कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में मशरूम उत्पादन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न
उन्होंने कहा कि मशरूम उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, युवाओं, किसानों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का अच्छा माध्यम है. यह प्रशिक्षण आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा और टिकाऊ कृषि की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है. प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न विकास खंडों से 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया.
केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ पी के मिश्रा ने बताया कि मशरूम उत्पादन कम लागत, कम जगह और कम समय में अधिक लाभ देने वाला उद्यम है. बदलती खान-पान की आदतों और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे यह स्वरोजगार का अच्छा विकल्प बन गया है.
यह भी पढ़ें: यूपी पंचायत सफाई कर्मचारी संघ का द्विवार्षिक अधिवेशन 11 जनवरी से, चुनाव प्रक्रिया घोषितउन्होंने बताया कि जिले के 14 विकास खंडों में मशरूम की खेती तेजी से बढ़ रही है. हर्रैया, कप्तानगंज, बस्ती सदर और दुबौलिया क्षेत्र मशरूम उत्पादन के हब के रूप में उभर रहे हैं.
प्रशिक्षण के कोर्स कोऑर्डिनेटर एवं पौध सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ प्रेम शंकर ने कहा कि मशरूम उत्पादन संवेदनशील लेकिन लाभकारी कार्य है, जिसमें स्वच्छता और रोग प्रबंधन का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. उन्होंने ग्रीन मोल्ड, ब्लैक मोल्ड और बैक्टीरियल ब्लॉच जैसी बीमारियों की पहचान और बचाव के उपाय सरल भाषा में बताए. साथ ही रासायनिक दवाओं के कम उपयोग और स्वच्छता आधारित उपाय अपनाने पर जोर दिया.
पादप प्रजनन एवं अनुवांशिकी वैज्ञानिक डॉ वी बी सिंह ने बताया कि मशरूम उत्पादन में अच्छी और शुद्ध किस्म के स्पॉन का चयन सबसे जरूरी है. प्रमाणित स्रोत से स्पॉन लेने पर उत्पादन बेहतर होता है और रोग का खतरा कम रहता है.
गृह विज्ञान वैज्ञानिक डॉ अंजलि वर्मा ने कहा कि मशरूम पोषण की दृष्टि से बहुत उपयोगी है. इसमें प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्व भरपूर होते हैं. उन्होंने बताया कि मशरूम के प्रसंस्करण और व्यंजन निर्माण से महिलाएं और स्वयं सहायता समूह अतिरिक्त आय कमा सकते हैं.
शस्य वैज्ञानिक हरिओम मिश्रा ने कहा कि मशरूम उत्पादन फसल विविधीकरण का अच्छा तरीका है. धान के पुआल और गेहूं के भूसे जैसे कृषि अपशिष्टों से कम लागत में मशरूम उगाया जा सकता है. वैज्ञानिक विधि अपनाकर साल भर उत्पादन संभव है.
प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और फल-सब्जी के पौधे वितरित किए गए. कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कृषि विज्ञान केंद्र भविष्य में तकनीकी मार्गदर्शन, परामर्श और सरकारी योजनाओं से जोड़कर उद्यम स्थापना में सहयोग करेगा.
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