वैज्ञानिक विधि से पौधरोपण करें किसान, मानसून में होगा लाभ
कन्हैया सिंह
बस्ती (भाब). मानसून शुरू होने के साथ पेड़ पौधों को लगाने का सिलसिला शुरू हो जाता है. मानसून के आगमन के साथ ही किसानो से लेकर आम आदमी पेड पौधों को लगाने में जुट जाता है. इस दौरान फूल फल सभी पौधो की नर्सरी से खरीददारी बढ़ जाती हैं. लेकिन पौधों के बेहतर तरीके से न लगाने के कारण उसके बढ़ने एवं फलत आने में तो समस्या रहती ही है वहीं पौधे खराब हो जाते हैं. अलग अलग पौधों के लिए अलग खाद पानी और देखभाल की जरूरत होती हैं . कैक्टस के पौधों को ज्यादा पानी से बचाना जरूरी है वही फलदार पौधों को इनसे ज्यादा पानी देने की जरूरत होती है. फलदार पौधो को लगाने एवं उसकी देखभाल कैसे करे इस बारे में आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय फैजाबाद के प्रोफेसर जे0पी0 यादव ने जानकारी दी है.
बताया कि पोैधों को लगाने के लिए ले आउट तैयार कर पौधों के अनुरूप गडढा खोद लें. आम के बीजू पौधों के लिए गडढ़ा एक मीटर लम्बा एक मी0 चैडा एवं एक मी0 गहरा एवं लाइन से लाइन एवं पौधो की दूरी दस मीटर की रखे. आम की बौनी किस्मो के लिए पौधों से पौधों की एवं लाइन से लाइन की दूरी 5 मीटर रखे.ऐसे ही अलग अलग पौधो के लिए दूरी निर्धारित करें. गडढ़ो की खुदाई के बाद उन्हे 20 से 25 दिनो के लिए खुला छोड दे. उसके बाद जुलाई के महीने में स्वस्थ पौधों की नर्सरी लाकर लगाये.
पौधों की रोपाई से पहले उनको पालीथीन से निकाल कर गडढ़े में लगायें और गडडे की मिट्टी को पौधों के साथ 6 इंच उचाई तक भरे.जिससे बरसात होन पर मिट्टी बैठने पर भी पौधा मजबूती के साथ खडा रहे. यदि मिट्टी मे ंदीमक की समस्या हो तो 2 एम एल क्लोरीपायरीफास प्रति लीटर पानी में डालकर एक बाल्टी पानी मे डालकर सिचाई करे. कीटो से बचाव के लिए प्रति पौधे 50 ग्राम फालीडाल डालें.समय समय पर पोैधों की निकाई गुडाई कर उसकी देखभाल करे . जिससे समय पर पौधों में फलत आ सके. पौधों को लगाने से पहले स्थानीय उद्यान विभाग से सम्पर्क कर उसकी विस्तृत जानकारी ले सकते है.
प्रगतिशील किसान तुलसीराम चैधरी ने बताया कि जिस प्रकार से बच्चों की परवरिश की जाती है उसी तरह की देखभाल पौधों को लगाने से लेकर विकसित करने तक की जानी चाहिये. बताया कि पौधोें को लगाने से पहले गड्ढो की तैयारी कर लें और गड्ढों में उर्वरक, देशी खाद, कीटनाशक में नीम के पत्तों का उपयोग करें. गड्ढा ढककर 20 दिन से लेकर एक माह तक इंतजार के बाद ही पौधरोपण करें. पौधे का पिण्ड गड्ढे में डेढ फीट के नीचे न जाने पाये. पिण्ड का निचला भाग गड्ढे के उर्वरक मिट्टी के साथ जुड जाय. आम के पौधें की उम्र लगभग 50 वर्ष की होती है, इसे ध्यान में रखकर उसकी जड़ों में किसान उर्वराशक्ति का पूरा उपयोग करें. हड़बडी में पौधे न लगायें.
