बस्ती नगर पालिका का विस्तार कब तक? अब लग रहीं ये अटकलें
सीमा विस्तार की चर्चा से बस्ती के गांवों में सवाल
अधिकारियों के अनुसार, मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद संशोधन, नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े दावे व आपत्तियां बड़ी संख्या में प्राप्त हुईं. लाखों आवेदनों की जांच और सत्यापन के कारण पूरी प्रक्रिया का कैलेंडर आगे बढ़ा है. इसी वजह से चुनाव तिथियों पर अनिश्चितता बनी हुई है.
पंचायत चुनाव में हो रही अनिश्चितता की सबसे बड़ी वजह पिछड़ा वर्ग आरक्षण की प्रक्रिया को माना जा रहा है. चुनाव से पहले आरक्षण तय करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन जरूरी होता है. आयोग बनने के बाद सर्वे किया जाता है और रिपोर्ट के आधार पर सीटों का आरक्षण तय होता है.
सरकार ने High Court में दिए हलफनामे में कहा है कि पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन जल्द किया जाएगा. आयोग बनने के बाद सर्वे और रिपोर्ट की प्रक्रिया पूरी होगी, फिर आरक्षण फाइनल किया जाएगा. इसके बाद ही चुनाव की आगे की कार्रवाई शुरू हो सकेगी.
इधर बस्ती में सीमा विस्तार को लेकर भी चर्चा है. नगर पालिका अध्यक्ष नेहा वर्मा और उनके प्रतिनिधि अंकुर वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी. मुलाकात के बाद नेहा वर्मा ने पत्रकारों से कहा था कि गांवों के बस्ती नगर पालिका में विलय पर चर्चा हुई है और जल्द निर्णय का आश्वासन मिला है.
ऐसे में प्रस्तावित विलय वाले गांवों के निवासियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि पंचायत चुनाव में देरी होती है या सीमा विस्तार होता है, तो उनके यहां मतदान की स्थिति क्या होगी. स्थानीय स्तर पर लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रशासनिक फैसलों का चुनावी प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा.
वर्ष 2026 में पंचायत चुनाव, 2027 में विधानसभा चुनाव और 2028 में नगर पालिका चुनाव प्रस्तावित हैं. अगर सीमा विस्तार की प्रक्रिया तेज होती है, तो संबंधित गांवों की चुनावी स्थिति में बदलाव संभव है. फिलहाल आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम का इंतजार किया जा रहा है, जिससे तस्वीर साफ हो सके.
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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है