UP में Industrial Corridor पर ब्रेक! किसानों की 27 हेक्टेयर जमीन बनी सबसे बड़ी बाधा
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश को औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़े स्तर पर काम कर रही है. इसी कड़ी में यूपीडा द्वारा तैयार किए गए औद्योगिक एक्सप्रेसवे के किनारे नए औद्योगिक गलियारे बसाए जा रहे हैं. इन परियोजनाओं से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है, लेकिन जमीन से जुड़ी दिक्कतें सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.
एक्सप्रेसवे के साथ विकसित हो रहे औद्योगिक गलियारे
प्रदेश में अब तक कुल 6 औद्योगिक एक्सप्रेसवे बनाए जा चुके हैं. इन एक्सप्रेसवे से सटे 27 जिलों में औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना है. सरकार का मकसद है कि सड़क, बिजली और परिवहन जैसी सुविधाओं के साथ उद्योगों को एक बेहतर माहौल दिया जाए, जिससे निवेशक आकर्षित हों और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सके.
मेरठ में पहले चरण का काम जारी
उत्तर प्रदेश में स्थित मेरठ जिले में औद्योगिक गलियारे के पहले चरण के लिए 214 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है. यह जमीन 2 गांवों बिजौली और खरखौदा क्षेत्र में स्थित है. योजना के अनुसार इस जमीन पर बड़े पैमाने पर औद्योगिक ढांचा विकसित किया जाना है, जिससे मेरठ और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
किसानों और सरकारी जमीन का ब्योरा
इस चिन्हित भूमि में से 203 हेक्टेयर जमीन किसानों की है, जबकि 11 हेक्टेयर जमीन सरकारी श्रेणी में आती है. सरकारी भूमि का पुनर्ग्रहण किया जा रहा है. अब तक किसानों से लगभग 175 हेक्टेयर जमीन की खरीद पूरी हो चुकी है. वहीं सरकारी भूमि में से करीब 7 हेक्टेयर जमीन का पुनर्ग्रहण भी किया जा चुका है.
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हालांकि अब भी करीब 27 हेक्टेयर भूमि की खरीद बाकी है. इसमें से ज्यादातर जमीन आपसी विवाद, कागजी उलझनों और स्वामित्व संबंधी समस्याओं में फंसी हुई है. यही वजह है कि इस जमीन की सीधी खरीद फिलहाल संभव नहीं हो पा रही है. अधिकारियों का मानना है कि इनमें से केवल करीब 2 हेक्टेयर जमीन ही सीधे खरीदी जा सकती है.
अधिग्रहण के रास्ते तलाश रहा प्रशासन
बची हुई जमीन को लेकर जिला प्रशासन ने अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अक्टूबर महीने से इस दिशा में काम चल रहा है. सामाजिक प्रभाव आकलन के लिए रोहिणी, दिल्ली की एजेंसी प्रोब रिसर्च एंड सोशल डेवलपमेंट को जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके अंऊ प्रभावित क्षेत्र में सर्वे किया जा रहा है, जिससे अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ सके.
शासन की समयसीमा बढ़ा रही दबाव
प्रदेश सरकार ने सभी 27 जिलों के प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि 31 जनवरी तक औद्योगिक गलियारे के लिए जरूरी पूरी जमीन की व्यवस्था कर ली जाए. लेकिन मेरठ में भूमि विवादों के कारण यह लक्ष्य हासिल करना कठिन नजर आ रहा है. माना जा रहा है कि लगभग 25 हेक्टेयर जमीन का समाधान अधिग्रहण के जरिए ही संभव हो पाएगा.
जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि औद्योगिक गलियारे के पहले चरण की शेष जमीन के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है. भूमि विवादों के कारण सीधी खरीद संभव नहीं हो पा रही है, लेकिन प्रशासन हर स्तर पर प्रयास कर रहा है कि परियोजना समय पर आगे बढ़ सके.
लंबा एक्सप्रेसवे, बड़ा औद्योगिक सपना
मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित औद्योगिक एक्सप्रेसवे करीब 594 किलोमीटर लंबा है, जो 12 जिलों से होकर गुजरता है. सरकार का लक्ष्य है कि इस पूरे रूट पर चरणबद्ध तरीके से औद्योगिक गलियारे विकसित किए जाएं. मेरठ में कुल 506 हेक्टेयर क्षेत्र में दो चरणों में औद्योगिक गलियारा बसाने की योजना है, जिसमें पहला चरण फिलहाल जमीन की अड़चनों में उलझा हुआ है.
