बस्ती में बन रही एथेनॉल फैक्ट्री पर कंपनी का बड़ा खुलासा, वायरल दावों पर दिया जवाब
बस्ती . अनीता डिस्टलरी प्रा. लि. द्वारा सल्टौआ गोपालपुर विकास खण्ड के दसिया में स्थापित की जा रही एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं का कंपनी प्रबंधन ने पुरजोर खंडन करते हुए एक विस्तृत जनहित सूचना एवं तथ्य पत्रक जारी किया है. कंपनी प्रबंधन का कहना है कि परियोजना से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, जिससे आम जनता, किसान भाइयों और मीडिया बंधुओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है. इसी भ्रम को दूर करने के उद्देश्य से कंपनी ने प्रश्न-उत्तर के रूप में तथ्यात्मक जानकारी सार्वजनिक की है.
सोमवार को स्टेशन रोड स्थित एक होटल बालाजी प्रकाश के सभागार में कंपनी डायरेक्टर रोहन जायसवाल ने पत्रकारों को बताया कि आरंभ से ही किसानों द्वारा अपनी जमीनों का बैनामा अनीता डिस्टलरी के नाम से सभी की सहमति से कराया जा रहा है और विगत चार वर्षों में जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर कोई विवाद सामने नहीं आया है. वर्ष 2021 में हुई पहली भूमि रजिस्ट्री से लेकर अंतिम रजिस्ट्री तक प्रत्येक भूमि की खरीद अनीता डिस्टलरी प्रा. लि. के नाम पर ही की गई है. कंपनी का यही नाम सभी सरकारी अभिलेखों, रजिस्ट्री दस्तावेजों तथा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में भी दर्ज है. कंपनी का कहना है कि ‘डिस्टिलरी’ शब्द स्वयं इस बात को स्पष्ट करता है कि यह एक एथेनॉल उत्पादन इकाई है, न कि जैसा दावा किया जा रहा है कि यहां मैदा फैक्ट्री या बीयर फैक्ट्री लगाई जा रही थी. भूमि खरीद की पूरी प्रक्रिया विधिवत और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई, प्रत्येक विक्रेता को रजिस्ट्री से पूर्व उसके बैंक खाते में भुगतान किया गया तथा सभी रजिस्ट्रियां संबंधित लोगों की पूर्ण सहमति से हुईं. ऐसे में यह कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है कि ग्रामीणों को परियोजना की जानकारी नहीं दी गई थी.
प्रोपराइटर सुधीर जायसवाल ने बताया कि कंपनी के निदेशक स्तर से लेकर सभी प्रतिनिधियों ने आरंभ से ही यह स्पष्ट कर रखा है कि यहां एथेनॉल संयंत्र लगाया जाएगा. स्थापना के समय के बाद जब सीमा दीवार का निर्माण शुरू हुआ, तो मुख्य राजस्व अधिकारी की उपस्थिति में किसानों के साथ लोक सुनवाई की बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया गया. कंपनी का निर्माण कार्य अब तक लगभग 75 प्रतिशत पूरा हो चुका है.
यह भी पढ़ें: बस्ती की आभा सिंह को मिली बड़ी जिम्मेदारी, पूरे उत्तर प्रदेश के होम शेफ्स का करेंगी नेतृत्वपर्यावरण को होने वाले नुकसान से जुड़े सवालों पर यूनिट हेड पी.एन. दूबे ने कहा कि यह दावा भी पूरी तरह निराधार और भ्रामक है. यह उद्योग भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार के सभी संबंधित विभागों से आवश्यक स्वीकृतियां और अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद ही स्थापित किया जा रहा है. पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा विस्तृत तकनीकी परीक्षण एवं अध्ययन के उपरांत ही परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है. संयंत्र जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि फैक्ट्री से किसी भी प्रकार का दूषित जल परिसर के बाहर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में प्रयुक्त जल का उपचार कर उसे पुनः-पुनः उत्पादन प्रक्रिया में ही इस्तेमाल किया जाएगा. संयंत्र का निर्माण पर्यावरण मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित सभी मानकों और नियमों के अनुरूप किया जा रहा है.
