राम मंदिर के निर्माण में नहीं होगा लोहे का इस्तेमाल, ट्रस्ट ने देश से दान में मांगी यह चीज

राम मंदिर के निर्माण में नहीं होगा लोहे का इस्तेमाल, ट्रस्ट ने देश से दान में मांगी यह चीज
Ram Mandir Ayodhya News

अयोध्या. उत्तर प्रदेश स्थित अयोध्या में राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) के निर्माण में लोहे का इस्तेमाल नहीं होगा. यह बात श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या ने कही है. इसके साथ ही मंदिर ने कुछ खास दान मांगा है.  ट्वीट्स के जरिए न्यास ने बताया कि राम मंदिर की तैयारी कैसी चल रही है. न्यास ने कहा कि मन्दिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नही किया जाएगा. ट्रस्ट ने कहा कि जिस तरीके से मंदिर का निर्माण हो रहा है उससे वह सिर्फ सदियों तक खड़ा नहीं रहेगा बल्कि हर तरह के झंझावातों का सामना भी करेगा.

ट्रस्ट ने कहा कि – ‘मन्दिर निर्माण में लगने वाले पत्थरों को जोड़ने के लिए तांबे की पत्तियों का उपयोग किया जाएगा. निर्माण कार्य हेतु 18 इंच लम्बी, 3 mm गहरी और 30 mm चौड़ी 10,000 पत्तियों की आवश्यकता पड़ेगी. श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र श्रीरामभक्तों का आह्वान करता है कि तांबे की पत्तियां दान करें.’

कहा कि ‘इन तांबे की पत्तियों पर दानकर्ता अपने परिवार, क्षेत्र अथवा मंदिरों का नाम गुदवा सकते हैं. इस प्रकार से ये तांबे की पत्तियां न केवल देश की एकात्मता का अभूतपूर्व उदाहरण बनेंगी, अपितु मन्दिर निर्माण में सम्पूर्ण राष्ट्र के योगदान का प्रमाण भी देंगी.’

ट्रस्ट ने ट्वीट किया कि ‘श्री रामजन्मभूमि मन्दिर का निर्माण भारत की प्राचीन निर्माण पद्धति से किया जा रहा है ताकि वह सहस्त्रों वर्षों तक न केवल खड़ा रहे, अपितु भूकम्प, झंझावात अथवा अन्य किसी प्रकार की आपदा में भी उसे किसी प्रकार की क्षति न हो. मन्दिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नही किया जाएगा.’

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श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने दी यह अहम जानकारी

इसके साथ ही Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra ने बताया कि मंदिर के निर्माण में CBRI रुड़की और IIT मद्रास के साथ मिलकर निर्माणकर्ता कम्पनी L&T के इंजीनियर काम कर कर रहे हैं. बताया गया कि फिलहाल मिट्टी के जांच का काम चल रहा है.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बताया कि – ‘श्री राम जन्मभूमि मन्दिर के निर्माण हेतु कार्य प्रारंभ हो गया है. CBRI रुड़की और IIT मद्रास के साथ मिलकर निर्माणकर्ता कम्पनी L&T के अभियंता भूमि की मृदा के परीक्षण के कार्य में लगे हुए है. मन्दिर निर्माण के कार्य में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है.’

बता दें गुरुवार को ट्रस्ट की दिल्ली में बैठक हुई जिस पर मंदिर के निर्माण से जुड़ी अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई.

 

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