नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयन्ती की पर याद किये गये आजाद हिन्द फौज के सेनानी रामू उपाध्याय
कहा कि ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ के आवाहन पर सैकड़ो लोग एकत्र हो गये. बस्ती जनपद के फेटवा निवासी रामू उपाध्याय इसी संकल्प को लेकर नेताजी से जुडे. संयोग ही है कि दोनों महापुरूषों की जयंती एक ही दिन है.
अध्यक्षता करते हुये बटुकनाथ शुक्ल ने नेताजी के योगदान पर विस्तार से चर्चा करते हुये कहा कि उन्होने कठिन समय में देश को जो मार्ग दिखाया आजादी उसी का प्रतिफल है. ऐसे महापुरूषों को सदैव याद किये जाने की जरूरत है. पं. चन्द्रबली मिश्र ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और उनके सहयोगी रामू उपाध्याय के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुये कहा कि नयी पीढी को ऐसे बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिये. नेताजी का योगदान युगों तक याद किया जायेगा.
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सागर गोरखपुरी, डा. राजेन्द्र सिंह ‘राही’ अजीत श्रीवास्तव ‘राज’, संजीव पाण्डेय, बालकृष्ण चौधरी एडवोकेट, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, सामईन फारूकी, राहुल कुमार चौहान, दीपक सिंह प्रेमी, दीनानाथ यादव, गणेश, अजमत अली सिद्दीकी सहित उपस्थित लोगों ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और रामू उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके योगदान को रेखांकित किया.
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