बस्ती में 200 रुपये की वसूली पड़ी भारी, टोल प्लाजा को देना होगा 2.45 लाख रुपये जुर्माना
फास्टैग सही होने के बावजूद अधिवक्ता से ली गई नकद वसूली
बस्ती जिले में टोल प्लाजा को लेकर लंबे समय से लोगों में नाराजगी बनी हुई है. जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की ओर से कई बार मांग उठ चुकी है कि जनपद के लोगों से टोल टैक्स न लिया जाए. हाल ही में दिए गए 4 सूत्रीय ज्ञापन में भी कहा गया था कि टोल की संख्या और व्यवस्था की समीक्षा की जाए और आम जनता को राहत दी जाए. साथ ही हर्रैया टोल प्लाजा पर शुल्क को 50 प्रतिशत तक कम करने की मांग भी थी. इन सबके बीच अब एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने टोल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
4 नवंबर 2024 को हुआ था पूरा मामला
यह मामला बस्ती जिले के कप्तानगंज क्षेत्र के रहने वाले अधिवक्ता विजय कुमार त्रिपाठी से जुड़ा है. 4 नवंबर 2024 को वह अपनी बेटी की पढ़ाई से जुड़े काम के लिए कार से अयोध्या जा रहे थे. रास्ते में जब वह हर्रैया टोल प्लाजा पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने उनसे टोल टैक्स देने के लिए कहा. विजय ने खुद को स्थानीय निवासी बताते हुए अपना आधार कार्ड और पता दिखाया, लेकिन कर्मचारियों ने उनकी बात नहीं मानी और टोल देने पर ही जोर देते रहे.
फास्टैग को लेकर बढ़ा विवाद
विजय कुमार त्रिपाठी ने जब फास्टैग से भुगतान करने की बात कही तो टोल कर्मचारियों ने कहा कि उनका फास्टैग काम नहीं कर रहा है. इसके बाद कर्मचारियों ने उन पर दोगुना शुल्क देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. इस दौरान उनके साथ सही व्यवहार भी नहीं किया गया, जिससे विवाद और बढ़ गया. विजय को जल्दी थी, इसलिए उन्होंने ज्यादा बहस करने के बजाय 200 रुपये नकद देकर वहां से आगे बढ़ना ही सही समझा और अयोध्या के लिए रवाना हो गए.
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जब विजय कुमार त्रिपाठी अपना काम पूरा करके वापस लौट रहे थे, तब रास्ते में उनके फास्टैग से 100 रुपये अपने आप कट गए. इससे साफ हो गया कि उनका फास्टैग बिल्कुल सही था और उसमें पर्याप्त बैलेंस भी मौजूद था. यानी टोल कर्मचारियों ने गलत जानकारी देकर उनसे नकद वसूली की थी.
यह भी पढ़ें: Basti News: सेन्ट्रल एकेडमी में परीक्षाफल का वितरण, मेधावियों को पुरस्कृत कर बढाया हौसलाउपभोक्ता आयोग में पहुंचा मामला
इस पूरे मामले को लेकर विजय कुमार त्रिपाठी ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई. आयोग में सुनवाई के दौरान सभी सबूतों को ध्यान से देखा गया और दोनों पक्षों की बात सुनी गई. जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने जांच के बाद पाया कि 4 नवंबर 2024 को टोल प्लाजा पर जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह गलत था. अधिवक्ता को जानबूझकर परेशान किया गया और उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया.
यह भी पढ़ें: Basti News: प्रधानों, प्रधानाध्यापकों के समन्वय से सुधरी परिषदीय स्कूलों की दशा - महेश शुक्लआयोग ने सुनाया सख्त फैसला
मामले में आयोग ने टोल प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हुए सख्त आदेश दिए हैं. आयोग ने कहा कि विजय कुमार त्रिपाठी को 2 लाख 45 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए. इसके अलावा जो 100 रुपये गलत तरीके से वसूले गए थे, उन्हें ब्याज सहित वापस किया जाए. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर 45 दिनों के भीतर यह भुगतान नहीं किया गया तो इस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा.
