बस्ती में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सिर्फ तस्वीरों में, प्रशासन नियम पालन कराने में नाकाम!
इन दुकानदारों का कहना है कि शराब से पहले तो चाय, होटलों का दुकान खुलवाना था लेकिन ऐसा न करने से सरकार के ऊपर उंगलियां उठना शुरू होंगी कि क्या शराब की दुकान ही पहले जरूरी थी? क्या लोग शराब के सहारे ही जीते है तो सरकार को शराब भी बंटवाया जाना आवश्यक है
चाय, मिठाई आदि की दुकानों के न खुलने से दूध का कारोबार करने वालों के आगे भी संकट खड़ा हो गया है. दुकान नहीं खुल रहे हैं और उनके दूध का खपत कम हो जाने से उन्हें सही दाम नहीं मिल पा रहा है. वहीं कपड़े का कारोबार बन्द होने से गर्मी के कपड़े बेचने का इंतजार कर रहे कपड़ा व्यवसायियों को छूट न मिलने से वे परेशान तो हैं ही और जिनलोगों को आवश्यकता है वह भी संकट से गुजर रहे हैं.
यह भी पढ़ें: बस्ती फोरलेन अटका: अमहट से प्लास्टिक कॉम्प्लेक्स तक सड़क प्रस्ताव लंबित, भदेश्वर नाथ मंदिर को भी मिलेगा लाभऐसे में इन दुकानो के न खुलने से न जाने कितने लोगो का रोजगार बन्द हो गया और बहुतों की नौकरी छूट गयी. सरकार इन व्यवसायियों को दुकान खुलने की छूट न दी गयी तो न जाने कितने बेरोजगार हो जायेगें. ऐसे में मौसम का साथ न देना लोगों के लिए दुर्भाग्य पूर्ण है कि किसान भी अपनी फसल को लेकर जूझ रहा है कि बेमौसम बारिस के बार-बार होने से फसल बर्बाद हो रहे हैं.
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