मौसम ,लॉकडाउन ने तोड़ी सब्जी किसानों की कमर ,अब टिड्डियों का खौफ
बस्ती (भाब). मौसम की मार, लॉकडाउन और लोगो की घटती क्रय शक्ति ने सब्जी किसानों की कमर तोड दी है. इस मौसम में बिकने वाली सब्जियों के भाव इतने गिर चुके है कि किसानों की लागत तक निकलना मुश्किल हो गया है. किसान अब इसको लेकर परेशान है कि उनके तैयार फसल का दाम उन्हें कैसे मिले. हालत तो यह हे कि कुछ किसानों ने फसल का सही दाम न मिलने और लगातार सिचाई और खाद की लागत तक न निकलने के कारण सब्जी की खेती नष्ट कर रहे है.वही किसानों पर टिड्डियों का खौफ भी मड़रा रहा है उनका कहना है यदि टिड्डियों के दल ने इधर का रूख किया तो फिर उनकी हालत क्या होगी यह स्वयं समझा जा सकता है .प्रकृति और लॉकडाउन की मार सह रहे किसान अब टिड्डियों के खौफ से परेशान है.
बहादुरपुर ब्लाक के पिपरा गौतम के सोहन सोनकर स्नातक है. बेरोजगारी से जूझने के बाद सब्जी की खेती कर परिवार का भरण पोषण कर रहे थे. इस बार सोहन ने मिर्च, खीरा, लौकी ,बोडा, की खेती किया. फसल के तैयार होते ही लांक डाउन लग गया. जिससे उन्हे इसे बेचने में काफी दिक्कत का सामना करना पडा रही सही कसर मौसम ने पूरी कर दी. सोहन बताते है कि लॉकडाउन के पहले चरण में तैयार सब्जियो को बेचने में खासी दिक्कत का सामना करना पडा.
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मंडी न खुलने के कारण हमें सब्जियो को शहर के कुछ एक छोटे व्यापारियों को औने पौने दामों पर बेच देना पडता था. लेकिन दूसरे चरण के लॉकडाउन में जब हमे इसे बेचने की छूट मिली तो बाजार में सब्जियों के भाव लगातार गिरने के कारण लागत तक निकलना मुश्किल हो गया. अब भी हालत यह है कि 10 रूपये में तीन लौकी, 10 रूपये किलो बोड़ा बेचना पड़ रहा है जो कि सामान्य दिनों में 40 रूपये किलो बिक जाता था. बताते हैं कि मिर्च की खेती में उन्हे सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है इसी के चलते वह इसकी तुड़ाई सिंचाई करना बंद चुके है जिससे वह सूख रही हैं.
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यह भी पढ़ें: कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार: मेट्रो टनल तैयार, यात्रियों को जल्द मिलेगी सुविधाबहरहाल सब्जी किसानों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है. उनकी माली हालत पहले ही खराब थी अब तो उनके समक्ष परिवार चलाना तो दूर लागत निकालना मुश्किल हो गया है. किसानों की माली हालत सुधारने की सरकारी दावे हवा हवाई है और किसान बदहाली के दौर से गुजर रहा है.
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