बस्ती: खुलेंगे दीवानी व परिवार न्यायालय, जानें किन मामलों की कैसे होगी सुनवाई
-एडवोकेट अरुण कुमार श्रीवास्तव-
बस्ती. उत्तर प्रदेश स्थित बस्ती में जनपद न्यायालय में अब दीवानी प्रकृति के आवश्यक मामलों व परिवार न्यायालय से सम्बन्धित मामलों की भी सुनवाई होगी. हाईकोर्ट इलाहाबाद ने 22 मई से सिविल कोर्ट व परिवार न्यायालय को भी क्रियाशील किये जाने का आदेश जारी कर दिया है. साथ ही फौजादरी न्यायालय को वाहन रिलीज जैसे अन्य आवश्यक प्रार्थना की सुनवाई की अनुमति प्रदान कर दिया है. बताते चलें कि कोरोना संकट के वजह से बन्द चल रहे न्यायिक अधिष्ठान में 8 मई से फौजदारी के आवश्यक प्रकृति के मामलों की सुनाई वर्चुअल कोर्ट के माध्यम से चल रही थी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के साथ ही दीवनी प्रकृति के मामलों में भी वादकारियों को राहत देने के उददेष्य से नये सिरे से गाइड लाइन जारी किया है जिसके अनुसार 22 मई से सत्र न्यायाधीश, प्रधान न्यायधीश परिवार न्यायालय, विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट, विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट,विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट, विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर एक्ट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज प्रवर खण्ड,सिविल जज अवर खण्ड बस्ती व सिचिल जज अवर खण्ड खलीलाबाद के न्यायालय कार्य करेंगे.
इसमें पहले से लंबित व नवीन मामलों का एडमिशन, लंबित व नये आवश्यक निषेधाज्ञा प्रार्थना पत्र, लंबित व नये जमानत प्रार्थना पत्र, लंबित व नवीन अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र, वाहन रिलीज प्रार्थना पत्र , पुलिस की अन्तिम रिपोर्ट, व विवेचना अधिकारी द्वारा गैर जमानती वारंट लेने सीआरपीसी की धारा 82 व 83 के प्रार्थना पत्र व धारा 164 के तहत बयान दर्ज करने से सम्बन्धित कार्य किये जायेंगे. बन्दियों सम्बन्धित रिमाध्ड कायै वीडियों कान्फ्रेसिंग के माध्यम से होंगे.
इस बात की जानकारी देते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुंवर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने बताया कि सभी प्रार्थना पत्र कम्पयुटर केन्द्र में दाखिल किये जायेंगे. प्रार्थना पत्रों को पंजीकृत किया जायेगा. सुवनाई हेतु जिला जज ज्ञानप्रकाश तिवारी के आदेश पर सभी न्यायालयों को अलग-अलग समय दिया जायेगा. इस दौरान परिसर में अधिवक्ताओं के साथ न्यायालय में उन वादकारियों को भी प्रवेश मिलेगा जिनके मामले की सुनवाई होनी है. यदि कोई वादकारी बीमार है तो उसे न्यायालय परिसर में प्रवेश नहीं दिया जायेगा. न्यायालय कक्ष में अधिवक्ताओं हेतृ केवल कुर्सिया नियत दूरी पर रखी जायेंगी.
यह भी पढ़ें: Basti News: सपा सांसद आवास घेराव में गरजीं भाजपा महिला कार्यकर्ता, महिला सम्मान के मुद्दे पर विपक्ष को घेरान्यायालय कक्ष में प्रवेश करने वाले व्यक्ति को मास्क पहनना अनिवार्य होगा. जिला जज ने संक्रमण से बचाव के लिए भी दिशा-निर्देश देते हुए क्हा कि सभी न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, व कर्मचारी वायरस के प्राटोकाल के तहत सामाजिक दूरी बनाते हुए मास्क, सेनेटाईजर व दस्ताने का प्रयोग करे. सोषल डिस्टेंसिंग का पालन सभी को करना होगा.परिसर में प्रवेश करते समय सभी का थ्रमल स्कैनिंग किया जायेगा. न्यायिक कार्यवाही शुरु होने के पहले व उसके बाद न्यायालय कक्षों एवं परिसर को सेनेटाईज कराया जाय.
