जागते रहो: अपनों से अपनों के लिए डर लेकर आया कोरोना
ये लोग जब अपने घरों की ओर जा रहे हैं तब इन्हें दूसरी मुसीबतों से जूझना पड़ रहा है. घर वाले दबी जुबान से इन्हें घर से बाहर रहने के लिए बोल रहें हैं तो गांव के लोग बीमारी के खतरे से बचने के लिए इन्हें गांव से बाहर रहने की हिदायत दे रहे है. ऐसे में जब ये लोग गांव के प्रधान से लगायत अधिकारियों से क्वारंटीन होने के लिए जगह देने की गुहार लगा रहे हैं तो इन्हें निराशा हाथ लग रही है.
सबसे ज्यादा मुसीबत उन गरीबों को झेलनी पड़ रही है जिनके पास घर के नाम पर महज एक- दो कमरों का मकान या फूस की झोपड़ी भर है. ऐसे में इनके सामने खाने और रहने जैसी की परेशानी खड़ी हो रही है. प्रधान बाहर से आने वालों की जिम्मेदारी लेने से कतरा रहे है. घर में इतनी सुविधाएं नहीं जिससे ये होम क्वारंटीन की शर्तों को पूरा कर सकें. उस पर तुर्रा ये की होम क्वारंटीन तोड़ने पर मुकदमा अलग से झेलना पड़ रहा है. कोरोना आपदा में जान बचाकर बाहर से मुसीबत झेलकर किसी तरह अपनों के बीच आये लोगों की हालत न घर की न घाट की है.
चोरी-डकैती के पुराने दिनों की यादें हुई ताजा- कोरोना महामारी के बीच बाहर से आये लोगों की निगहबानी के लिए कई गांवों से लोगों के रतजगा करने की खबरें आ रही है. इनका कहना है की क्वारंटीन हुए लोग रात में मौका देखकर अपने घर चले जाते है. जिससे परिवार के जरिए गांव के अन्य लोगों में ये रोग फैलने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे लोगों की निगरानी के लिए गांव के कुछ लोग बाकायदा जागत रहो की तर्ज पर रतजगा करने लगे है.
यह भी पढ़ें: कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार: मेट्रो टनल तैयार, यात्रियों को जल्द मिलेगी सुविधाकोरोना महामारी में प्रशासन से लेकर बाहर से आने वाले मजदूरों के सामने नयी तरह की समस्याएं खड़ी हो रही है. सामाजिक संरचना रोज बन और बिगड़ रही है. तो अपने ही अपनों को शक की निगाह से देख रहे है. भगवान भरोसे चल रही व्यवस्था के बीच जिन्दा रहने के लिए लोग खुद से लड़ रहे है.
ताजा खबरें
About The Author
भारतीय बस्ती, बस्ती और अयोध्या से प्रकाशित होने वाला प्रमुख समाचार पत्र है. इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग भारतीय बस्ती के संवाददाताओं द्वारा ज़मीनी स्तर पर की गई है