UP में Industrial Corridor पर ब्रेक! किसानों की 27 हेक्टेयर जमीन बनी सबसे बड़ी बाधा
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश को औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़े स्तर पर काम कर रही है. इसी कड़ी में यूपीडा द्वारा तैयार किए गए औद्योगिक एक्सप्रेसवे के किनारे नए औद्योगिक गलियारे बसाए जा रहे हैं. इन परियोजनाओं से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है, लेकिन जमीन से जुड़ी दिक्कतें सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.
एक्सप्रेसवे के साथ विकसित हो रहे औद्योगिक गलियारे
प्रदेश में अब तक कुल 6 औद्योगिक एक्सप्रेसवे बनाए जा चुके हैं. इन एक्सप्रेसवे से सटे 27 जिलों में औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना है. सरकार का मकसद है कि सड़क, बिजली और परिवहन जैसी सुविधाओं के साथ उद्योगों को एक बेहतर माहौल दिया जाए, जिससे निवेशक आकर्षित हों और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सके.
मेरठ में पहले चरण का काम जारी
उत्तर प्रदेश में स्थित मेरठ जिले में औद्योगिक गलियारे के पहले चरण के लिए 214 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है. यह जमीन 2 गांवों बिजौली और खरखौदा क्षेत्र में स्थित है. योजना के अनुसार इस जमीन पर बड़े पैमाने पर औद्योगिक ढांचा विकसित किया जाना है, जिससे मेरठ और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
किसानों और सरकारी जमीन का ब्योरा
इस चिन्हित भूमि में से 203 हेक्टेयर जमीन किसानों की है, जबकि 11 हेक्टेयर जमीन सरकारी श्रेणी में आती है. सरकारी भूमि का पुनर्ग्रहण किया जा रहा है. अब तक किसानों से लगभग 175 हेक्टेयर जमीन की खरीद पूरी हो चुकी है. वहीं सरकारी भूमि में से करीब 7 हेक्टेयर जमीन का पुनर्ग्रहण भी किया जा चुका है.
विवाद बनी सबसे बड़ी रुकावट
हालांकि अब भी करीब 27 हेक्टेयर भूमि की खरीद बाकी है. इसमें से ज्यादातर जमीन आपसी विवाद, कागजी उलझनों और स्वामित्व संबंधी समस्याओं में फंसी हुई है. यही वजह है कि इस जमीन की सीधी खरीद फिलहाल संभव नहीं हो पा रही है. अधिकारियों का मानना है कि इनमें से केवल करीब 2 हेक्टेयर जमीन ही सीधे खरीदी जा सकती है.
अधिग्रहण के रास्ते तलाश रहा प्रशासन
बची हुई जमीन को लेकर जिला प्रशासन ने अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अक्टूबर महीने से इस दिशा में काम चल रहा है. सामाजिक प्रभाव आकलन के लिए रोहिणी, दिल्ली की एजेंसी प्रोब रिसर्च एंड सोशल डेवलपमेंट को जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके अंऊ प्रभावित क्षेत्र में सर्वे किया जा रहा है, जिससे अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ सके.
शासन की समयसीमा बढ़ा रही दबाव
प्रदेश सरकार ने सभी 27 जिलों के प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि 31 जनवरी तक औद्योगिक गलियारे के लिए जरूरी पूरी जमीन की व्यवस्था कर ली जाए. लेकिन मेरठ में भूमि विवादों के कारण यह लक्ष्य हासिल करना कठिन नजर आ रहा है. माना जा रहा है कि लगभग 25 हेक्टेयर जमीन का समाधान अधिग्रहण के जरिए ही संभव हो पाएगा.
जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि औद्योगिक गलियारे के पहले चरण की शेष जमीन के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है. भूमि विवादों के कारण सीधी खरीद संभव नहीं हो पा रही है, लेकिन प्रशासन हर स्तर पर प्रयास कर रहा है कि परियोजना समय पर आगे बढ़ सके.
लंबा एक्सप्रेसवे, बड़ा औद्योगिक सपना
मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित औद्योगिक एक्सप्रेसवे करीब 594 किलोमीटर लंबा है, जो 12 जिलों से होकर गुजरता है. सरकार का लक्ष्य है कि इस पूरे रूट पर चरणबद्ध तरीके से औद्योगिक गलियारे विकसित किए जाएं. मेरठ में कुल 506 हेक्टेयर क्षेत्र में दो चरणों में औद्योगिक गलियारा बसाने की योजना है, जिसमें पहला चरण फिलहाल जमीन की अड़चनों में उलझा हुआ है.
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About The Author
शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।