भागमभाग के दौर में बेदम समय
खुलने लगे हैं शहर आओ मुलाकात करेंगे,
मोबाइल मत लाना यार हम बात करेंगे.
वे पति-पत्नी अब नहीं रहे जो पांच सौ शब्द प्रति मिनट बोलने के बाद कहा करते—मेरा मुंह मत खुलवाओ. अब तो बस मोबाइल ही खुले हैं. वे भी क्या जायकेदार दिन थे जब घड़ी सिर्फ पापा के हाथ पर होती थी और समय पूरे परिवार के पास हुआ करता. सबके चेहरों पर सुकून हुआ करता. अब सबने समय को मु_ी में लेकर मोबाइल पकड़ लिया है. चेहरों पर उदासियां यूं चिपक गई हैं जैसे किसी ने गोंद लगाकर लिफाफा बंद कर दिया हो.
यह भी पढ़ें: Aaj Ka Rashifal 8 January 2026: वृषभ, कन्या, मकर, मेष, मिथुन,कुंभ, मीन, वृश्चिक, सिंह,कर्क, तुला,धनु का आज का राशिफलअगर बात टाइम की करें तो स्कूल जाने के टाइम पर जो पेट दर्द हुआ करता, उसका इलाज किसी डॉक्टर के पास नहीं है. अलार्म बन्द करने के बाद जो चैन की नींद आती है, उसका कोई मुकाबला नहीं है.
ऐसा नहीं है कि सिर्फ अपनों और सपनों के लिये टाइम नहीं बचा है, अब तो समय न अखबार के लिये है, न प्यार के लिये है. सब के सब सुपरसोनिक स्पीड के युग में जी रहे हैं. भागमभाग मची है. उम्र भर की यादें एक उंगली से डिलीट हो जाती हैं. दोनों हाथों में अखबार को खोलकर पढऩे में ऐसा अनुभव होता था कि मानो अपने छोटे से बच्चे को हथेलियों से उठा रखा है. अब तो सब उस पायदान पर चढ़ चुके हैं जहां खुद को देखने का भी किसी के पास समय नहीं है. बस वही दिख रहा है जो मोबाइल दिखा रहा है.
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