यूपी में अब सिर्फ फसल नहीं बिजली भी उत्पादित करेंगे किसान, खरीदेगा विद्युत विभाग, जानें- पूरा प्लान
UP Solar Bijli Yojna
Solar Bijli Yojna UP: उत्तर प्रदेश में बिजली की खपत अब बढ़ रही है. एसी, कूलर, हीटर, इंडक्शन का बढ़ता इस्तेमाल और सप्लाई पर बढ़ते लोड की वजह से अब सोलर का उपयोग बढ़ रहा है. बढ़ते लोड की वजह से बिजली कटौती, फॉल्ट अब आम बात हो गई है. लेकिन अब किसान भी विद्युत विभाग के लिए बिजली बनाएंगे. यह बात तो तय है कि बिजली की जरूरतें कम नहीं की जा सकती हैं लेकिन सोलर बिजली का इस्तेमाल कर ग्रिड पर बढ़ते दबाव को कम कर सकता है. बिजनौर में तीन किसानों ने सोलर प्लांट के लिए अप्लाई किया है. जिले में साढ़े तीन मेगावाट के सोलर बिजलीघर लग सकते हैं.
किसान खेतों में बिजली पैदा कर विभाग को बेचेंगे और पैसा कमाएंगे. इससे ग्रिड पर पडने वाला लोड भी कम हो रहा है. बिजनौर में ब्लाक हल्दौर में कंभौर, झालू, नांगलजट, सिकंदरी, हल्दौर, कादरपुर, उलेढ़ा, ब्लाक देवमल में फजलपुर, गजरौलाशिव, उमरपुर मीरा, मंडावर, स्वाहेड़ी, जलीलपुर में ककराला, मुस्तफाबाद, पीपलसाना, मसीत, स्याऊ, अलाउद्दीनपुर, नूरपुर में नूरपुर, पैजनियां, फीना, रेहटा बिल्लौच, कोतवाली में कल्याणपुर, अकबराबाद, फुलसंदा, नहटौर में बसावनपुर, कड़ीपुरा, अफजलगढ़ में अफजलगढ़, भिक्कावाला, मानियावाला, वीरभानवाला, स्योहारा में पालनपुर, ताजपुर, ठाटजट, उमरपुर खादर, नजीबाबाद में भागूवाला, बड़िया, चंदक, सौफतपुर, तैमूरपुर, तिसोतरा गांव में सोलर बिजलीघर लग सकता है.
कितना खर्च आएगा?
अगर एक मेगावाट का सोलर प्लांट लगाना है तो इसमें कुल परियोजना लागत- 4.50 करोड़ होगी. वहीं केंद्र सरकार की सब्सिडी, 1.05 करोड़, राज्य सरकार की सब्सिडी, 50 लाख मिलेगी. ऐसे में किसान की लागत, 2.95 करोड़ आएगी. इसके मेंटेनेंस की प्रति वर्ष लागत, 3 लाख होगी. यूपीपीसीएल बिजली 3.10 प्रति यूनिट की दर से खरीदेगी. एक मेगावाट सोलर प्लांट से एक दिन में चार हजार यूनिट तक बिजली उत्पादित हो सकती है. साढ़े तीन मेगावाट सोलर प्लांट से साढ़े तीन हजार घरों को बिजली मिल सकती है. वहीं इसके लिए चार एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी. एक सोलर प्लांट 25 साल तक काम करेगा.
यूपी में अब सिर्फ फसल नहीं बिजली भी उत्पादित करेंगे किसान, खरीदेगा विद्युत विभाग, जानें- पूरा प्लान
UP Solar Bijli Yojna
Solar Bijli Yojna UP: उत्तर प्रदेश में बिजली की खपत अब बढ़ रही है. एसी, कूलर, हीटर, इंडक्शन का बढ़ता इस्तेमाल और सप्लाई पर बढ़ते लोड की वजह से अब सोलर का उपयोग बढ़ रहा है. बढ़ते लोड की वजह से बिजली कटौती, फॉल्ट अब आम बात हो गई है. लेकिन अब किसान भी विद्युत विभाग के लिए बिजली बनाएंगे. यह बात तो तय है कि बिजली की जरूरतें कम नहीं की जा सकती हैं लेकिन सोलर बिजली का इस्तेमाल कर ग्रिड पर बढ़ते दबाव को कम कर सकता है. बिजनौर में तीन किसानों ने सोलर प्लांट के लिए अप्लाई किया है. जिले में साढ़े तीन मेगावाट के सोलर बिजलीघर लग सकते हैं.
किसान खेतों में बिजली पैदा कर विभाग को बेचेंगे और पैसा कमाएंगे. इससे ग्रिड पर पडने वाला लोड भी कम हो रहा है. बिजनौर में ब्लाक हल्दौर में कंभौर, झालू, नांगलजट, सिकंदरी, हल्दौर, कादरपुर, उलेढ़ा, ब्लाक देवमल में फजलपुर, गजरौलाशिव, उमरपुर मीरा, मंडावर, स्वाहेड़ी, जलीलपुर में ककराला, मुस्तफाबाद, पीपलसाना, मसीत, स्याऊ, अलाउद्दीनपुर, नूरपुर में नूरपुर, पैजनियां, फीना, रेहटा बिल्लौच, कोतवाली में कल्याणपुर, अकबराबाद, फुलसंदा, नहटौर में बसावनपुर, कड़ीपुरा, अफजलगढ़ में अफजलगढ़, भिक्कावाला, मानियावाला, वीरभानवाला, स्योहारा में पालनपुर, ताजपुर, ठाटजट, उमरपुर खादर, नजीबाबाद में भागूवाला, बड़िया, चंदक, सौफतपुर, तैमूरपुर, तिसोतरा गांव में सोलर बिजलीघर लग सकता है.
कितना खर्च आएगा?
अगर एक मेगावाट का सोलर प्लांट लगाना है तो इसमें कुल परियोजना लागत- 4.50 करोड़ होगी. वहीं केंद्र सरकार की सब्सिडी, 1.05 करोड़, राज्य सरकार की सब्सिडी, 50 लाख मिलेगी. ऐसे में किसान की लागत, 2.95 करोड़ आएगी. इसके मेंटेनेंस की प्रति वर्ष लागत, 3 लाख होगी. यूपीपीसीएल बिजली 3.10 प्रति यूनिट की दर से खरीदेगी. एक मेगावाट सोलर प्लांट से एक दिन में चार हजार यूनिट तक बिजली उत्पादित हो सकती है. साढ़े तीन मेगावाट सोलर प्लांट से साढ़े तीन हजार घरों को बिजली मिल सकती है. वहीं इसके लिए चार एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी. एक सोलर प्लांट 25 साल तक काम करेगा.
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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है