पाकिस्तान को घेरने की बड़ी रणनीति: 'ऑपरेशन सिंदूर' और सिंधु जल समझौते पर भारत का बड़ा फैसला
इस बीच भारत ने यूनाइटेड नेशंस (संयुक्त राष्ट्र) में पाकिस्तान की दोहरी नीति पर करारा जवाब दिया है। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो देश आतंकवादियों और नागरिकों के बीच फर्क नहीं कर सकता, उसे नागरिकों की सुरक्षा पर बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
भारत ने एक और बड़ा कदम उठाया है — सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को स्थगित करने का फैसला। ये कोई तात्कालिक निर्णय नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था, जिसका मकसद पाकिस्तान को उसके झूठ और धोखे के लिए जवाबदेह बनाना है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथा ने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट किया कि भारत ने 1960 में यह संधि सद्भाव और मित्रता की भावना से की थी। लेकिन बीते 65 वर्षों में पाकिस्तान ने तीन युद्ध थोपे और हजारों आतंकवादी हमले कर भारत की संप्रभुता को चुनौती दी। पिछले चार दशकों में 20,000 से ज्यादा भारतीय नागरिक आतंकवादी हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं। हाल ही में पहलगाम में टूरिस्ट्स पर हुआ हमला इसी कड़ी का ताजा उदाहरण है।
हरीश पर्वथा के मुताबिक, सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतें, साफ ऊर्जा के उत्पादन की आवश्यकता और डैम इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा भी अब भारत के लिए प्राथमिकता हैं। डैम की पुरानी संरचनाएं अब गंभीर सुरक्षा चिंताओं से घिरी हैं। पाकिस्तान बार-बार इन डैमों में ज़रूरी सुधार और तकनीकी बदलावों को रोकता आया है, जबकि ये बदलाव संधि के दायरे में आते हैं।
उन्होंने 2012 में जम्मू-कश्मीर में तुलबल नेविगेशन प्रोजेक्ट पर हुए आतंकी हमले की भी याद दिलाई, जिसमें आतंकियों ने सीधे भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया था। यह दिखाता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के सहारे भारत के जल संसाधनों और नागरिक सुरक्षा को भी निशाना बना रहा है।
पर्वथा ने यह भी बताया कि भारत ने बीते दो वर्षों में कई बार औपचारिक रूप से पाकिस्तान को आमंत्रित किया था कि वे मिलकर संधि में ज़रूरी संशोधन पर चर्चा करें। लेकिन पाकिस्तान ने हर बार इन प्रस्तावों को अस्वीकार किया और बातचीत से इनकार कर दिया।
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान — जो आतंकवाद का वैश्विक केंद्र बन चुका है — सीमा पार आतंकवाद का समर्थन समाप्त नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी। यह भारत की एक निर्णायक और साहसिक नीति का हिस्सा है जो अब यह संकेत दे रही है कि भारत अपनी सहनशीलता की सीमा पार नहीं होने देगा।
भारत ने साफ कहा कि संधि के उल्लंघन का दोष पाकिस्तान पर है, और अब दुनिया को भी यह समझ लेना चाहिए कि पाकिस्तान किस तरह संधि की शर्तों और वैश्विक सुरक्षा के नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है।
आपको बता दें कि इस फैसले से पहले 23 अप्रैल की शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद थे। इसी बैठक के बाद विदेश मंत्रालय ने औपचारिक रूप से घोषणा की कि भारत अब सिंधु जल समझौते पर रोक लगा रहा है।
इस निर्णय के साथ ही भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब वह हर स्तर पर आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार है – चाहे वह कूटनीति हो, वैश्विक मंच हो या जल संसाधनों से जुड़ी रणनीति।