृषि योग्य जमीनों (Farming) पर आलीशान मकान खड़े हो गये.
बेरोजगारों (Unemployment) की बड़ी फौज इन दिनों प्रापर्टी डीलर बनकर अपना जीविको पार्जन कर रही है.
अब ग्रामीण क्षेत्रों (Rural इंडिया) के कृषि योग्य जमीनों पर भी कार्पोरेट का खतरा मंडराता जा रहा है.
यदि किसान (farmer ) अभी न चेते तो वह दिन बहुत दूर नही है जब कृषि योग्य जमीनो के बड़े हिस्से पर कार्पोरेट का कब्जा हो जायेगा.
यह बड़े खतरे की घंटी है. अभी से चेत जाने की जरूरत है वरना किसानों को भूमि हीन होते देर न लगेगी.
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