गोरखपुर से इस रूट के एक्स्प्रेसवे के लिए 60 से ज्यादा गांवों में होगा भूमि अधिग्रहण!

गोरखपुर-शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे

गोरखपुर से इस रूट के एक्स्प्रेसवे के लिए 60 से ज्यादा गांवों में होगा भूमि अधिग्रहण!
गोरखपुर से इस रूट के एक्स्प्रेसवे के लिए 60 से ज्यादा गांवों में होगा भूमि अधिग्रहण!

उत्तर प्रदेश: पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना अब तेजी से जमीन पर उतरती दिख रही है. प्रदेश में स्थित गोरखपुर-शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. जिन इलाकों से प्रस्तावित मार्ग गुजरने वाला है, वहां जमीन के दामों में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिल रहा है. पहले भूमि अधिग्रहण में सामने आ चुकी गड़बड़ियों को ध्यान में रखते हुए अधिकारी इस बार बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं.

परियोजना को लेकर प्रशासन अलर्ट

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बरेली, पीलीभीत और लखीमपुर के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चयनित गांवों में भू-परिवर्तन के मामलों की सावधानी से जांच की जाए.
इस एक्सप्रेस-वे का उद्देश्य करीब 700 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के जरिए पूर्वी यूपी को पश्चिमी क्षेत्र से सीधा सड़क संपर्क देना है, जिससे यात्रा समय कम होगा और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी.


जिले में पहला एक्सप्रेस-वे

बरेली में अभी तक 2 राष्ट्रीय राजमार्ग जरूर हैं, लेकिन एक्सप्रेस-वे का यह पहला बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है. प्रस्तावित मार्ग जिले की नवाबगंज और बहेड़ी तहसीलों से होकर गुजरेगा. दोनों तहसील क्षेत्रों के 34-34 गांव इस परियोजना में आएंगे. भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया संभालने के लिए सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति कर दी गई है और बरेली में यह जिम्मेदारी भूमि अध्याप्ति अधिकारी को सौंपी गई है.

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इन जिलों से होकर गुजरेगा मार्ग

योजना के अनुसार यह ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे गोरखपुर से शुरू होकर बस्ती, अयोध्या, लखनऊ, सीतापुर और लखीमपुर होते हुए पीलीभीत के बीसलपुर मार्ग से बरेली पहुंचेगा. इसके बाद यह रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर और मेरठ से गुजरते हुए शामली तक जाएगा. विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी देश दीपक सिंह ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि बरेली में इसका ट्रैक नवाबगंज और बहेड़ी तहसील क्षेत्रों से ही निकलेगा.

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नक्शा लगभग तय, जमीन पर सर्वे जारी

अधिकारियों के अनुसार गूगल मैप के आधार पर एक्सप्रेस-वे का प्रारंभिक नक्शा लगभग तैयार कर लिया गया है. हालांकि अभी यह तय होना बाकी है कि सड़क किस-किस गाटा नंबर से होकर गुजरेगी. इसी वजह से मौके पर विस्तृत सर्वे कराया जा रहा है. एनएचएआई ने राजस्व विभाग को फिर से पत्र भेजकर कहा है कि चयनित गांवों में भूमि उपयोग परिवर्तन के मामलों में विशेष सावधानी बरती जाए.

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भू-परिवर्तन के नियम क्या कहते हैं प्रदेश में कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक उपयोग में बदलने के लिए धारा 143 (उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950) अहम मानी जाती है. वर्तमान में इसे उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 80 के अंतर्गत भी लागू समझा जाता है. इस प्रावधान के अंतर्गत उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को कृषि भूमि को गैर-कृषि घोषित करने का अधिकार प्राप्त है.

परियोजना निदेशक नवरत्न ने स्पष्ट किया कि गोरखपुर-शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे से प्रभावित गांवों में भू-परिवर्तन के मामलों की कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि पहले जिन परियोजनाओं में फर्जीवाड़ा सामने आया था, उसे देखते हुए इस बार हर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर है. अधिकारियों को निर्देश है कि किसी भी संदिग्ध जमीन परिवर्तन को तुरंत जांच के दायरे में लाया जाए, जिससे भविष्य में अधिग्रहण के समय कोई विवाद या कानूनी अड़चन न हो.

प्रशासन का मानना है कि सख्ती और सतर्कता के साथ काम करने पर यह एक्सप्रेस-वे परियोजना बिना विवाद के आगे बढ़ सकेगी और क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार मिलेगी.

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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।