बस्ती में 200 रुपये की वसूली पड़ी भारी, टोल प्लाजा को देना होगा 2.45 लाख रुपये जुर्माना
फास्टैग सही होने के बावजूद अधिवक्ता से ली गई नकद वसूली
बस्ती जिले में टोल प्लाजा को लेकर लंबे समय से लोगों में नाराजगी बनी हुई है. जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की ओर से कई बार मांग उठ चुकी है कि जनपद के लोगों से टोल टैक्स न लिया जाए. हाल ही में दिए गए 4 सूत्रीय ज्ञापन में भी कहा गया था कि टोल की संख्या और व्यवस्था की समीक्षा की जाए और आम जनता को राहत दी जाए. साथ ही हर्रैया टोल प्लाजा पर शुल्क को 50 प्रतिशत तक कम करने की मांग भी थी. इन सबके बीच अब एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने टोल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
4 नवंबर 2024 को हुआ था पूरा मामला
यह मामला बस्ती जिले के कप्तानगंज क्षेत्र के रहने वाले अधिवक्ता विजय कुमार त्रिपाठी से जुड़ा है. 4 नवंबर 2024 को वह अपनी बेटी की पढ़ाई से जुड़े काम के लिए कार से अयोध्या जा रहे थे. रास्ते में जब वह हर्रैया टोल प्लाजा पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने उनसे टोल टैक्स देने के लिए कहा. विजय ने खुद को स्थानीय निवासी बताते हुए अपना आधार कार्ड और पता दिखाया, लेकिन कर्मचारियों ने उनकी बात नहीं मानी और टोल देने पर ही जोर देते रहे.
फास्टैग को लेकर बढ़ा विवाद
विजय कुमार त्रिपाठी ने जब फास्टैग से भुगतान करने की बात कही तो टोल कर्मचारियों ने कहा कि उनका फास्टैग काम नहीं कर रहा है. इसके बाद कर्मचारियों ने उन पर दोगुना शुल्क देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. इस दौरान उनके साथ सही व्यवहार भी नहीं किया गया, जिससे विवाद और बढ़ गया. विजय को जल्दी थी, इसलिए उन्होंने ज्यादा बहस करने के बजाय 200 रुपये नकद देकर वहां से आगे बढ़ना ही सही समझा और अयोध्या के लिए रवाना हो गए.
वापसी में सामने आई सच्चाई
जब विजय कुमार त्रिपाठी अपना काम पूरा करके वापस लौट रहे थे, तब रास्ते में उनके फास्टैग से 100 रुपये अपने आप कट गए. इससे साफ हो गया कि उनका फास्टैग बिल्कुल सही था और उसमें पर्याप्त बैलेंस भी मौजूद था. यानी टोल कर्मचारियों ने गलत जानकारी देकर उनसे नकद वसूली की थी.
उपभोक्ता आयोग में पहुंचा मामला
इस पूरे मामले को लेकर विजय कुमार त्रिपाठी ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई. आयोग में सुनवाई के दौरान सभी सबूतों को ध्यान से देखा गया और दोनों पक्षों की बात सुनी गई. जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने जांच के बाद पाया कि 4 नवंबर 2024 को टोल प्लाजा पर जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह गलत था. अधिवक्ता को जानबूझकर परेशान किया गया और उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया.
आयोग ने सुनाया सख्त फैसला
मामले में आयोग ने टोल प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हुए सख्त आदेश दिए हैं. आयोग ने कहा कि विजय कुमार त्रिपाठी को 2 लाख 45 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए. इसके अलावा जो 100 रुपये गलत तरीके से वसूले गए थे, उन्हें ब्याज सहित वापस किया जाए. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर 45 दिनों के भीतर यह भुगतान नहीं किया गया तो इस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।