प्रबंधन ने यह भी बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 50 से अधिक एथेनॉल संयंत्र संचालित हैं, जिनमें से लगभग 20 अनाज आधारित एथेनॉल संयंत्र हैं, और यदि किसी को इस उद्योग को लेकर कोई संदेह है तो वह स्वयं इन संचालित संयंत्रों का भ्रमण कर उनकी कार्यप्रणाली और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देख सकता है. चीफ कन्सलटेन्ट पी.एन. पाण्डेय ने बताया कि एक लीटर एथेनॉल बनाने में दस हजार लीटर पानी खर्च होने तथा विभिन्न स्थानों के एथेनॉल प्लांट प्रदूषण फैला रहे होने के सोशल मीडिया पर वायरल दावों को भी प्रबंधन ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार के दावे भ्रामक एवं तथ्यों से परे हैं और हाल ही में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी अधिकारिक स्पष्टीकरण भी इस संबंध में जनता के साथ साझा किए जा रहे हैं. प्रबंधन ने नागरिकों से आग्रह किया कि किसी भी वायरल पोस्ट या वीडियो पर विश्वास करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की अवश्य जांच करें.
प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी किसानों से धान, मक्का तथा टूटे चावल जैसी वस्तुओं की खरीदारी कर एथेनॉल बनाएगी, जिससे किसानों को उनकी फसल का अच्छा मूल्य मिल सकेगा. इसके साथ ही कंपनी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लगभग एक हजार लोगों के लिए रोजगार सृजन करेगी. प्रबंधन ने बताया कि कंपनी केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप पर्यावरण सुरक्षा, स्वच्छता तथा न्यूनतम संभव कार्बन उत्सर्जन के प्रति संकल्पित है तथा मानकों के अनुसार कंपनी को सभी आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त हैं.
कंपनी प्रबंधन ने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि वह पर्यावरण संरक्षण के सभी नियमों का पूर्ण पालन करेगी, किसानों के हितों की रक्षा एवं उनकी आय बढ़ाने का प्रयास करेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगी, बस्ती जनपद के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास में सकारात्मक योगदान देगी तथा पूर्ण पारदर्शिता एवं जनसहभागिता के साथ परियोजना का संचालन करेगी.
बस्ती में बन रही एथेनॉल फैक्ट्री पर कंपनी का बड़ा खुलासा, वायरल दावों पर दिया जवाब
बस्ती . अनीता डिस्टलरी प्रा. लि. द्वारा सल्टौआ गोपालपुर विकास खण्ड के दसिया में स्थापित की जा रही एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं का कंपनी प्रबंधन ने पुरजोर खंडन करते हुए एक विस्तृत जनहित सूचना एवं तथ्य पत्रक जारी किया है. कंपनी प्रबंधन का कहना है कि परियोजना से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, जिससे आम जनता, किसान भाइयों और मीडिया बंधुओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है. इसी भ्रम को दूर करने के उद्देश्य से कंपनी ने प्रश्न-उत्तर के रूप में तथ्यात्मक जानकारी सार्वजनिक की है.
सोमवार को स्टेशन रोड स्थित एक होटल बालाजी प्रकाश के सभागार में कंपनी डायरेक्टर रोहन जायसवाल ने पत्रकारों को बताया कि आरंभ से ही किसानों द्वारा अपनी जमीनों का बैनामा अनीता डिस्टलरी के नाम से सभी की सहमति से कराया जा रहा है और विगत चार वर्षों में जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर कोई विवाद सामने नहीं आया है. वर्ष 2021 में हुई पहली भूमि रजिस्ट्री से लेकर अंतिम रजिस्ट्री तक प्रत्येक भूमि की खरीद अनीता डिस्टलरी प्रा. लि. के नाम पर ही की गई है. कंपनी का यही नाम सभी सरकारी अभिलेखों, रजिस्ट्री दस्तावेजों तथा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में भी दर्ज है. कंपनी का कहना है कि ‘डिस्टिलरी’ शब्द स्वयं इस बात को स्पष्ट करता है कि यह एक एथेनॉल उत्पादन इकाई है, न कि जैसा दावा किया जा रहा है कि यहां मैदा फैक्ट्री या बीयर फैक्ट्री लगाई जा रही थी. भूमि खरीद की पूरी प्रक्रिया विधिवत और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई, प्रत्येक विक्रेता को रजिस्ट्री से पूर्व उसके बैंक खाते में भुगतान किया गया तथा सभी रजिस्ट्रियां संबंधित लोगों की पूर्ण सहमति से हुईं. ऐसे में यह कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है कि ग्रामीणों को परियोजना की जानकारी नहीं दी गई थी.
