जागते रहो: अपनों से अपनों के लिए डर लेकर आया कोरोना

जागते रहो: अपनों से अपनों के लिए डर लेकर आया कोरोना
Migrant Laborers

-अनूप मिश्रा- बस्ती (Basti News). कोरोना महामारी रिश्तों की नयी परिभाषा गढ रहा है. पहले गांवों में जहां लोग बाहर से कमा कर आते तो उन्हें लेने के लिए गांव के ही कुछ युवा स्टेशनों पर पहुंच जाते थे. घर आते समय रास्ते भर लोगों से मिलना-जुलना लगा रहता था. घर पहुंचते ही घर से लेकर पड़ोस के बच्चे तक घेर लेते थे की कुछ खाने को मिलेगा. कोरोना महामारी ने इस परिस्थिति को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है. अब कमा कर आने वालों को लेने दूसरे तो छोड़िए अपने घर के लोग भी नहीं जा रह है. मिलने- जुलने वाले नजरें चुराकर रास्ते से हट जा रहे है. ऐसे में अपनों से अपनों के डर के माहौल में लोगों को जीने की आदत डालनी पड़ रही है. बाहर से आने वालों को प्रशासन स्टेशन पर थर्मल स्कैनर से जांच कर 21 दिन के लिए होम क्वारंटीन होने का निर्देश देकर उन्हें घरों को भेज दे रहा है.

ये लोग जब अपने घरों की ओर जा रहे हैं तब इन्हें दूसरी मुसीबतों से जूझना पड़ रहा है. घर वाले दबी जुबान से इन्हें घर से बाहर रहने के लिए बोल रहें हैं तो गांव के लोग बीमारी के खतरे से बचने के लिए इन्हें गांव से बाहर रहने की हिदायत दे रहे है. ऐसे में जब ये लोग गांव के प्रधान से लगायत अधिकारियों से क्वारंटीन होने के लिए जगह देने की गुहार लगा रहे हैं तो इन्हें निराशा हाथ लग रही है.

सबसे ज्यादा मुसीबत उन गरीबों को झेलनी पड़ रही है जिनके पास घर के नाम पर महज एक- दो कमरों का मकान या फूस की झोपड़ी भर है. ऐसे में इनके सामने खाने और रहने जैसी की परेशानी खड़ी हो रही है. प्रधान बाहर से आने वालों की जिम्मेदारी लेने से कतरा रहे है. घर में इतनी सुविधाएं नहीं जिससे ये होम क्वारंटीन की शर्तों को पूरा कर सकें. उस पर तुर्रा ये की होम क्वारंटीन तोड़ने पर मुकदमा अलग से झेलना पड़ रहा है. कोरोना आपदा में जान बचाकर बाहर से मुसीबत झेलकर किसी तरह अपनों के बीच आये लोगों की हालत न घर की न घाट की है.

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चोरी-डकैती के पुराने दिनों की यादें हुई ताजा- कोरोना महामारी के बीच बाहर से आये लोगों की निगहबानी के लिए कई गांवों से लोगों के रतजगा करने की खबरें आ रही है. इनका कहना है की क्वारंटीन हुए लोग रात में मौका देखकर अपने घर चले जाते है. जिससे परिवार के जरिए गांव के अन्य लोगों में ये रोग फैलने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे लोगों की निगरानी के लिए गांव के कुछ लोग बाकायदा जागत रहो की तर्ज पर रतजगा करने लगे है.

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कोरोना महामारी में प्रशासन से लेकर बाहर से आने वाले मजदूरों के सामने नयी तरह की समस्याएं खड़ी हो रही है. सामाजिक संरचना रोज बन और बिगड़ रही है. तो अपने ही अपनों को शक की निगाह से देख रहे है. भगवान भरोसे चल रही व्यवस्था के बीच जिन्दा रहने के लिए लोग खुद से लड़ रहे है.

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