पश्चिमी यूपी में ‘पलायन‘ कोई नया मुद्दा नहीं, इज्जत बचाने की खातिर ‘मकान बिकाऊ' है

पश्चिमी यूपी में ‘पलायन‘ कोई नया मुद्दा नहीं, इज्जत बचाने की खातिर ‘मकान बिकाऊ' है
yah makana bikau hai

संजय सक्सेना
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिले पलायन को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहे है. यहां से अक्सर डर-भय-हिंसा के चलते लोगों के पलायन की खबरें आती रहती है, जिसके चलते कभी मेरठ, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर चर्चा में आया था तो वर्तमान में अलीगढ़ और रामपुर हिन्दुओ  के ‘पलायन‘ की खबरों के कारण ‘हाई लाइट‘ हो रहा है. शहर में जगह-जगह ‘मकान बिकाऊ है के पोस्टर काफी कुछ कहानी बयां रहे है. दरअसल, पलायन करने को मजबूर दिख रहे लोगों  में अधिकांश बहुसंख्यक है जो एक वर्ग विशेष के लोगों की दबंगई के चलते अपने गांव शहर को छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे है.

समाजवादी सरकार के समय हिन्दुओं के पलायन की खबरें आती थीं तो इस पर हो-हल्ला तो खूब होता था,लेकिन इसमें किसी को आश्चर्य जैसा कुछ नहीं लगता था, क्योंकि समाजवादी सरकार की तुष्टिकरण की सियासत कें उन लोगों के खिलाफ किसी तरह की कोई खास कार्रवाई ही नहीं होती थी जो गुंडागर्दी और साम्प्रदायिकता फैलाया करते थे. मगर जब यही सब योगी राज में हुआ तो लोगों को काफी अजीब लगा, पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी कि जो डर का माहौल पैदा कर रहे हैं. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि हिन्दुस्तान में भी हिन्दुओं को भय के कारण पलायन करना पड़े तो फिर उनकी सुरक्षा कहां हो सकती है. सवाल यह भी उठता है कि क्यों कुछ लोग हिन्दुस्तान को ‘पाकिस्तान’ बना देने पर क्यों तुले हैं.

किसी देश का इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है,जहां बहुसंख्यक आबादी के लोगों को अल्पसंख्यकों के अत्याचार के चलते घर-बदर यानी पलायन को मजबूर हो जाना पड़े.जम्मू- कश्मीर हो या फिर पश्चिम बंगाल,केरल जैसे मुस्लिम बाहुल्य राज्य यहां से अक्सर हिन्दुओं के पलायान और उत्पीड़न की खबरें आती रहती हैं. कश्मीर से किस तरह से पंडितों को अपनी जान और बहू-बेटियों की इज्जत बचा कर भागना पड़ा था,यह किसी से छिपा नहीं है,लेकिन राजनीति का चश्मा पहने कुछ नेताओं को यह सब नहीं दिखता है.इसकी सबसे बड़ी वजह है बहुसंख्यकों ने  कभी वोट बैंक बनकर किसी एक दल को हराने के लिए कभी वोटिंग नहीं की.

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     कुल मिलाकर देश में हिन्दुओं के पलायन की एक-दो घटनाएं होती तो इसे अनदेखा किया जा सकता है,लेकिन जहां भी अल्पसंख्यक, बहुसंख्यक हो जाते हैं, वहां यह दृश्य आम हो जाता है. लोग अपने घरों के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ का पोस्टर लगाने को मजबूर हो जाते हैं. अलीगढ़ के टप्पल स्थित नूरपुर गांव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है जहां हिन्दू अल्पसख्यंक हो गए हैं,जिसके कारण उनका उत्पीड़न हो रहा है,लेकिन दुख की बात यह है कि ऐसी घटनाओं के समय भी योगी की पुलिस तब जागती है जब उसकी मीडिया या फिर हिन्दूवादी संगठनों के आक्रोश के चलते काफी फजीहत हो चुकी होती है. टप्पल के नूरपुर गांव में हिन्दुओं के पलायन के मामले में पुलिस ने तब 11 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बाद गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जब पानी सिर से ऊपर चला गया था. तब तक गांव में  मीडिया का जमावड़ा लग चुका था. मामला बढ़ता देख गांव में अलीगढ़ सांसद सतीश गौतम, हाथरस सांसद राजवीर दिलेर और खैर विधायक अनूप प्रधान पहुंच गए थे.

