यूपी में इन भवनों पर देना होगा प्रभाव और परमिट शुल्क, सरकार की मंजूरी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

यूपी में इन भवनों पर देना होगा प्रभाव और परमिट शुल्क, सरकार की मंजूरी
यूपी में इन भवनों पर देना होगा प्रभाव और परमिट शुल्क, सरकार की मंजूरी

उत्तर प्रदेश की योगी शासन ने शहरों में बड़े आवासीय और व्यावसायिक भवनों के निर्माण से होने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए प्रभाव शुल्क की वसूली करने का निर्णय लिया है। यह शुल्क विशेष रूप से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और अन्य आवश्यक जनसुविधाओं के विकास में उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, आवासीय और व्यावसायिक निर्माण के दौरान जांच के लिए होने वाले खर्चों के लिए भी परमिट शुल्क की वसूली की जाएगी। यह शुल्क भी जनसुविधाओं के विकास में लगाया जाएगा। इन सभी शुल्कों की वसूली नक्शा पास करते समय की जाएगी, जिससे शहरों में विकास को सुगम बनाया जा सके और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा सकें। 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने कैबिनेट बाईसकुर्लेशन के तहत प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है, जो आवास विभाग द्वारा पहले से निर्धारित शुल्कों की वसूली से संबंधित है। इस संबंध में विकास प्राधिकरणों को स्पष्ट आदेश दिए गए थे कि वे इन शुल्कों की वसूली सुनिश्चित करें। 

हालांकि, कुछ बिल्डरों ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने इस पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे इस प्रक्रिया के लिए एक स्पष्ट नियमावली तैयार करें। अब राज्य सरकार इस आदेश के तहत नियमावली बनाने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि वसूली की प्रक्रिया को सुगम और पारदर्शी बनाया जा सके। 

Uttar Pradesh Weather: बस्ती, गोरखपुर, लखनऊ में तेज आंधी-बारिश की चेतावनी यह भी पढ़ें: Uttar Pradesh Weather: बस्ती, गोरखपुर, लखनऊ में तेज आंधी-बारिश की चेतावनी

उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम 1973 में संशोधन के तहत, धार 15 (2) के अनुसार शुल्क का निर्धारण, उदाहरण और संग्रहण के लिए नियमावली को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस नियमावली के आधार पर, विकास प्राधिकरण शहरों में आवासीय और व्यवसायिक भवनों के निर्माण से उत्पन्न होने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए शुल्क की वसूली करेगा। 

लखनऊ में 7 दिन का मेगा ब्लॉक, कई ट्रेनों के रूट बदले, देखें पूरी लिस्ट यह भी पढ़ें: लखनऊ में 7 दिन का मेगा ब्लॉक, कई ट्रेनों के रूट बदले, देखें पूरी लिस्ट

बड़े भवनों के निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण संबंधित क्षेत्रों में आने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि होती है। इससे सरकारी सुविधाओं का उपयोग भी बढ़ जाता है। इसी कारण से शुल्क लेने की व्यवस्था लागू की गई है। यह राशि मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी, जिसमें खुली जगहों, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास शामिल है। 

उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम के अंतर्गत अब विकास परमिट फीस, भवन परमिट फीस और निरीक्षण फीस वसूली के लिए एक नई नियमावली तैयार की गई है। आवास विभाग ने इस नियमावली को जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके बाद इन शुल्कों की वसूली का कार्य आरंभ होगा। 

इस नियमावली के तहत, विभिन्न प्रकार की फीस के लिए स्पष्ट शुल्क का निर्धारण किया जाएगा, जिससे विकास कार्यों में पारदर्शिता और सुगमता आएगी। यह कदम राज्य में आवास और शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे विकास परियोजनाओं को समय पर मंजूरी मिलने में सहायता मिलेगी। आशा की जा रही है कि इस नई व्यवस्था से न केवल सरकारी प्रक्रियाओं में सुधार होगा, बल्कि नागरिकों को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी। इसके साथ ही, यह नियमावली शहरी विकास के लिए एक ठोस आधार तैयार करेगी, जिससे प्रदेश में विकास की गति तेज होगी।

भारतीय बस्ती
bhartiyabasti.com
21 Jan 2025 By Shobhit Pandey

यूपी में इन भवनों पर देना होगा प्रभाव और परमिट शुल्क, सरकार की मंजूरी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

उत्तर प्रदेश की योगी शासन ने शहरों में बड़े आवासीय और व्यावसायिक भवनों के निर्माण से होने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए प्रभाव शुल्क की वसूली करने का निर्णय लिया है। यह शुल्क विशेष रूप से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और अन्य आवश्यक जनसुविधाओं के विकास में उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, आवासीय और व्यावसायिक निर्माण के दौरान जांच के लिए होने वाले खर्चों के लिए भी परमिट शुल्क की वसूली की जाएगी। यह शुल्क भी जनसुविधाओं के विकास में लगाया जाएगा। इन सभी शुल्कों की वसूली नक्शा पास करते समय की जाएगी, जिससे शहरों में विकास को सुगम बनाया जा सके और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा सकें। 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने कैबिनेट बाईसकुर्लेशन के तहत प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है, जो आवास विभाग द्वारा पहले से निर्धारित शुल्कों की वसूली से संबंधित है। इस संबंध में विकास प्राधिकरणों को स्पष्ट आदेश दिए गए थे कि वे इन शुल्कों की वसूली सुनिश्चित करें। 

हालांकि, कुछ बिल्डरों ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने इस पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे इस प्रक्रिया के लिए एक स्पष्ट नियमावली तैयार करें। अब राज्य सरकार इस आदेश के तहत नियमावली बनाने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि वसूली की प्रक्रिया को सुगम और पारदर्शी बनाया जा सके। 

उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम 1973 में संशोधन के तहत, धार 15 (2) के अनुसार शुल्क का निर्धारण, उदाहरण और संग्रहण के लिए नियमावली को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस नियमावली के आधार पर, विकास प्राधिकरण शहरों में आवासीय और व्यवसायिक भवनों के निर्माण से उत्पन्न होने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए शुल्क की वसूली करेगा। 

बड़े भवनों के निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण संबंधित क्षेत्रों में आने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि होती है। इससे सरकारी सुविधाओं का उपयोग भी बढ़ जाता है। इसी कारण से शुल्क लेने की व्यवस्था लागू की गई है। यह राशि मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी, जिसमें खुली जगहों, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास शामिल है। 

उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम के अंतर्गत अब विकास परमिट फीस, भवन परमिट फीस और निरीक्षण फीस वसूली के लिए एक नई नियमावली तैयार की गई है। आवास विभाग ने इस नियमावली को जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके बाद इन शुल्कों की वसूली का कार्य आरंभ होगा। 

इस नियमावली के तहत, विभिन्न प्रकार की फीस के लिए स्पष्ट शुल्क का निर्धारण किया जाएगा, जिससे विकास कार्यों में पारदर्शिता और सुगमता आएगी। यह कदम राज्य में आवास और शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे विकास परियोजनाओं को समय पर मंजूरी मिलने में सहायता मिलेगी। आशा की जा रही है कि इस नई व्यवस्था से न केवल सरकारी प्रक्रियाओं में सुधार होगा, बल्कि नागरिकों को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी। इसके साथ ही, यह नियमावली शहरी विकास के लिए एक ठोस आधार तैयार करेगी, जिससे प्रदेश में विकास की गति तेज होगी।

https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/impact-and-permit-will-have-to-be-given-on-these/article-17285
On

About The Author

Shobhit Pandey Picture

शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।