बस्ती गैंगस्टर एक्ट केस में 19 साल बाद फैसला, दो आरोपियों को मिली राहत
वर्ष 2007 में दर्ज गैंगस्टर एक्ट और चोरी के एक चर्चित मामले में बस्ती की फास्ट ट्रैक कोर्ट विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) ने अपना फैसला सुनाया. इसमें दा आरोपियों को राहत मिल गई. विशेष सत्र परीक्षण संख्या 108/2008 में न्यायालय ने इम्तियाज उर्फ पियाजू पुत्र अब्दुल हमीद निवासी छपिया छितैना थाना दुधारा, जनपद संतकबीरनगर तथा शमी उर्फ शम्मू पुत्र शौकत अली (दौरान मुकदमा उपशामित) निवासी टेमा रहमत थाना मुंडेरवा, जनपद संतकबीर नगर के विरुद्ध दर्ज मुकदमे की सुनवाई पूरी करते हुए निर्णय दिया.
मामला अपराध संख्या 284/2007 से संबंधित था, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 379, 411 तथा उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत आरोप लगाए गए थे. अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक शासकीय अधिवक्ता राम प्रकाश दुबे ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विवेक श्रीवास्तव ने दलीलें और साक्ष्य प्रस्तुत किए .
करीब 19 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान तथा दोनों पक्षों की दलीलों का गहन परीक्षण किया. सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाते हुए मामले का निस्तारण कर दिया. दो आरोपियो को राहत मिल गई.
बस्ती गैंगस्टर एक्ट केस में 19 साल बाद फैसला, दो आरोपियों को मिली राहत
वर्ष 2007 में दर्ज गैंगस्टर एक्ट और चोरी के एक चर्चित मामले में बस्ती की फास्ट ट्रैक कोर्ट विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) ने अपना फैसला सुनाया. इसमें दा आरोपियों को राहत मिल गई. विशेष सत्र परीक्षण संख्या 108/2008 में न्यायालय ने इम्तियाज उर्फ पियाजू पुत्र अब्दुल हमीद निवासी छपिया छितैना थाना दुधारा, जनपद संतकबीरनगर तथा शमी उर्फ शम्मू पुत्र शौकत अली (दौरान मुकदमा उपशामित) निवासी टेमा रहमत थाना मुंडेरवा, जनपद संतकबीर नगर के विरुद्ध दर्ज मुकदमे की सुनवाई पूरी करते हुए निर्णय दिया.
मामला अपराध संख्या 284/2007 से संबंधित था, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 379, 411 तथा उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत आरोप लगाए गए थे. अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक शासकीय अधिवक्ता राम प्रकाश दुबे ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विवेक श्रीवास्तव ने दलीलें और साक्ष्य प्रस्तुत किए .
करीब 19 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान तथा दोनों पक्षों की दलीलों का गहन परीक्षण किया. सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाते हुए मामले का निस्तारण कर दिया. दो आरोपियो को राहत मिल गई.
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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है