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मालूम हो कि गत दिनों टप्पल थाना क्षेत्र के गांव नूरपुर में समुदाय विशेष के लोगों द्वारा बारात चढ़त रोकने से नाराज करीब सवा सौ हिंदू परिवारों ने अपने दरवाजों पर ‘मकान बिकाऊ है’ लिखकर सनसनी फैला दी. सोशल मीडिया पर यह फोटो वायरल हुई तो पुलिस की नींद खुली और गांव के एक व्यक्ति की तहरीर पर समुदाय विशेष के 11 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की गई. हालांकि दूसरे पक्ष से भी थाने में तहरीर दी गई थी लेकिन उस पर रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी. मामला 26 मई की दोपहर गांव के निवासी अनुसूचित जाति के ओमप्रकाश की दो बेटियों की बारात को चढ़ने से रोकने का बताया गया है. ओमप्रकाश के अनुसार बारात उनके  दरवाजे पर आ रही थी. मुख्य मार्ग पर मस्जिद के पास समुदाय विशेष के कुछ लोग एकत्र होकर बारात का विरोध करने लगे. इस भीड़ ने बरातियों और गांव के हिंदुओं पर लाठी, डंडे व राड से हमला कर दिया. इसमें डीजे वाली गाड़ी के शीशे टूट गए. गाड़ी के चालक समेत दो लोग घायल हो गए. लड़के वालों के थाने में इसकीं जानकारी देने के साथ ही आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी लेकिन थाना पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की.सुरक्षा देने के नाम पर गांव में दो पुलिसकर्मी बिठा दिए. जबकि गांव वालों ने आरोप लगाया था कि समुदाय विशेष की भीड़ ने सुनियोजित तरीके से बारात पर हमला किया था. पुलिस की कार्यवाही न होने से नाराज पीड़ित परिवार और उनके समर्थन में लोगों ने अपने दरवाजों के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ लिखने के साथ ही पुलिस व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया. मामला बढ़ता देख र टप्पल पुलिस ने ओमप्रकाश पुत्र तेजपाल की तहरीर पर गांव के वकील, कलुआ, मुस्तकीम, सरफू, अंसार, सोहिल, फारुख, अमजद, तौफीक, सहजोर और लहरू के नाम रिपोर्ट दर्ज की.गांव के राजवीर के अनुसार नूरपुर गांव की आबादी करीब 3500 है. इसमें 80 प्रतिशत मुस्लिम व 20 प्रतिशत हिंदू समाज के लोग रहते हैं. तीन मस्जिदें और एक बड़ा मदरसा संचालित है. ओमप्रकाश के अनुसार पहले भी 25 अप्रैल व 9 मई को इसी तरह बारात चढ़त  का विरोध किया गया था.

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    उधर, पश्चिमी यूपी के ही जिला रामपुर के टंडोला में 28 मई को दो वर्गों के बीच बच्चों के विवाद में मारपीट हो गई. रामचंद्र एवं आनंदी लाल आदि का कहना था कि पुलिस आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है. इसी से नाराज होकर पीड़ित पक्ष ने पलायन करने का मन बना लिया. दरवाजे पर घर बिकाऊ है का बोर्ड भी चस्पा करवा दिया. सूचना से पुलिस में खलबली मच गई. इसके बाद घटना स्थल वाली जगह सीओ धर्म सिंह मार्छाल भी पहुंच गए. उन्होंने रामचंद्र, आनंदी लाल, कुंती, रोहित सैनी आदि से बात कर उन्हें समझाया. साथ ही न्याय संगत कार्रवाई करने का आश्वासन दिया. रामचंद्र, आनंदी लाल, कुंती, रोहित आदि ने सीओ के कहने पर सात लोगों के खिलाफ गाली गलौच कर मारपीट करने, महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी करने की तहरीर दी है. साथ ही कार्रवाई न होने पर आत्महत्या एवं पलायन करने की धमकी दी है.

बहरहाल, पश्चिमी यूपी में हिंदुओं के पलायन की खबर लम्बे समय से  विवादों में जरूर रही है. लेकिन केंद्र सरकार का यही कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हिंदू परिवारों के पलायन के बारे में किसी मामले की सूचना उसके पास नहीं है. एक बार गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने तो राज्यसभा में कहा भी था, ‘उत्तर प्रदेश सरकार से इस संबंध में एक रिपोर्ट मिली है,जिसके अनुसार, देवबंद, सहारनपुर के बनहेरा खास गांव में हिंदू परिवारों के पलायन से संबंधित कोई मामला सूचित नहीं किया गया है.’ अहीर ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी थी.

बता दें कि 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान बजरंग दल ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन समाजवादी सरकार के समय करीब एक वर्ष पूर्व कानून व्यवस्था बिगड़ने के कारण देवबंद से 40 हिंदू परिवार पलायन कर गए हैं. तब इसे कश्मीर से पंडितों के पलायन की तरह की घटना बताया गया था. थोड़ा पीछे जाएं तो इस घटना के सामने आने के बाद 2016 में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो उस समय गोरखपुर से सांसद थे, ने मांग की थी कि इसकी केंद्रीय जांच होनी चाहिए क्योंकि कानून व्यवस्था बिगड़ने की वजह से पश्चिमी यूपी के हिंदू भारी संख्या में पलायन कर रहे हैं. विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने हिंदुओं के पलायन को एक बड़ा मुद्दा भी बनाया था. उस समय बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी इलाहाबाद में हुई पार्टी के राष्ट्रीय कार्यपरिषद की बैठक में इस मुद्दे को उठाया था. अखिलेश सरकार में कैराना से हिन्दुओं के पलायन की खबरें आने के बाद बीजेपी नेताओं की एक टीम हिंदुओं के पलायन की जांच करने के लिए कैराना भी गई थी. बीजेपी नेता हुकुम सिंह जो अब इस दुनिया मेें नहीं हैं, ने इस जांच के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

गौरतलब हो कि तत्कालीन कैराना सांसद हुकुम सिंह ने हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया था. उन्होंने उस समय दो साल की अवधि में कैराना से पलायन करने वाले करीब 340 परिवारों की सूची को जारी किया था. सूची में सभी नाम हिंदू परिवारों के थे. उन्होंने इसकी शिकायत गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी की थी.उनका कहना था कि मुस्लिमों के दबाव के चलते हिंदुओं को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. हालांकि बाद में हुकुम सिंह के सुर बदल गए थे और उन्होंने कहना शुरू कर दिया था, ‘मैंने कभी हिंदुओं के पलायन का मुद्दा नहीं उठाया, मेरा मुद्दा सिर्फ पलायन रहा. मैंने कभी ऐसा नहीं कहा कि पलायन किसी वर्ग विशेष के कारण हो रहा है. बढ़ता अपराध कैराना से पलायन का कारण है और उसके लिए यूपी की समाजवादी सरकार जिम्मेदार है, क्योंकि सपा सरकार अपराधियों को रोक पाने में नाकाम रही.

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