कुलभूषण मामले में सामने आया पाकिस्तान का बनावटीपन

कुलभूषण मामले में सामने आया पाकिस्तान का बनावटीपन
Sameer Akhtari Fuqv V02zhe Unsplash

पाकिस्तान (Pakistan)यूं तो दुनिया को दिखाने के लिए बहुत अच्छा और शानदार मुल्क बनता है लेकिन उसका बनावटीपना बहुत देर तक टिक नहीं पाता.

हर बात में भारत (India) को नीचा दिखाने और उससे कंपटीशन के चक्कर में वह खुद मात खा जाता है. कुछ ऐसा ही हुआ भारतीय नौसने का पूर्व अफसर और ईरान में व्यापार कर रहे कुलभूषण जाधव के मामले में.

अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को भी पाकिस्तान ( Pakistan ) अपनी जीत बता रहा था. यह बात दीगर है कि पाकिस्तान (Pakistan) की जेलों में कुलभूषण जाधव (Kulbhushan Jadhav) ही नहीं अनेक निर्दोष भारतीय वर्षो से यातना के शिकार हो रहे हैं.

अन्तरराष्ट्रीय नियम और वियना संधि के आधार पर भारतीय कैदियों के अपने मानवाधिकार हैं जिसकी रक्षा करना पाकिस्तान की जिम्मेदारी है किन्तु पाक जैसे देश जहां के हुक्मरान सेना के दबाव में ही अपनी भूमिका निभाने को बाध्य हैं उनसे यह उम्मीद करना कि वह नियमों का पालन करेगें फिलहाल तो दिवास्वप्न ही है.

कुलभूषण जाधव कोई अपराधी नही हैं. वे भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और कारोबार के लिए ईरान गए थे. पाकिस्तान लगातार कुलभूषण जाधव मामले में वियना संधि का उल्लंघन कर रहा है.

अन्तराष्ट्रीय दबाव को भी वह जाधव प्रकरण में लगातार नकार रहा है.

अच्छा हो कि पाकिस्तान अपना रवैया बदले और वियना संधि का पालन करते हुये भारतीय कैदियों के मानवाधिकार की रक्षा सुनिश्चित करे.

और Pakistan ने  सुना दी फांसी की सजा

जाधव के मामले में पाकिस्तान ने हद से ज्यादा जल्दीबाजी दिखाते हुए उन्हें फांसी तक की सजा सुना दी.

इतना ही नहीं अपना पक्ष सही साबित करने के लिए उन पर दबाव बना कर फर्जी कबूलनामा भी प्रसारित करा दिया. शुरुआती दिनों में न तो उन्हें कांसुलर एक्सेस दिया गया और न ही कोई सुविधा.

जब उनकी पत्नी और मां उनसे मिलने गईं तो उनके साथ बहुत ही गंदा व्यवहार किया. और तो और अपनी मीडिया के सामने उनकी बेइज्जती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

जानें क्या है जाधव का पूरा मामला

पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षाबलों ने जाधव को बलूचिस्तान प्रांत में 3 मार्च 2016 को बलूचिस्तान में RAW की जासूसी करने और  आतंकी गतिविधियां करने के लिए गिरफ्तार किया था.

पाकिस्तानी सरकार का दावा है कि जाधव एक भारतीय नौसेना के कमांडर हैं, जो पाकिस्तान के अंदर की जाने वाली गतिविधियों में शामिल थे.

कुलभूषण जाधव को 10 अप्रैल 2017 को पाकिस्तान में एक फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल द्वारा मौत की सजा सुनाई गई थी.

भारत सरकार ने इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में चुनौती दी थी.

ICJ ने क्या किया

जाधव की फांसी को रोकने के लिए ICJ में भारत सरकार ने दायर की रिट याचिका दाखिल की गई.

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने 18 मई 2017 को फांसी पर रोक लगा दी लेकिन अंतिम फैसला अभी भी लंबित है.

17 जुलाई 2019 को, ICJ ने जाधव की तत्काल रिहाई के लिए भारत की अपील को खारिज कर दिया और पाकिस्तान को फांसी को निलंबित करने का आदेश दिया.

ICJ ने फैसला सुनाया कि पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव के मुकदमे और सजा की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करनी होगी.

ICJ ने पाकिस्तान को इस मामले पर भारत के साथ सहयोग करने और जाधव को कांसुलर एक्सेस प्रदान करने का आदेश दिया.

पाक के दावों से उलट यह है सच्चाई

पाकिस्तान  के दावों के उलट सच्चाई यह है कि कुलभूषण  (kulbhushan jadhav)एक सेवानिवृत्त भारतीय नौसेना कमांडर हैं, जिन्होंने समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली और ईरान में अपना व्यवसाय कर रहे थे.

पाकिस्तान ने उनका अपहरण कर लिया था और जानबूझकर जासूसी के मामले में फंसाया गया था.

सितंबर महीने में भारतीय अधिकारी कुलभूषण  से मिले और उन्हें आश्वस्त किया कि भारत उनकी रिहाई के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा.

