बस्ती: एसआई अजय गोंड की मौत डूबने से, फॉरेंसिक जांच में पुष्टि

बाइक और मोबाइल बरामद, आरोपी गिरफ्तार

बस्ती: एसआई अजय गोंड की मौत डूबने से, फॉरेंसिक जांच में पुष्टि
बस्ती: एसआई अजय गोंड की मौत डूबने से, फॉरेंसिक जांच में पुष्टि

जनपद बस्ती में पुलिस उपनिरीक्षक अजय गोंड की मौत के मामले में जांच के बाद अहम जानकारी सामने आई है. पुलिस के अनुसार, उनकी मृत्यु डूबने से हुई.

पुलिस ने बताया कि 8 फरवरी को सरयू नदी, थाना छावनी क्षेत्र से उपनिरीक्षक का शव बरामद हुआ था. घटना के बाद परिजनों ने साजिश की आशंका जताई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रेट की निगरानी में पंचायतनामा तैयार कराया गया और तीन डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया, जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई.

जांच के दौरान उपनिरीक्षक की बाइक अमहट घाट के पास मिली थी. पुलिस ने उस व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसने सरयू नदी पुल से बाइक हटाई थी. पूछताछ में सामने आया कि उसने बाइक में रखे दो मोबाइल फोन अलग-अलग स्थानों पर बेच दिए थे. पुलिस ने सरकारी और निजी दोनों मोबाइल फोन बरामद कर लिए हैं.

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया था, इसलिए डॉक्टरों द्वारा सुरक्षित रखे गए शरीर के नमूने का परीक्षण कराया गया. रिपोर्ट में किसी भी प्रकार के रासायनिक विष के संकेत नहीं मिले.

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इसके बाद AIIMS Gorakhpur के डॉक्टरों से मेडिको-लीगल राय ली गई, जिसमें डूबने से मौत की संभावना जताई गई. पुलिस ने आगे फॉरेंसिक जांच के तहत डायटम टेस्ट भी कराया. डायटम टेस्ट की रिपोर्ट में भी डूबने से मृत्यु होने की पुष्टि हुई है.

इसके अलावा, घाट पर मौजूद कुछ मछुआरों ने बयान में कहा कि उन्होंने उपनिरीक्षक को नदी में कूदते हुए देखा था. पुलिस ने इन बयानों को भी जांच का हिस्सा बनाया है.

पुलिस का कहना है कि सभी रिपोर्टों और साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि उपनिरीक्षक की मृत्यु डूबने से हुई. मामले में अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है.

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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है