पंचायत चुनाव ड्यूटी में शिक्षकों की मौत और उत्तर प्रदेश सरकार

पंचायत चुनाव ड्यूटी में शिक्षकों की मौत और उत्तर प्रदेश सरकार
Yogi Adityanath

अजय कुमार
पंचायत चुनाव ड्यूटी में शिक्षकों की मौत और सरकारउत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी शिक्षक संघ के 1,621 लोगों की मौत पर तो कुछ नहीं कहते हैं, लेकिन वह स्थापित मानकों की बात करते हुए शिक्षक संगठनों के दावों के विपरीत चुनाव ड्यूटी के दौरान सिर्फ तीन शिक्षकों की मौत की बात कह रहे है.

पंचायत चुनाव सम्पन्न होने के बाद लोगों के बीच इसकी खुमारी भी उतर चुकी हैं. विजयी प्रत्याशियों ने कामकाज संभाल लिया है, वहीं पराजित हुए उम्मीदवार हार के गम को भूलकर आगे बढ़ने में लगे हैं. यदि पंचायत चुनाव को कोई नहीं भूल पा रहा है तो वह लोग जिन्होंने इस चुनाव में अपनों को खोया है. इसमें चुनाव लड़ने वाले नेता और उनको लड़वाने वाले उनके समर्थकों के अलावा वह लोग भी हैं जिनका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं था.

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यह लोग सरकारी अधिकारीध्कर्मचारीध्शिक्षक और पुलिस कर्मी थे, जिन्हें पंचायत चुनाव की ड्यूटी पर लगाया गया था. ड्यूटी के दौरान ही इनकी कोरोना या अन्य स्वास्थ्य कारणों से मौत हो गई थी. ऐसे लोगों की संख्या पूछी जाए तो इसका जवाब अलग-अलग है. योगी सरकार कहती है कि चुनाव ड्यूटी के दौरान मात्र तीन सरकारी कर्मचारियों की मौत हुई है जबकि शिक्षक संघों का कहना है कि प्रदेश में हाल में हुए उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले 1,621 शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अन्य विभागीय कर्मियों की कोरोना से मौत हुई है. अतः प्रत्येक मृतक के परिजन को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा राशि और आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए.

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उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी शिक्षक संघ के 1,621 लोगों की मौत पर तो कुछ नहीं कहते हैं, लेकिन वह स्थापित मानकों की बात करते हुए शिक्षक संगठनों के दावों के विपरीत चुनाव ड्यूटी के दौरान सिर्फ तीन शिक्षकों की मौत की बात कह रहे है. वहीं बेसिक शिक्षा विभाग के सचिव सत्य प्रकाश की तरफ से जारी प्रेस नोट में भी मतगणना में लगे कर्मचारियों के निवास से ड्यूटी स्थल तक पहुंचने और फिर ड्यूटी समाप्त कर वापस घर पहुंचने के दौरान 3 कर्मचारियों की मौत की बात कही गई है. मृतक के परिजन को अनुग्रह राशि का भुगतान किए जाने का आश्वासन भी दिया गया है. बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा, शिक्षक संघ ने जो सूची दी है उनमें शामिल सभी लोगों की मौत को चुनाव ड्यूटी के दौरान हुई मौत नहीं माना जा सकता क्योंकि हमारे पास इसके लिए कोई निर्धारित पैमाना नहीं है. इसके अलावा हमारे पास इसका कोई ऑडिट भी नहीं है. कोई यह कैसे बता सकता है कि वे कब संक्रमित हुए.

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प्राथमिक शिक्षक विभाग की तरफ जारी प्रेस नोट से नाराज शिक्षक संघ के नेता इंसाफ नहीं मिलने पर आंदोलन की बात कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा कह रहे हैं कि उन्होंने 16 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर बता दिया है कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में पंचायत चुनावों ड्यूटी करने वाले 1,621 शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षा मित्रों और कर्मचारियों की कोरोना वायरस संक्रमण से मौत हुई थी. पत्र के साथ एक सूची भी संलग्न की गई है जिसके मुताबिक आजमगढ़ जिले में सबसे ज्यादा 68 शिक्षकों-कर्मचारियों की मृत्यु हुई है. प्रदेश में 23 ऐसे जिले हैं, जहां 25 से अधिक शिक्षकों-कर्मचारियों की संक्रमण से मौत हुई थी. शिक्षक संघ चाहता है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप इन सभी मृत शिक्षकोंध्शिक्षामित्रों तथा अन्य कर्मचारियों के परिजन को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए.

इस बीच, उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने शिक्षक मित्रों की मौत का अलग आंकड़ा देते हुए बताया कि पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले कम से कम 200 शिक्षामित्रों के अलावा 107 अनुदेशकों और 100 से ज्यादा रसोइयों की भी कोरोना संक्रमण के कारण मौत हुई थी. योगी सरकार अगर निष्पक्ष तरीके से मौत की पड़ताल कराए तो यह संख्या काफी ज्यादा हो सकती है.

प्राथमिक शिक्षक संघ ने आरोप लगाया है कि सरकार पंचायत चुनाव ड्यूटी करने या उसके कुछ ही दिनों बाद मरने वाले शिक्षकों और अन्य कर्मियों को मुआवजा देने में दांवपेच कर रही है. सरकार के शासनादेश की भाषा इस तरह लिखी गई है जिससे बहुत बड़ी संख्या में पात्र परिजन इस मुआवजे से वंचित रह जाएंगे. सभी जानते हैं कि कोविड-19 के लक्षण 24 घंटे में ही नजर नहीं आते बल्कि उनके सामने आने में कुछ दिनों का समय लगता है लेकिन सरकार ने अपने शासनादेश में कहा है कि पंचायत चुनाव ड्यूटी करने के 24 घंटे के अंदर जिन कर्मचारियों की मृत्यु होगी उनके परिजन को ही मुआवजा दिया जाएगा. यह सरासर अन्याय है और सरकार को संवेदनशील तरीके से सोच कर निर्णय लेना चाहिए. (यह लेखक के निजी विचार हैं.)

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