बस्ती में ‘टंकी’ बनी सिर्फ कागज़ों पर? जल विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप

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बस्ती में ‘टंकी’ बनी सिर्फ कागज़ों पर? जल विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप
बस्ती में ‘टंकी’ बनी सिर्फ कागज़ों पर? जल विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप

बस्ती: उत्तर प्रदेश में स्थित बस्ती जिले में पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सरकारी योजनाओं पर भारी बजट खर्च होने के बाद भी कई गांवों में लोगों को पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इन गांवों में घरों के सामने पाइपलाइन और नल तो लगे हैं, लेकिन सप्लाई ठप पड़ी है.

हरदिया गांव में उठे गड़बड़ी के आरोप

पूरा मामला सदर ब्लॉक के हरदिया गांव से जुड़ा बताया जा रहा है. आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2015-16 में निर्मल योजना के अंतर्गत लगभग 2.15 करोड़ रुपये की लागत से यहां एक पानी टंकी परियोजना स्वीकृत हुई थी. कागजों में इसे पूर्ण दिखाया गया, मगर ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में शुरुआत से ही गुणवत्ता की कमी थी.


कुछ वर्षों बाद, यानी 2019-20 में, उसी स्थान के लिए दोबारा बजट जारी किया गया और दूसरी टंकी बनाए जाने का दावा किया गया. लेकिन गांव में रहने वाले लोगों का कहना है कि दूसरी टंकी जमीन पर कहीं दिखाई ही नहीं देती. उनका आरोप है कि केवल सूचना बोर्ड लगाकर काम पूरा कर दिया गया.

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पहली संरचना भी नहीं टिक पाई

ग्रामीण बताते हैं कि जो पहली टंकी खड़ी की गई थी, वह ज्यादा दिन तक सही हालत में नहीं रही. उसमें जल्द ही लीकेज की समस्या आने लगी. बाद में वह ढांचा भी हटा दिया गया, जिससे अब मौके पर कोई स्थायी टंकी मौजूद नहीं है. इस पूरी प्रक्रिया ने परियोजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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रोजाना की जिंदगी पर असर

पेयजल सुविधा ठप होने से गांव के लोगों की परेशानी बढ़ गई है. महिलाओं और बुजुर्गों को दूर के स्रोतों से पानी लाना पड़ता है. कई परिवारों को सुबह-शाम लंबी कतारों में लगना पड़ता है. गर्मियों में हालात और भी कठिन हो जाते हैं, जब पानी की मांग बढ़ जाती है.

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अधिकारियों की प्रतिक्रिया

जब जल निगम के अधिशासी अभियंता योगेंद्र प्रसाद से इस विषय में जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने तत्काल प्रतिक्रिया देने से बचते हुए बाद में विवरण देने की बात कही. उनके इस रुख से ग्रामीणों में असंतोष देखा जा रहा है.

निष्पक्ष जांच की उठी मांग

गांव के निवासियों का कहना है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए जिससे यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी धन कहां और कैसे खर्च हुआ. लोगों की मांग है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।