यह भी पढ़ें: 22 मई से कोर्ट खुलने की परमिशन, जिला जज बोले- वकील चाहें तो लग सकती है वर्चुअल कोर्ट
बस्ती: खुलेंगे दीवानी व परिवार न्यायालय, जानें किन मामलों की कैसे होगी सुनवाई
-एडवोकेट अरुण कुमार श्रीवास्तव-
बस्ती. उत्तर प्रदेश स्थित बस्ती में जनपद न्यायालय में अब दीवानी प्रकृति के आवश्यक मामलों व परिवार न्यायालय से सम्बन्धित मामलों की भी सुनवाई होगी. हाईकोर्ट इलाहाबाद ने 22 मई से सिविल कोर्ट व परिवार न्यायालय को भी क्रियाशील किये जाने का आदेश जारी कर दिया है. साथ ही फौजादरी न्यायालय को वाहन रिलीज जैसे अन्य आवश्यक प्रार्थना की सुनवाई की अनुमति प्रदान कर दिया है. बताते चलें कि कोरोना संकट के वजह से बन्द चल रहे न्यायिक अधिष्ठान में 8 मई से फौजदारी के आवश्यक प्रकृति के मामलों की सुनाई वर्चुअल कोर्ट के माध्यम से चल रही थी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के साथ ही दीवनी प्रकृति के मामलों में भी वादकारियों को राहत देने के उददेष्य से नये सिरे से गाइड लाइन जारी किया है जिसके अनुसार 22 मई से सत्र न्यायाधीश, प्रधान न्यायधीश परिवार न्यायालय, विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट, विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट,विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट, विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर एक्ट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज प्रवर खण्ड,सिविल जज अवर खण्ड बस्ती व सिचिल जज अवर खण्ड खलीलाबाद के न्यायालय कार्य करेंगे.
इसमें पहले से लंबित व नवीन मामलों का एडमिशन, लंबित व नये आवश्यक निषेधाज्ञा प्रार्थना पत्र, लंबित व नये जमानत प्रार्थना पत्र, लंबित व नवीन अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र, वाहन रिलीज प्रार्थना पत्र , पुलिस की अन्तिम रिपोर्ट, व विवेचना अधिकारी द्वारा गैर जमानती वारंट लेने सीआरपीसी की धारा 82 व 83 के प्रार्थना पत्र व धारा 164 के तहत बयान दर्ज करने से सम्बन्धित कार्य किये जायेंगे. बन्दियों सम्बन्धित रिमाध्ड कायै वीडियों कान्फ्रेसिंग के माध्यम से होंगे.
इस बात की जानकारी देते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुंवर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने बताया कि सभी प्रार्थना पत्र कम्पयुटर केन्द्र में दाखिल किये जायेंगे. प्रार्थना पत्रों को पंजीकृत किया जायेगा. सुवनाई हेतु जिला जज ज्ञानप्रकाश तिवारी के आदेश पर सभी न्यायालयों को अलग-अलग समय दिया जायेगा. इस दौरान परिसर में अधिवक्ताओं के साथ न्यायालय में उन वादकारियों को भी प्रवेश मिलेगा जिनके मामले की सुनवाई होनी है. यदि कोई वादकारी बीमार है तो उसे न्यायालय परिसर में प्रवेश नहीं दिया जायेगा. न्यायालय कक्ष में अधिवक्ताओं हेतृ केवल कुर्सिया नियत दूरी पर रखी जायेंगी.
न्यायालय कक्ष में प्रवेश करने वाले व्यक्ति को मास्क पहनना अनिवार्य होगा. जिला जज ने संक्रमण से बचाव के लिए भी दिशा-निर्देश देते हुए क्हा कि सभी न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, व कर्मचारी वायरस के प्राटोकाल के तहत सामाजिक दूरी बनाते हुए मास्क, सेनेटाईजर व दस्ताने का प्रयोग करे. सोषल डिस्टेंसिंग का पालन सभी को करना होगा.परिसर में प्रवेश करते समय सभी का थ्रमल स्कैनिंग किया जायेगा. न्यायिक कार्यवाही शुरु होने के पहले व उसके बाद न्यायालय कक्षों एवं परिसर को सेनेटाईज कराया जाय.
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