बस्ती में 9,000 कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए बदला गया प्रोटोकॉल
बस्तीः जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में कुपोषित बच्चों का इलाज कोविड प्रोटोकाल के तहत किया जाएगा. वहां भर्ती बच्चे खेल नहीं सकेंगे, अभिभावकों को बेड पर ही अस्पताल स्टॉफ परामर्श मुहैया कराएगा. कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखी जाएगी. महानिदेशक परिवार कल्याण उत्तर प्रदेश की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रदेश में कुपोषण एक गंभीर समस्या है.
अति कुपोषित बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उनके जल्द बीमार होने या मृत्यु तक का खतरा सामान्य बच्चों से ज्यादा होता है. प्रदेश में इस समय फैली कोविड-19 बीमारी से अति कुपोषित बच्चों में संक्रमण का खतरा ज्यादा है. इस गंभीर समस्या को देखते हुए शासन ने एनआरसी में दी जाने वाले इलाज की सुविधा को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की श्रेणी में रखा है. स्वास्थ्य विभाग ने कुछ दिशा-निर्देश के साथ एनआरसी को संचालित करने के लिए निर्देशित किया है. महानिदेशक की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि एनआरसी में मिल रही सेवाओं की निरंतरता बनाए रखी जाए तथा वहां आने वाले बच्चों को भर्ती कर उनका इलाज शुरू कराया जाए.
जब तक कोविड-19 के संक्रमण का जोखिम है, तब तक समूह प्रदर्शन, खेल-चिकित्सा, खाना पकाने का प्रदर्शन सहित अन्य गतिविधियां जिससे संक्रमण फैलने का खतरा है, स्थगित रहेंगी. बच्चे अपने अभिभावकों के साथ बेड पर ही रहेंगे तथा स्टॉफ व्यक्तिगत रूप से उनके बेड के पास जाकर बेड-साइड परामर्श देगा. पत्र में यह भी कहा गया है कि समुदाय में चिन्ह्ति अति कुपोषित बच्चों को आशा या आंगनबाड़ी वर्कर अनुश्रवण के लिए पहले ब्लॉक के अस्पताल या करीबी हेल्थ वेलनेस सेंटर पर लाया जाएगा. यहां पर परीक्षण के बाद यह निर्धारित किया जाएगा कि बच्चे को एनआरसी रेफर करना है कि नहीं.
यह भी पढ़ें: बस्ती में जमीन कब्जे का आरोप, दिव्यांग ने एसपी से लगाई गुहार, डॉक्टर पर लगाए गंभीर आरोपजिले में हैं नौ हजार अति कुपोषित बच्चे
जिले में लगभग नौ हजार अति कुपोषित बच्चे हैं. इनमें से ज्यादातर ऐसे हैं, जिन्हें तत्काल एनआरसी में भर्ती कराकर इलाज कराए जाने की जरूरत है. कोरोना संक्रमण काल के दौरान अभी तक बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराए जाने की प्रक्रिया स्थगित थी. आंगनबाड़ी वर्कर द्वारा केवल घर-घर पहुंचकर जरूरतमंदों में आहार का वितरण किया जा रहा था. अब जबकि लॉकडाउन में काफी ढ़ील हो चुकी है तो स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभाग के कार्यक्रमों में गतिविधियां तेज हुई हैं. अति कुपोषित बच्चों का इलाज भी जल्द शुरू होगा.
बस्ती में 9,000 कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए बदला गया प्रोटोकॉल
बस्तीः जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में कुपोषित बच्चों का इलाज कोविड प्रोटोकाल के तहत किया जाएगा. वहां भर्ती बच्चे खेल नहीं सकेंगे, अभिभावकों को बेड पर ही अस्पताल स्टॉफ परामर्श मुहैया कराएगा. कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखी जाएगी. महानिदेशक परिवार कल्याण उत्तर प्रदेश की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रदेश में कुपोषण एक गंभीर समस्या है.
अति कुपोषित बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उनके जल्द बीमार होने या मृत्यु तक का खतरा सामान्य बच्चों से ज्यादा होता है. प्रदेश में इस समय फैली कोविड-19 बीमारी से अति कुपोषित बच्चों में संक्रमण का खतरा ज्यादा है. इस गंभीर समस्या को देखते हुए शासन ने एनआरसी में दी जाने वाले इलाज की सुविधा को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की श्रेणी में रखा है. स्वास्थ्य विभाग ने कुछ दिशा-निर्देश के साथ एनआरसी को संचालित करने के लिए निर्देशित किया है. महानिदेशक की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि एनआरसी में मिल रही सेवाओं की निरंतरता बनाए रखी जाए तथा वहां आने वाले बच्चों को भर्ती कर उनका इलाज शुरू कराया जाए.
जब तक कोविड-19 के संक्रमण का जोखिम है, तब तक समूह प्रदर्शन, खेल-चिकित्सा, खाना पकाने का प्रदर्शन सहित अन्य गतिविधियां जिससे संक्रमण फैलने का खतरा है, स्थगित रहेंगी. बच्चे अपने अभिभावकों के साथ बेड पर ही रहेंगे तथा स्टॉफ व्यक्तिगत रूप से उनके बेड के पास जाकर बेड-साइड परामर्श देगा. पत्र में यह भी कहा गया है कि समुदाय में चिन्ह्ति अति कुपोषित बच्चों को आशा या आंगनबाड़ी वर्कर अनुश्रवण के लिए पहले ब्लॉक के अस्पताल या करीबी हेल्थ वेलनेस सेंटर पर लाया जाएगा. यहां पर परीक्षण के बाद यह निर्धारित किया जाएगा कि बच्चे को एनआरसी रेफर करना है कि नहीं.
जिले में हैं नौ हजार अति कुपोषित बच्चे
जिले में लगभग नौ हजार अति कुपोषित बच्चे हैं. इनमें से ज्यादातर ऐसे हैं, जिन्हें तत्काल एनआरसी में भर्ती कराकर इलाज कराए जाने की जरूरत है. कोरोना संक्रमण काल के दौरान अभी तक बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराए जाने की प्रक्रिया स्थगित थी. आंगनबाड़ी वर्कर द्वारा केवल घर-घर पहुंचकर जरूरतमंदों में आहार का वितरण किया जा रहा था. अब जबकि लॉकडाउन में काफी ढ़ील हो चुकी है तो स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभाग के कार्यक्रमों में गतिविधियां तेज हुई हैं. अति कुपोषित बच्चों का इलाज भी जल्द शुरू होगा.
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