यह भी पढ़ें: इमरान खान बोले- हम पहले नहीं करेंगे युद्ध की शुरुआत

भारतीय बस्ती
bhartiyabasti.com
04 Sep 2019 By Bhartiya Basti

कुलभूषण मामले में सामने आया पाकिस्तान का बनावटीपन

पाकिस्तान (Pakistan)यूं तो दुनिया को दिखाने के लिए बहुत अच्छा और शानदार मुल्क बनता है लेकिन उसका बनावटीपना बहुत देर तक टिक नहीं पाता.

हर बात में भारत (India) को नीचा दिखाने और उससे कंपटीशन के चक्कर में वह खुद मात खा जाता है. कुछ ऐसा ही हुआ भारतीय नौसने का पूर्व अफसर और ईरान में व्यापार कर रहे कुलभूषण जाधव के मामले में.

अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को भी पाकिस्तान ( Pakistan ) अपनी जीत बता रहा था. यह बात दीगर है कि पाकिस्तान (Pakistan) की जेलों में कुलभूषण जाधव (Kulbhushan Jadhav) ही नहीं अनेक निर्दोष भारतीय वर्षो से यातना के शिकार हो रहे हैं.

अन्तरराष्ट्रीय नियम और वियना संधि के आधार पर भारतीय कैदियों के अपने मानवाधिकार हैं जिसकी रक्षा करना पाकिस्तान की जिम्मेदारी है किन्तु पाक जैसे देश जहां के हुक्मरान सेना के दबाव में ही अपनी भूमिका निभाने को बाध्य हैं उनसे यह उम्मीद करना कि वह नियमों का पालन करेगें फिलहाल तो दिवास्वप्न ही है.

कुलभूषण जाधव कोई अपराधी नही हैं. वे भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और कारोबार के लिए ईरान गए थे. पाकिस्तान लगातार कुलभूषण जाधव मामले में वियना संधि का उल्लंघन कर रहा है.

अन्तराष्ट्रीय दबाव को भी वह जाधव प्रकरण में लगातार नकार रहा है.

अच्छा हो कि पाकिस्तान अपना रवैया बदले और वियना संधि का पालन करते हुये भारतीय कैदियों के मानवाधिकार की रक्षा सुनिश्चित करे.

और Pakistan ने  सुना दी फांसी की सजा

जाधव के मामले में पाकिस्तान ने हद से ज्यादा जल्दीबाजी दिखाते हुए उन्हें फांसी तक की सजा सुना दी.

इतना ही नहीं अपना पक्ष सही साबित करने के लिए उन पर दबाव बना कर फर्जी कबूलनामा भी प्रसारित करा दिया. शुरुआती दिनों में न तो उन्हें कांसुलर एक्सेस दिया गया और न ही कोई सुविधा.

जब उनकी पत्नी और मां उनसे मिलने गईं तो उनके साथ बहुत ही गंदा व्यवहार किया. और तो और अपनी मीडिया के सामने उनकी बेइज्जती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

जानें क्या है जाधव का पूरा मामला

पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षाबलों ने जाधव को बलूचिस्तान प्रांत में 3 मार्च 2016 को बलूचिस्तान में RAW की जासूसी करने और  आतंकी गतिविधियां करने के लिए गिरफ्तार किया था.

पाकिस्तानी सरकार का दावा है कि जाधव एक भारतीय नौसेना के कमांडर हैं, जो पाकिस्तान के अंदर की जाने वाली गतिविधियों में शामिल थे.

कुलभूषण जाधव को 10 अप्रैल 2017 को पाकिस्तान में एक फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल द्वारा मौत की सजा सुनाई गई थी.

भारत सरकार ने इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में चुनौती दी थी.

ICJ ने क्या किया

जाधव की फांसी को रोकने के लिए ICJ में भारत सरकार ने दायर की रिट याचिका दाखिल की गई.

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने 18 मई 2017 को फांसी पर रोक लगा दी लेकिन अंतिम फैसला अभी भी लंबित है.

17 जुलाई 2019 को, ICJ ने जाधव की तत्काल रिहाई के लिए भारत की अपील को खारिज कर दिया और पाकिस्तान को फांसी को निलंबित करने का आदेश दिया.

ICJ ने फैसला सुनाया कि पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव के मुकदमे और सजा की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करनी होगी.

ICJ ने पाकिस्तान को इस मामले पर भारत के साथ सहयोग करने और जाधव को कांसुलर एक्सेस प्रदान करने का आदेश दिया.

पाक के दावों से उलट यह है सच्चाई

पाकिस्तान  के दावों के उलट सच्चाई यह है कि कुलभूषण  (kulbhushan jadhav)एक सेवानिवृत्त भारतीय नौसेना कमांडर हैं, जिन्होंने समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली और ईरान में अपना व्यवसाय कर रहे थे.

पाकिस्तान ने उनका अपहरण कर लिया था और जानबूझकर जासूसी के मामले में फंसाया गया था.

सितंबर महीने में भारतीय अधिकारी कुलभूषण  से मिले और उन्हें आश्वस्त किया कि भारत उनकी रिहाई के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगा.

यह भी पढ़ें: इमरान खान बोले- हम पहले नहीं करेंगे युद्ध की शुरुआत

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