नल नहीं छूने दे रहे लोग, लॉकडाउन में लौटे लोगों का कुआनों बनी सहारा

नल नहीं छूने दे रहे लोग, लॉकडाउन में लौटे लोगों का कुआनों बनी सहारा
Kuano River Basti (File Photo)

-जितेंद्र कौशल सिंह-बस्ती (भाब). लॉक डाउन में जीवन भले ठहर गया है, लेकिन प्रकृति मुस्कुरा रही है. प्रदूषण से कराह रही जीवन रेखा कही जाने वाली नदियों का जल काला नहीं बल्कि स्वच्छ और निर्मल हो गया है. अब पहले जैसे न कूड़ा करकट और न ही शैवाल दिखाई पड़ रहे हैं. नदियों की स्वच्छ जलधारा की मनोरम छटां अब दिखाई देने लगी है. वैश्विक महामारी कोरोना संकट के चलते हुए लॉक डाउन ने प्रकृति को फिर से अपने पुरातन स्वरूप में ला दिया है. न हवा में घुलता जहर और न ही कल कारखानो के चलते नदियों में प्रदूषण . जिले में बहने वाली कुआनों हो, मनोरमा या फिर सरयू की जलधारा वह स्वच्छ निर्मल हो चली है.

प्रदूषण से कराह रही नदियों का पुरातन अस्तित्व वापस लाने की कवायदे भले ही उसे उसका पुराना स्वरूप वापस न दिला पाई, लेकिन कोरोना संकट के लॉक डाउन ने उसे अपना स्वरूप वापस पाने का अवसर दे दिया. आम जनजीवन भले ही लॉक डाउन के बीच ठहरी जिंदगी से परेशान है, लेकिन प्रकृति के पास मुस्कुराने की वजह मिल गई है. तिल- तिल कर मर रही ‘सर्वेश्वर’ की कुआनों की निर्मल जलधारा का मनोरम दृश्य आने जाने वालो को लुभा रहा है. लोगो के मुंह से बेखास्ता निकल रहा है कि अरे ! यह वहीं कुआनों है जो काला पड़ गई थी.

बस्ती डुमरियागंज रोड पर भीषण सड़क हादसा, 3 गंभीर रूप से घायल

यूपी के इस जिले में किसानों के खेतों में बनेंगे प्लेडज पार्क, 1% ब्याज पर मिलेगा ऋण यह भी पढ़ें: यूपी के इस जिले में किसानों के खेतों में बनेंगे प्लेडज पार्क, 1% ब्याज पर मिलेगा ऋण

योगी सरकार का चुनावी साल का बजट पेश, क्या बदलेगी विकास की रफ्तार? यह भी पढ़ें: योगी सरकार का चुनावी साल का बजट पेश, क्या बदलेगी विकास की रफ्तार?

किसी कवि की यह लाइने ‘भाव का परिधान मैला हो गया है, जिस नदी का जल सदा अमृत लगा था उस नदी का जल विषैला हो गया है’ अब बीते दिनों की बात हो गई है. दो माह के भीतर ही वातावरण में आए बदलाव के चलते जीवनरेखा कही जाने वाली नदियां एक बार फिर से प्रकृति का सुखद अहसास करा रही है. नदियों का यह बदलाव किसी भगीरथ प्रयास से नहीं बल्कि प्रकृति में घुलते जहर के न फैलने से हुआ है.

कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार: मेट्रो टनल तैयार, यात्रियों को जल्द मिलेगी सुविधा यह भी पढ़ें: कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार: मेट्रो टनल तैयार, यात्रियों को जल्द मिलेगी सुविधा

इस बदलाव को देखकर प्रकृति मंद मंद मुस्करा रही है. साफ मौसम, पक्षियों के कलरव और नदियों की स्वच्छ निर्मल धारा ने वातावरण को पूरी तरह शुद्ध कर दिया है. अन्य प्रदेशो से वापस आ रहे श्रमिक वैश्विक बीमारी कोराना के चलते नहाने के लिए नदियों का सहारा ले रहे है उनका कहना है कि वे गांव पहुंच भी गये तो उन्हे कोई अपना नल प्रयोग नहीं करने देगा. महाराष्ट्र राज्य के पुणे से बस्ती पहुंचें श्रमिक अपनी थकान मिटाने के लिए कुआनों में स्नान कर रहे हैं .महसों के प्रमोद ने बताया कि गांव पहुचने पर 21 दिनो के लिए घर से बाहर ही रहना है जहां नहाने के लिए भी समस्या होगी. हम लोग कहा नहायेंगे ऐसे में नदी ही सबसे बेहतर लगा ,जहां कोई रोक टोक तो नही है.

वहीं पिपरा गौतम के पाथरभीर में महाराष्ट्र के मलाड में शटरिंग का काम कर रहे योगेन्द्र, सिब्बड सहित 15 श्रमिक कुआनों के किनारे पालीथीन तान कर रह रहे है. उनकी जीवनचर्या कुआनों किनारे पर ही चल रही है,वह कहते है कि यहां हमें कोई रोक टोक तो नही है हम नदी में स्नान आदि कर रहे है जबकि गांव में हम नल भी छू ले तो लोग भडक जाते है. अब हम यही कुआनों के किनारे बड़े सकून से अपना समय बिता रहे है. उनका कहना है कि हमें नदी के किनारे गांव से ज्यादा अच्छा लग रहा है.

On

About The Author

Bhartiya Basti Picture

भारतीय बस्ती, बस्ती और अयोध्या से प्रकाशित होने वाला प्रमुख समाचार पत्र है. इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग भारतीय बस्ती के संवाददाताओं द्वारा ज़मीनी स्तर पर की गई है