यह भी पढ़ें: न जॉब कार्ड, न रोजगार, सरकारी ढिढ़ोरों से अलग है प्रवासियों की हकीकत
वैज्ञानिक विधि से पौधरोपण करें किसान, मानसून में होगा लाभ
कन्हैया सिंह
बस्ती (भाब). मानसून शुरू होने के साथ पेड़ पौधों को लगाने का सिलसिला शुरू हो जाता है. मानसून के आगमन के साथ ही किसानो से लेकर आम आदमी पेड पौधों को लगाने में जुट जाता है. इस दौरान फूल फल सभी पौधो की नर्सरी से खरीददारी बढ़ जाती हैं. लेकिन पौधों के बेहतर तरीके से न लगाने के कारण उसके बढ़ने एवं फलत आने में तो समस्या रहती ही है वहीं पौधे खराब हो जाते हैं. अलग अलग पौधों के लिए अलग खाद पानी और देखभाल की जरूरत होती हैं . कैक्टस के पौधों को ज्यादा पानी से बचाना जरूरी है वही फलदार पौधों को इनसे ज्यादा पानी देने की जरूरत होती है. फलदार पौधो को लगाने एवं उसकी देखभाल कैसे करे इस बारे में आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय फैजाबाद के प्रोफेसर जे0पी0 यादव ने जानकारी दी है.
बताया कि पोैधों को लगाने के लिए ले आउट तैयार कर पौधों के अनुरूप गडढा खोद लें. आम के बीजू पौधों के लिए गडढ़ा एक मीटर लम्बा एक मी0 चैडा एवं एक मी0 गहरा एवं लाइन से लाइन एवं पौधो की दूरी दस मीटर की रखे. आम की बौनी किस्मो के लिए पौधों से पौधों की एवं लाइन से लाइन की दूरी 5 मीटर रखे.ऐसे ही अलग अलग पौधो के लिए दूरी निर्धारित करें. गडढ़ो की खुदाई के बाद उन्हे 20 से 25 दिनो के लिए खुला छोड दे. उसके बाद जुलाई के महीने में स्वस्थ पौधों की नर्सरी लाकर लगाये.
पौधों की रोपाई से पहले उनको पालीथीन से निकाल कर गडढ़े में लगायें और गडडे की मिट्टी को पौधों के साथ 6 इंच उचाई तक भरे.जिससे बरसात होन पर मिट्टी बैठने पर भी पौधा मजबूती के साथ खडा रहे. यदि मिट्टी मे ंदीमक की समस्या हो तो 2 एम एल क्लोरीपायरीफास प्रति लीटर पानी में डालकर एक बाल्टी पानी मे डालकर सिचाई करे. कीटो से बचाव के लिए प्रति पौधे 50 ग्राम फालीडाल डालें.समय समय पर पोैधों की निकाई गुडाई कर उसकी देखभाल करे . जिससे समय पर पौधों में फलत आ सके. पौधों को लगाने से पहले स्थानीय उद्यान विभाग से सम्पर्क कर उसकी विस्तृत जानकारी ले सकते है.
प्रगतिशील किसान तुलसीराम चैधरी ने बताया कि जिस प्रकार से बच्चों की परवरिश की जाती है उसी तरह की देखभाल पौधों को लगाने से लेकर विकसित करने तक की जानी चाहिये. बताया कि पौधोें को लगाने से पहले गड्ढो की तैयारी कर लें और गड्ढों में उर्वरक, देशी खाद, कीटनाशक में नीम के पत्तों का उपयोग करें. गड्ढा ढककर 20 दिन से लेकर एक माह तक इंतजार के बाद ही पौधरोपण करें. पौधे का पिण्ड गड्ढे में डेढ फीट के नीचे न जाने पाये. पिण्ड का निचला भाग गड्ढे के उर्वरक मिट्टी के साथ जुड जाय. आम के पौधें की उम्र लगभग 50 वर्ष की होती है, इसे ध्यान में रखकर उसकी जड़ों में किसान उर्वराशक्ति का पूरा उपयोग करें. हड़बडी में पौधे न लगायें.
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