बेंगलुरु से बस्ती के लिए चली ट्रेन पहुंच गई दिल्ली, भूख-प्यास से यात्री हलकान
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार बस्ती जाने वाली ट्रेन गुरुवार को शाम 6.45 बजे बेंगलुरु के चिक्काबनावारा स्टेशन से रवाना हुई. मजदूरों को शनिवार रात घर पहुंचना था, 2,456 किलोमीटर की यात्रा के लिए उन्होंने 1,020 रुपये (875 ट्रेन किराया और 145 बस किराया) खर्च किया. निर्धारित मार्ग सिकंदराबाद, नागपुर, इटारसी (एमपी), झांसी, कानपुर और लखनऊ था. यात्रा में 45 घंटे लगते हैं. हालांकि, ट्रेन को झांसी से डायवर्ट किया गया और यात्रियों ने कहा शनिवार शाम करीब 7 बजे गाजियाबाद पहुंची.
बेंगलुरु से चली ट्रेन को किया गया डायवर्ट
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने कहा कि श्रामिक ट्रेनों का 80% हिस्सा यूपी और बिहार में जाता है. ऐसे में इस पर भीड़ बहुत होती है जिस वजह से डाईवर्जन जरूरी है. रिपोर्ट के अनुसार यात्रियों ने कहा कि उन्हें डाईवर्जन के बारे में नहीं बताया गया था. एक यात्री ने अखिलेश चौहान ने कहा, ‘शुक्रवार की रात नागपुर स्टेशन को पार करने के बाद से हमने खाना नहीं खाया है. रेलवे पटरियों के करीब रहने वाले लोग पीने के लिए बाल्टी में पानी लाते रहे हैं. हम शनिवार रात तक पहुँचने वाले थे.’ लगभग 50 प्रवासियों के लिए टिकटों की व्यवस्था करने में मदद करने वाले नरेंद्र कुमार ने कहा- ‘मुझे फोन आया कि ट्रेन को डायवर्ट किया जा रहा है. उन्होंने 20 घंटे तक खाना नहीं खाया और यह नहीं जानते कि ट्रेन गंतव्य तक पहुंचेगी या नहीं.’
रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने कहा कि यूपी में भारी भीड़ के कारण कई ट्रेनों को डायवर्ट किया जा रहा है. जब बेंगलुरु के मंडल रेल प्रबंधक अशोक कुमार वर्मा को इसकी जानकारी दी गई तो उन्होंने अपने समकक्ष से बात की और यात्रियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की गई.
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