खेती किसानी पर भी कोरोना का खौफ, खरीफ की तैयारियों में जुटे किसान
-कन्हैया सिंह-
बस्ती (भाब). जनपद में खरीफ फसल की तैयारी जोरों पर है, दूसरी तरफ कोरोना वायरस से भयभीत किसान मार्च में ही सोचने लगे थे कि कही खेती का कार्य प्रभावित न हो लेकिन केन्द्र और राज्य सरकार के नीतिगत निर्णय के कारण किसान मार्च में गेहूं कटने के बाद हरी खाद की बोआई जैसे कि ढेचा के साथ ही तिल, मूंग व गर्मी में तैयार होने वाली सब्जी की खेती भी अतिरूचि के साथ तैयार किया और जहां एक तरफ लाकडाउन के कारण सस्ती और स्वास्थ्यवर्धक सब्जी बस्ती जनपद के किसानों ने न सिर्फ अपने लिए तैयार किया अपितु पूरे जनमानस के लिए उपलब्ध कराया.
गेहूं, दलहन, तिलहन तथा गन्ना आदि फसल के कटाई के बाद खेतों को पुनः तैयार कर भीषण लाकडाउन में गन्ने का पौधरोपड़ करना, गेहूं के खेतों में हरी खाद को तैयार करना तथा अब जून महीने में धान, तिल, उर्द, अरहर सहित अनेकों फसलों को तैयार करने में लगा है. इस बार प्रकृति ने भी मौसम के प्रति रहम वर्ता तेज ठंड गर्म का संतुलन बनाये रखा. ज्यादा समय में धान तैयार होने वाले मुख्यतः काला नमक, मसूरी आदि महंगे किस्म के धान कम समय के साथ साथ खेतो के तैयारी में लगा है. गन्ने की गुड़ाई निराई का काम चल रहा है. कई किसानों से सम्पर्क करने पर पता चला है कि गन्ने में ऩाईट्रोजन (यूरिया) का प्रयोग बरसात होने के पहले करना चाहिए अन्यथा बारिस में यूरिया डालने के बाद बरसात और हवाओं के कारण गन्ना गिर जाता है, जिससे वजन प्रभावित होता है साथ ही चीनी के उत्पादन की मात्रा को भी प्रभावित करता है.
प्रगतिशील किसान तुलसी राम, प्रमात्मा, विवेक, लल्लू, राजबहादुर, पारस, धर्मराज सहित आदि किसानों ने कहा कि सरकार बिजली की निरंतरता कटौती को रोकने का प्रयास करे अन्यथा एक ही खेत में पानी चलता रहता है अन्य फसले सूखती रहती है. किसानों का कहना है कि सरकार के तरफ से कोई समस्या नहीं है परन्तु फसल बिक्री के लिए बिचैलिए कही न कही प्रभावित करते है. एक तरफ से किसान के लिए सरकारें रास्ता निकालती है दूसरी तरफ सरकारी कर्मचारियों के मिलीभगत से किसानों का हक प्रभावित करने के लिए कोई न कोई रास्ता निकाल लेते है उनका इतन भय व्याप्त है कि सरकार से उनके खिलाफ कार्यवाही करने की मांग किया है.
खेती किसानी पर भी कोरोना का खौफ, खरीफ की तैयारियों में जुटे किसान
-कन्हैया सिंह-
बस्ती (भाब). जनपद में खरीफ फसल की तैयारी जोरों पर है, दूसरी तरफ कोरोना वायरस से भयभीत किसान मार्च में ही सोचने लगे थे कि कही खेती का कार्य प्रभावित न हो लेकिन केन्द्र और राज्य सरकार के नीतिगत निर्णय के कारण किसान मार्च में गेहूं कटने के बाद हरी खाद की बोआई जैसे कि ढेचा के साथ ही तिल, मूंग व गर्मी में तैयार होने वाली सब्जी की खेती भी अतिरूचि के साथ तैयार किया और जहां एक तरफ लाकडाउन के कारण सस्ती और स्वास्थ्यवर्धक सब्जी बस्ती जनपद के किसानों ने न सिर्फ अपने लिए तैयार किया अपितु पूरे जनमानस के लिए उपलब्ध कराया.
गेहूं, दलहन, तिलहन तथा गन्ना आदि फसल के कटाई के बाद खेतों को पुनः तैयार कर भीषण लाकडाउन में गन्ने का पौधरोपड़ करना, गेहूं के खेतों में हरी खाद को तैयार करना तथा अब जून महीने में धान, तिल, उर्द, अरहर सहित अनेकों फसलों को तैयार करने में लगा है. इस बार प्रकृति ने भी मौसम के प्रति रहम वर्ता तेज ठंड गर्म का संतुलन बनाये रखा. ज्यादा समय में धान तैयार होने वाले मुख्यतः काला नमक, मसूरी आदि महंगे किस्म के धान कम समय के साथ साथ खेतो के तैयारी में लगा है. गन्ने की गुड़ाई निराई का काम चल रहा है. कई किसानों से सम्पर्क करने पर पता चला है कि गन्ने में ऩाईट्रोजन (यूरिया) का प्रयोग बरसात होने के पहले करना चाहिए अन्यथा बारिस में यूरिया डालने के बाद बरसात और हवाओं के कारण गन्ना गिर जाता है, जिससे वजन प्रभावित होता है साथ ही चीनी के उत्पादन की मात्रा को भी प्रभावित करता है.
प्रगतिशील किसान तुलसी राम, प्रमात्मा, विवेक, लल्लू, राजबहादुर, पारस, धर्मराज सहित आदि किसानों ने कहा कि सरकार बिजली की निरंतरता कटौती को रोकने का प्रयास करे अन्यथा एक ही खेत में पानी चलता रहता है अन्य फसले सूखती रहती है. किसानों का कहना है कि सरकार के तरफ से कोई समस्या नहीं है परन्तु फसल बिक्री के लिए बिचैलिए कही न कही प्रभावित करते है. एक तरफ से किसान के लिए सरकारें रास्ता निकालती है दूसरी तरफ सरकारी कर्मचारियों के मिलीभगत से किसानों का हक प्रभावित करने के लिए कोई न कोई रास्ता निकाल लेते है उनका इतन भय व्याप्त है कि सरकार से उनके खिलाफ कार्यवाही करने की मांग किया है.
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