प्रोपराइटर सुधीर जायसवाल ने बताया कि कंपनी के निदेशक स्तर से लेकर सभी प्रतिनिधियों ने आरंभ से ही यह स्पष्ट कर रखा है कि यहां एथेनॉल संयंत्र लगाया जाएगा. स्थापना के समय के बाद जब सीमा दीवार का निर्माण शुरू हुआ, तो मुख्य राजस्व अधिकारी की उपस्थिति में किसानों के साथ लोक सुनवाई की बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया गया. कंपनी का निर्माण कार्य अब तक लगभग 75 प्रतिशत पूरा हो चुका है.
पर्यावरण को होने वाले नुकसान से जुड़े सवालों पर यूनिट हेड पी.एन. दूबे ने कहा कि यह दावा भी पूरी तरह निराधार और भ्रामक है. यह उद्योग भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार के सभी संबंधित विभागों से आवश्यक स्वीकृतियां और अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद ही स्थापित किया जा रहा है. पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा विस्तृत तकनीकी परीक्षण एवं अध्ययन के उपरांत ही परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है. संयंत्र जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि फैक्ट्री से किसी भी प्रकार का दूषित जल परिसर के बाहर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में प्रयुक्त जल का उपचार कर उसे पुनः-पुनः उत्पादन प्रक्रिया में ही इस्तेमाल किया जाएगा. संयंत्र का निर्माण पर्यावरण मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित सभी मानकों और नियमों के अनुरूप किया जा रहा है.
प्रबंधन ने यह भी बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 50 से अधिक एथेनॉल संयंत्र संचालित हैं, जिनमें से लगभग 20 अनाज आधारित एथेनॉल संयंत्र हैं, और यदि किसी को इस उद्योग को लेकर कोई संदेह है तो वह स्वयं इन संचालित संयंत्रों का भ्रमण कर उनकी कार्यप्रणाली और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देख सकता है. चीफ कन्सलटेन्ट पी.एन. पाण्डेय ने बताया कि एक लीटर एथेनॉल बनाने में दस हजार लीटर पानी खर्च होने तथा विभिन्न स्थानों के एथेनॉल प्लांट प्रदूषण फैला रहे होने के सोशल मीडिया पर वायरल दावों को भी प्रबंधन ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार के दावे भ्रामक एवं तथ्यों से परे हैं और हाल ही में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी अधिकारिक स्पष्टीकरण भी इस संबंध में जनता के साथ साझा किए जा रहे हैं. प्रबंधन ने नागरिकों से आग्रह किया कि किसी भी वायरल पोस्ट या वीडियो पर विश्वास करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की अवश्य जांच करें.
प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी किसानों से धान, मक्का तथा टूटे चावल जैसी वस्तुओं की खरीदारी कर एथेनॉल बनाएगी, जिससे किसानों को उनकी फसल का अच्छा मूल्य मिल सकेगा. इसके साथ ही कंपनी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लगभग एक हजार लोगों के लिए रोजगार सृजन करेगी. प्रबंधन ने बताया कि कंपनी केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप पर्यावरण सुरक्षा, स्वच्छता तथा न्यूनतम संभव कार्बन उत्सर्जन के प्रति संकल्पित है तथा मानकों के अनुसार कंपनी को सभी आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त हैं.
कंपनी प्रबंधन ने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि वह पर्यावरण संरक्षण के सभी नियमों का पूर्ण पालन करेगी, किसानों के हितों की रक्षा एवं उनकी आय बढ़ाने का प्रयास करेगी, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगी, बस्ती जनपद के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास में सकारात्मक योगदान देगी तथा पूर्ण पारदर्शिता एवं जनसहभागिता के साथ परियोजना का संचालन करेगी.
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विकास कुमार पिछले 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इनकी मजबूत पकड़ है, विधानसभा, प्रशासन और स्थानीय निकायों की गतिविधियों पर ये वर्षों से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विकास कुमार लंबे समय से भारतीय बस्ती से जुड़े हुए हैं और अपनी जमीनी समझ व राजनीतिक विश्लेषण के लिए पहचाने जाते हैं। राज्य की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार की पहचान देती है