UP में 69 करोड़ से बनेगा बाईपास, 685 किसानों से ली गई जमीन

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UP में 69 करोड़ से बनेगा बाईपास, 685 किसानों से ली गई जमीन
UP में 69 करोड़ से बनेगा बाईपास, 685 किसानों से ली गई जमीन

उत्तर प्रदेश में स्थित बहराइच जिले में बढ़ते ट्रैफिक और प्रति दिन लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए लखनऊ रोड के टिकोरा मोड़ से बहराइच-गोंडा रूट तक 11 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण तेजी से किया जा रहा है. यह प्रोजेकट अब ज़मीन पर साफ नजर आने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों में उम्मीद और चिंता दोनों देखी जा रही हैं.

जमीन अधिग्रहण का कार्य पूरा

इस बाईपास के लिए 287 गाटों की जमीन ली जा चुकी है, जिससे लगभग 685 किसान प्रभावित हुए हैं. प्रशासन की ओर से जमीन का सत्यापन कर लिया गया है और अब किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है.

किसानों में चिंता का माहौला  

स्थानीय किसान रामलाल यादव ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि उनकी खेती की जमीन इस परियोजना में ली गई है. उन्होंने कहा कि “सरकार विकास कर रही है, ये अच्छी बात है, लेकिन हमें समय पर सही मुआवजा मिलना भी जरूरी है.”
दुसरे किसान गोपाल सिंह का कहना है कि अभी तक पूरी जानकारी साफ नहीं मिल पई है, जिससे लोगों में काफी असंतोष हैं.


69 करोड़ की लागत

इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 69 करोड़ 30 लाख रुपये से ज्यादा का बजट मंजूर किया है. धनराशि जारी होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आई है. राज्य सेतु निगम द्वारा ओवरब्रिज का काम भी साथ-साथ किया जा रहा है.


जाम से मिलेगी राहत

स्थानीय निवासी नीलम गिरी बताती हैं कि “अभी शहर में इतना जाम लगता है कि निकलना मुश्किल हो जाती है. अगर बाईपास बन गया तो काफी राहत मिलेगी.” इस बाईपास के बनने से लखनऊ, सीतापुर और लखीमपुर की तरफ से गोंडा जाने वाले वाहन सीधे निकल सकेंगे, जिससे शहर के अंदर जाम की समस्या में कमी आएगी. यह बाईपास महाराजा सुहेलदेव स्मारक के पास से होकर गुजरेगा. इससे बाहर से आने वाले पर्यटक बिना शहर में फंसे सीधे स्मारक तक पहुंच सकेंगे. स्थानीय दुकानदारों को भी उम्मीद है कि इससे कारोबर बढ़ेगा.

5 साल की गारंटी

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अमर सिंह ने बताया कि सड़क निर्माण के साथ 5 साल की गारंटी दी जाएगी. इस दौरान सड़क खराब होने पर ठेकेदार को ही उसे ठीक करना होगा. जहां एक ओर लोग बेहतर सड़क और जाम से राहत को लेकर खुश हैं, वहीं दूसरी ओर जमीन खोने वाले किसानों में चिंता भी बनी हुई है. अब किसानों की नजर मुआवजे और आगे की प्रक्रिया पर टिकी है. अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना को 15 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. अगर काम इसी तरह से चलता रहा तो तय समय पर बाईपास तैयारी हो सकता है.

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bhartiyabasti.com
13 Apr 2026 By Bhartiya Basti

UP में 69 करोड़ से बनेगा बाईपास, 685 किसानों से ली गई जमीन

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उत्तर प्रदेश में स्थित बहराइच जिले में बढ़ते ट्रैफिक और प्रति दिन लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए लखनऊ रोड के टिकोरा मोड़ से बहराइच-गोंडा रूट तक 11 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण तेजी से किया जा रहा है. यह प्रोजेकट अब ज़मीन पर साफ नजर आने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों में उम्मीद और चिंता दोनों देखी जा रही हैं.

जमीन अधिग्रहण का कार्य पूरा

इस बाईपास के लिए 287 गाटों की जमीन ली जा चुकी है, जिससे लगभग 685 किसान प्रभावित हुए हैं. प्रशासन की ओर से जमीन का सत्यापन कर लिया गया है और अब किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है.

किसानों में चिंता का माहौला  

स्थानीय किसान रामलाल यादव ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि उनकी खेती की जमीन इस परियोजना में ली गई है. उन्होंने कहा कि “सरकार विकास कर रही है, ये अच्छी बात है, लेकिन हमें समय पर सही मुआवजा मिलना भी जरूरी है.”
दुसरे किसान गोपाल सिंह का कहना है कि अभी तक पूरी जानकारी साफ नहीं मिल पई है, जिससे लोगों में काफी असंतोष हैं.


69 करोड़ की लागत

इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 69 करोड़ 30 लाख रुपये से ज्यादा का बजट मंजूर किया है. धनराशि जारी होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आई है. राज्य सेतु निगम द्वारा ओवरब्रिज का काम भी साथ-साथ किया जा रहा है.


जाम से मिलेगी राहत

स्थानीय निवासी नीलम गिरी बताती हैं कि “अभी शहर में इतना जाम लगता है कि निकलना मुश्किल हो जाती है. अगर बाईपास बन गया तो काफी राहत मिलेगी.” इस बाईपास के बनने से लखनऊ, सीतापुर और लखीमपुर की तरफ से गोंडा जाने वाले वाहन सीधे निकल सकेंगे, जिससे शहर के अंदर जाम की समस्या में कमी आएगी. यह बाईपास महाराजा सुहेलदेव स्मारक के पास से होकर गुजरेगा. इससे बाहर से आने वाले पर्यटक बिना शहर में फंसे सीधे स्मारक तक पहुंच सकेंगे. स्थानीय दुकानदारों को भी उम्मीद है कि इससे कारोबर बढ़ेगा.

5 साल की गारंटी

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अमर सिंह ने बताया कि सड़क निर्माण के साथ 5 साल की गारंटी दी जाएगी. इस दौरान सड़क खराब होने पर ठेकेदार को ही उसे ठीक करना होगा. जहां एक ओर लोग बेहतर सड़क और जाम से राहत को लेकर खुश हैं, वहीं दूसरी ओर जमीन खोने वाले किसानों में चिंता भी बनी हुई है. अब किसानों की नजर मुआवजे और आगे की प्रक्रिया पर टिकी है. अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना को 15 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. अगर काम इसी तरह से चलता रहा तो तय समय पर बाईपास तैयारी हो सकता है.

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